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8 अप्रैल, 2021|4:51|IST

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प्रोत्साहन योजना से बढ़े रोजगार के मौके, जनवरी में बेरोजगारी दर घटकर 6.5% पर आ गई

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भारत को मैन्युफैक्चिरंग हब बनने के लिए शुरू की गई उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का सकारात्मक असर दिखाई देने लगा है। कंपनियों द्वारा नई भर्तियां करने से देश में रोजगार के अवसर बढ़ने लगे हैं। इस बात की तस्दीक सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा जारी की गई रोजगार के आंकड़ों से मिली है।

सीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2020 में देश में बेरोजगारी की दर 9.1% थी जबकि जनवरी 2021 में घटकर 6.5% पर आ गई है। यानी जनवरी में देश में रोजगार के आंकड़े में इजाफा हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक महीने के दौरान रोजगार के आंकड़ों में यह सबसे बड़ा इजाफा है। वहीं, इस दौरान रोजगार के दर में बढ़ोतरी हुई है। यह दिसंबर, 2020 के 36.9% के मुकाबले बढ़कर 37.9% हो गई है।

ईपीएफओ से 12.5 लाख नए सदस्य जुड़े

कर्मचारी भविष्य निधि द्वारा जारी आंकड़ों से भी पता चलता है कि देश में राजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। ईपीएफओ से दिसंबर 2020 में 12.54 लाख जुड़े हैं, जो दिसंबर 2019 से 24% से ज्यादा है। इससे पता चलता है कि अब देश में फिर से रोजगार बढ़ने लगा है। इससे पहले नवंबर 2020 में 10.11 लाख नए सदस्य जुड़े थे। 2020-21 में अब तक कुल 57.83 लाख नए सदस्य ईपीएफओ से जुड़े हैं। ईपीएफओ के डेटा के अनुसार, अगर उम्र के आधार पर नए सदस्यों का विश्लेषण किया जाए तो दिसंबर 2020 महीने में सबसे ज्यादा जुड़ने वाले नए सदस्य 22-25 वर्ष के हैं जिसकी संख्या 3.36 लाख है। उसके बाद 18-21 वर्ष के लोग हैं जिनकी संख्या 2.81 लाख है। 18-25 आयु वर्ग के सदस्यों को श्रम बाजार में नए रोजगार के रूप में देखा जा सकता है और दिसंबर- 2020 में इन नए सदस्यों द्वारा लगभग 49.19 फीसदी का योगदान दिया गया है। राज्यों के पेरोल आंकड़ों की तुलना करने से पता चलता है कि महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक रोजगार रिकवरी चक्र में सबसे आगे बने हुए हैं।

रोजगार खोजने वालों की संख्या कम हुई
सीएमआईई की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में रोजगार के अवसर बढ़ने से बेरोजगरों की संख्या का औसत 3.3 करोड़ से कम होकर 2.79 करोड़ पर आ गया। जनवरी में ऐसे लोगों की संख्या कम रही जो रोजगार तो करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मौके नहीं मिले हैं। यह बीते 2 साल में सबसे कम 4 करोड़ पर रहा।

कई सेक्टर को किया गया शामिल

सरकार ने पीएलआई स्कीम के तहत ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट को 57,000 करोड़ रुपये, फार्मा एंड ड्रग सेक्टर के लिए 15 हजार करोड़ रुपये, टेलीकॉम नेटवर्क एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 12,000 करोड रुपये, टेक्सटाइल एवं फूड प्रोडक्ट्स सेक्टर के लिए 10,000-10,000 करोड़ रुपये, सोलर फोटोवॉल्टिक सेक्टर के लिए 4500 करोड़ रुपये और टेक्सटाइल सेक्टर के लिए 6300 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। बैटरी बनाने के लिए 18100 करोड रुपये का प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम दिया जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक और टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट के लिए 5000 करोड़ रुपये, स्पेशियल्टी स्टील के लिए 6000 करोड़ रुपये के पीएलआई का प्रावधान किया गया है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना का लाभ रेफ्रजरेटर, वाशिंग मशीन जैसे उत्पाद, औषधि, विशेष प्रकार के इस्पात, वाहन, दूरसंचार, कपड़ा, खाद्य उत्पाद, सौर फोटोवोल्टिक और मोबाइल फोन बैटरी जैसे उद्योगों में निवेशकों को मिल सकता है।

क्या है पीएलआई योजना?
कोरोना संकट के बाद मार्च, 2020 में सरकार ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और आयात बिलों में कटौती करने के लिए प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) शुरू की थी, जिसका उद्देश्य घरेलू इकाइयों में निर्मित उत्पादों से बढ़ती बिक्री पर कंपनियों को प्रोत्साहन देना है। भारतीय और विदेशी कंपनियों को इस योजना के तहत आकर्षित कर भारत में निवेश बढ़ाना और रोजकार के मौके सृजन करना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। यह योजना पांच वर्ष की अवधि के लिए स्वीकृत की गई है।

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  • Web Title:Incentive scheme increases employment opportunities