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2.2 लाख घरों की परियोजना अटकी, दिल्ली-NCR में सबसे ज्यादा अटकी हैं योजनाएं

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देश में करीब आठ साल से अटकी परियोजनाओं में दो तिहाई से ज्यादा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की हैं। रियल एस्टेट परामर्श कंपनी जेएलएल इंडिया ने यह रिपोर्ट दी है। 

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2011 में शुरू करीब 1.56 लाख करोड़ रुपये मूल्य की 2.2 लाख घरों वाली परियोजनाएं अटकी हैं। इसमें दिल्ली-एनसीआर की हिस्सा 71 प्रतिशत है। एनसीआर और मुंबई दोनों की हिस्सेदारी 91 प्रतिशत है। इनमें से करीब 30,000 घरों के निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं को रद्द कर दिया गया है। एनसीआर में 86824 करोड़ रुपये मूल्य की परियोजनाओं के एक लाख 54 हजार 75 आवासीय इकाइयां अटकी हैं। चेन्नई में 4,474 करोड़ मूल्य की 8131 इकाई के विनिर्माण में देरी हुई । बेंगलुरु में 2768 करोड़ रुपये मूल्य की 5468 इकाई व पुणे में 3718 करोड़ रुपये मूल्य की 4,765 इकाइयां अटकी पड़ी हैं।

1. लाखों मकान खरीदार जेपी समूह, आम्रपाली और यूनिटेक जैसी रीयल एस्टेट कंपनियों की रिहायशी आवासीय परियोजनाओं में अटके हुए हैं। मकान खरीदारों का संगठन फोरम फार पीपुल्स कलेक्टिव एफार्ट्स के अध्यक्ष अभय उपाध्याय का तो दावा है कि कि परियोजनाओं में देरी के कारण देश भर में पांच लाख ग्राहक अटके पड़े हैं।

दिल्ली-मुंबई में ज्यादा संकट 
शहर                      अटके घर        घरों का मूल्य 

दिल्ली-एनसीआर     154075           86,824 
मुंबई                       43,449           56,435 
चेन्नई                      8131             4474 
बेंगलुरु                      5468             2768 
पुणे                          4765             3718
(घरों का मूल्य करोड़ रुपये में)
 

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  • Web Title:In Delhi NCR home plans are more stuck than other city