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22 अप्रैल, 2021|7:55|IST

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बाइडेन के आने से भारतीय उद्योग जगत पर असर, चीन पर और बढ़ सकती है सख्ती

joe biden

जो बाइडन ने अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ले ली है। इसके बाद दुनियाभर की नजरें बाइडन की अगली रणनीति और अन्य देशों के साथ कारोबारी संबंधों को लेकर उनके कदम पर लगी हुई हैं। ट्रंप की सख्त वीजा नीति ने भारतीय आईटी उद्योग को तगड़ा झटका दिया है। जबकि अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध दुनियाभर के लिए परेशानी का सबब बना रहा। अब बदले माहौल में भारतीय उद्योग जगत अमेरिका से नरम रुख के साथ कारोबारी संबंधों में नई गर्मजोशी की उम्मीद कर रहा है।

अमेरिका से भारत को उम्मीद

विश्लेषकों को उम्मीद है कि बाइडन की अगुवाई में चीन पर और सख्ती बढ़ सकती है। इसके अलावा अमेरिका के लिए भारत अहम रणनीतिक साझीदार बन सकता है। उम्मीद है कि बाइडन एच1 वीजा नीति में बदलाव करते हुए नरमी बरतेंगे जिसे ट्रंप ने बेहद सख्त बना दिया है। इसकी वजह से भारतीय आईटी कंपनियां भारतीय लोगों की ज्यादा भर्तियां नहीं कर पा रही हैं। ट्रंप ने स्थानीय स्तर पर भर्ती करने के साथ उन्हे न्यूनतम भुगतान करने का भी मानक तय कर दिया था। यह भारतीय आईटी कंपनियों और देश के आईटी निर्यात के लिए बड़े झटके की तरह थी। उम्मीद है कि बाइडन के आने से हालात बदलेंगे।

दोनों देशों के बीच कारोबार

वर्ष 2019-20 में भारत और अमेरिका के बीच 88.92 अरब डॉलर का द्विपक्षीय कारोबार हुआ। इस अवधि में अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा निर्यात स्थल बनकर उभरा। इस अवधि में भारतीय निर्यात में अमेरिका का 17 फीसदी योगदान रहा। वहीं वस्तुओं के आयात के मामले में भारत अमेरिका के लिए तीसरा सबसे बड़ा आयातक रहा। इसके अलावा वर्ष 2020 में अप्रैल-सितंबर अवधि में भारत में सबसे अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) करने के मामले में अमेरिका दूसरे स्थान पर रहा। 

बाइडन से अधिक उम्मीद क्यों

ओबामा के राष्ट्रपति रहने जो बाइडन उपराष्ट्रति थे। बाइडन ने उस समय कई भारत-अमेरिकी करार में अहम भूमिका निभाई थी। इसके अलावा बाइडन ने उस समय ओबामा द्वारा शुरू किए गए ट्रास पैसेफिक पार्टनरशिप (टीपीपी) पहल को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका अदा की थी। अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के रूप में बाइडन इस पहल को दोबारा शुरू कर सकते हैं। हालांकि, इसमें एशिया के अन्य सहयोगी देशों को बराबर महत्व दिया गया था। ऐसे में यदि कपड़ों के कारोबार में पाकिस्तान को तरजीह दी जाती है तो वह भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए फायदेमंद नहीं होगा। इसके अलावा कुछ हद तक भारत को दुनिया का निर्माण हब बनाने यानी मेक इन इंडिया पहल के लिए भी चुनौती बढ़ सकती है।

चीन को लेकर कैसे रहेगी रणनीति

विश्लेषकों को उम्मीद है कि बाइडन चीन के साथ फिर से व्यापार युद्ध शुरू करने या दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था पर सीधे तौर पर कोई कदम उठाएंगे। वह चीन पर रणनीतक दबाव बना सकते हैं। कोरोना की शुरुआत चीन से हुई थी और इससे अमेरिकी निवेशकों को भी नुकसान हुआ है। ऐसे में बाइडन भारत को निवेश स्थल के रूप में तरजीह दे सकते हैं। इससे भारत में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ सकता है।

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  • Web Title:impact of Indian industry due to the arrival of Biden Strictness may increase on China