Monday, January 17, 2022
हमें फॉलो करें :

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

हिंदी न्यूज़ बिजनेसहेल्थ इंश्योरेंस लेने जा रहे हैं तो चेक कर लें कि पड़ोस के डॉक्टर का क्लीनिक, दवा दुकान और लैब भी बीमा पॉलिसी के दायरे में है या नहीं

हेल्थ इंश्योरेंस लेने जा रहे हैं तो चेक कर लें कि पड़ोस के डॉक्टर का क्लीनिक, दवा दुकान और लैब भी बीमा पॉलिसी के दायरे में है या नहीं

नई दिल्ली। हिन्दुस्तान ब्यूरोDrigraj Madheshia
Thu, 09 Dec 2021 05:48 AM
हेल्थ इंश्योरेंस लेने जा रहे हैं तो चेक कर लें कि पड़ोस के डॉक्टर का क्लीनिक, दवा दुकान और लैब भी बीमा पॉलिसी के दायरे में है या नहीं

इस खबर को सुनें

स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी आपके इलाज का खर्च बचाकर बचत की भी रक्षा करती है, लेकिन जिस तरह से स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ रहा है, उससे आपका बीमा कवर कम पड़ सकता है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड की रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2019 के बाद करीब दो साल में स्वास्थ्य मुद्रास्फीति (महंगाई दर) 3.8 फीसदी से बढ़कर 8.4 फीसदी हो गई है। इसके कारण लोग ओपीडी केंद्रों पर जाने से बचते हैं।

इसकी वजह से लोगों को अपनी जेब से ज्यादा खर्च करना पड़ता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में, सभी स्वास्थ्य देखभाल लागतों का लगभग 62 ग्राहकों की जेब से खर्च होता है। वहीं बीमा नियामक इरडा की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल स्वास्थ्य दावों का 40 फीसदी प्रतिपूर्ति (रिंबर्समेंट) के रूप में निपटाया जाता है किया जाता है जो प्रक्रिया और समय के हिसाब से भी महंगा है।

आपको होता है यह नुकसान

संजय दत्ता, चीफ-अंडरराइटिंग, क्लेम एंड रीइंश्योरेंस, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने कहा, बढ़ती चिकित्सा मुद्रास्फीति को देखते हुए, उपभोक्ताओं को अक्सर जेब से भुगतान करने और रिंबर्समेंट की प्रतीक्षा करने के परिणामस्वरूप अत्यधिक वित्तीय बोझ उठाना पड़ता है। अक्सर स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदते समय, ग्राहक कम बीमा राशि के लिए जाते हैं ,क्योंकि वह अस्पताल में भर्ती होने की चिंता नहीं करते हैं और परामर्श शुल्क और परीक्षण, एक्स-रे आदि से जुड़े खर्चों को ध्यान में नहीं रखते हैं।

बढ़ती चिकित्सा मुद्रास्फीति को देखते हुए, यह खर्च पॉलिसीधारकों की बचत की आदत को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में यह देखना बेहद जरूरी है कि स्थानीय या पड़ोस के डॉक्टर का क्लीनिक, दवा दुकान और लैब भी बीमा पॉलिसी के दायरे में हो।

किन बातों का रखें ध्यान

मेडपे के सह-संस्थापक और सीईओ रवि चंद्रा ने कहा, बीमा नियामक आईआरडीएआई बीमाकर्ताओं को ओपीडी को कवर करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है और अधिकांश बीमाकर्ता विभिन्न प्रकार के ओपीडी बीमा उत्पादों के साथ प्रयोग कर रहे हैं। चंद्रा का कहना है कि भारत में ओपीडी बीमा की अत्यधिक आवश्यकता है और मेडपे इस क्षेत्र में बीमाकर्ताओं को कैशलेस दावों की सुविधा के साथ बेहद स्थानीय या पड़ोस के डॉक्टर, दवा दुकान और ओपीडी नेटवर्क स्टैंड-अलोन क्लीनिक, दवा दुकान और लैब्स को भी बिना किसी परेशानी के बीमा क्लेम को स्वीकार करने की क्षमता के साथ सक्षम बना रहे हैं।

सब्सक्राइब करें हिन्दुस्तान का डेली न्यूज़लेटर

संबंधित खबरें