कोरोना को ऐसे टक्कर दे रहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश समेत देश की महिलाएं, बना डाले 7 करोड़ 47 लाख एन-95 मास्क

Drigraj Madheshia नई दिल्ली | सुहेल हामिद,
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कोरोना वायरस संक्रमण से मुकाबला करने के लिए देश में एन-95 मास्क का उत्पादन जोरों पर है। मास्क बनाने वाली कंपनियां अपनी क्षमता से 50 फीसदी अधिक उत्पादन कर रही हैं। वहीं, महिलाओं के स्वंय सहायता समूह...

कोरोना को ऐसे टक्कर दे रहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश समेत देश की महिलाएं, बना डाले 7 करोड़ 47 लाख एन-95 मास्क

कोरोना वायरस संक्रमण से मुकाबला करने के लिए देश में एन-95 मास्क का उत्पादन जोरों पर है। मास्क बनाने वाली कंपनियां अपनी क्षमता से 50 फीसदी अधिक उत्पादन कर रही हैं। वहीं, महिलाओं के स्वंय सहायता समूह (एसएचजी) भी साढ़े सात करोड़ से अधिक साधारण मास्क बनाकर अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए कहा था कि आपदा को अवसर में बदलते हुए प्रतिदिन दो लाख एन-95 मास्क उत्पादन की क्षमता हासिल कर ली है।

6 कंपनियां भारतीय मानक ब्यूरो से सत्यापित मास्क बना रही हैं

देश में मास्क के उत्पादन को बढ़ाने और निर्माताओं व विक्रेता के बीच समन्वय बनाने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय ने इसके लिए एक वेबसाइट तैयार की है। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में इस वक्त 6 कंपनियां भारतीय मानक ब्यूरो से सत्यापित मास्क बना रही हैं। इन कंपनियों की क्षमता प्रतिदिन 1,56,965 मास्क बनाने की है, पर यह कंपनियां क्षमता से अधिक दो लाख 31 हजार मास्क रोज बना रही हैं।

भारतीय मानक ब्यूरो ने टेस्टिंग की प्रक्रिया बदला

देश में एन-95 मास्क के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो ने भी टेस्टिंग की प्रक्रिया में बदलाव किया है। एन-95 मास्क बनाने की इच्छुक कंपनियां किसी भी बीआईएस लैब में अपन उत्पाद की टेस्टिंग करा सकती है। इसके साथ जिन संगठनों के पास ऐसे उत्पादों की टेस्टिंग करने का बीआईएस का लाइसेंस है, वहां भी टेस्टिंग कराई जा सकती है।

आंध्र प्रदेश की महिलाएं आगे

महिलाओं के स्वयं सहायता समूह भी कोरोना वायरस संक्रमण रोकने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। महिलाओं ने 7 करोड़ 47 लाख मास्क तैयार किए हैं। सबसे अधिक मास्क आंध्र प्रदेश की महिलाओं ने किए हैं। इन्होंने 2 करोड़ 81 लाख मास्क बनाए हैं। सबसे कम अंडमान निकोबार में महिलाओं ने सिर्फ 5500 मास्क बनाए गए हैं। उत्तर प्रदेश में महिलाओं के 52 सहायता समूहों ने 30 लाख 36 हजार मास्क बनाए हैं।

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बिहार में 38 समूहों ने 18 लाख, झारखंड में 24 स्वयं सहायता समूहों ने नौ लाख 33 हजार और उत्तराखंड में महिलाओं के 13 एसएचजी ने साढ़े आठ लाख मास्क बनाए हैं। मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद यह सभी आंकड़े 29 अप्रैल तक के हैं। ऐसे में पिछले बीस दिन के अंदर भी करोड़ों की संख्या में मास्क बनाए गए हैं।

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दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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