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आयकर विभाग से नोटिस मिले तो ऐसे जवाब दें...

आयकर विभाग से आपको कोई नोटिस मिलता है तो इससे घबराए नहीं। आप जब आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं तो विभाग खुद के पास उपलब्ध सूचना से इसकी पुष्टि करता है, जिसे आकलन कहते हैं। कोई विसंगति है तो नोटिस भेजकर ईमेल के जरिये अतिरिक्त जानकारी मांगी जा सकती है। अगर किसी वजह से नोटिस की समयसीमा निकल गई है तो विभाग से अनुरोध कर कुछ और समय मांग सकते हैं। जवाब से संतुष्ट होने पर विभाग इसकी औपचारिक सूचना भी देता है। 

गलत डाटा या तथ्य
धारा 143(3) में नोटिस आईटीआर में गलत डाटा या तथ्य की प्रारंभिक जांच से जुड़ी होता है। इसमें विभाग अपने आकलन और आईटीआर में आय व चुकाए कर का अलग-अलग टेबल भेज सकता है। कम टैक्स चुकाने पर मांग होती है।

यह कदम उठाएं 
विभाग की टैक्स की मांग से सहमत नहीं हैं तो ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर जानकारी दें और अपने दावे के पक्ष में दस्तावेज जमा करें। ऑनलाइन यह जवाब देने की तारीख नोटिस मिलने के 30 दिन है। 

रिफंड संबंधी नोटिस 
धारा 245 के तहत विभाग बता सकता है कि इस बार रिफंड पिछले वर्ष की टैक्स मांग से एडजस्ट कर लिया गया। 

यह कदम उठाएं 
हो सकता है कि पिछले रिटर्न में टैक्स डिमांड का जो जवाब दिया हो, विभाग उससे संतुष्ट न हो। हर साल जांच पड़ताल करें कि रिटर्न स्वीकार हुआ है या नहीं। 

गलत रिटर्न 
रिटर्न में गड़बड़ी पर धारा 139(9) के तहत नोटिस आ सकता है इसका जवाब नहीं देते हैं तो रिटर्न खारिज माना जाएगा। 

यह कदम उठाएं 
फॉर्म 26एएस और रिटर्न में टीडीएस डाटा में मिलान न होने पर नोटिस आता है तो संशोधित रिटर्न के साथ जवाब दें।

गहराई से जांच या ऑडिट संबंधी नोटिस
आयकर की धारा 143(3) के तहत आपके आईटीआर की गहराई से जांच या ऑडिट का नोटिस भेजा जाता है। आपको नोटिस में दी गई तारीख में सवालों का जवाब और मांगे गए दस्तावेज देने होंगे। 

यह कदम उठाएं 
जिन बिंदुओं पर जवाब मांगा जाए उनका क्रमवार लिखित उत्तर दें। ई-फाइलिंग पोर्टल में लॉग इन कर मांगे गए दस्तावेज अपलोड कर दें। विभाग इसकी जांच कर  सूचित करेगा। समय-समय पर ऑनलाइन रिकॉर्ड जाचें।

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  • Web Title:How to respond to income tax department notice