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ITR filing: मृतक व्यक्ति का अंतिम ITR जरूर दाखिल करें कानूनी वारिस

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अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो संपत्ति और कर्ज के अलावा कई अन्य जिम्मेदारियां भी कानूनी उत्तराधिकारियों पर आती हैं। इसमें मृतक का आखिरी आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करना और उसके पैन-आधार कार्ड जैसे दस्तावेजों को बंद कराना शामिल है। मृतक का आईटीआर दाखिल करने से आयकर विभाग को भी जानकारी मिल जाती है कि संपत्ति का किसे और कैसे हस्तांतरण हुआ है और इससे तमाम कानूनी उलझनों से बचा जा सकता है। 

1. आईटीआर ऐसे दाखिल करें 
क्लियरटैक्स की सीईओ और संस्थापक अर्चित गुप्ता आयकर कानून 1961 की धारा 159 के तहत प्रावधान है कि अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसके कानूनी उत्तराधिकारी को टैक्स चुकाना होगा, जैसे कि अगर वह  शख्स जिंदा होता तो अपनी जिम्मेदारी पूरा करता। अगर आप कानूनी उत्तराधिकारी हैं तो सबसे पहले आपको आयकर विभाग से संपर्क कर खुद को मृतक के कानूनी प्रतिनिधि के रूप में पंजीकृत कराना होगा। ऑनलाइन फाइलिंग सिस्टम के तहत इसका आवेदन किया जा सकता है। इसको मंजूरी मिलते ही आपको मृतक की ओर से आईटीआर भरने का हक मिल जाता है। 

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2. कर की देनदारी कानूनी उत्तराधिकारियों पर
अर्चित ने कहा कि अगर मृतक का आईटीआर नहीं भरा जाता है तो जो भी कर देनदारी बनती है, वह कानूनी उत्तराधिकारियों पर आती है। आयकर विभाग को यह देनदारी वसूल करने का हक है। 

3. पैन कार्ड भी सरेंडर करें
मृतक के पैन कार्ड को सरेंडर करने के लिए आपको क्षेत्रीय आकलन अधिकारी के समक्ष आवेदन करना होगा। इसमें पैन कार्ड सरेंडर करने की वजह (धारक की मृत्यु के संबंध में इसे अंकित करें), उसकी जन्मतिथि के साथ मृत्यु प्रमाणपत्र की कॉपी भी लगानी होगी। 

4. आधार का बायोमेट्रिक ब्लॉक कराना आवश्यक
किसी की मृत्यु पर आधार कार्ड को सरेंडर करने की प्रक्रिया तो यूआईडीएआई ने नहीं बताई है, लेकिन सुरक्षा कारणों से उसका बायोमेट्रिक ब्लॉक कराना आवश्यक है। ब्लॉक होने के बाद इसका किसी दस्तावेज के प्रमाणीकरण या भुगतान में इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। ऑनलाइन भी एक सिक्योरिटी कोड को मृतक के मोबाइल नंबर के साथ यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। यूआईडीएआई की साइट पर लॉक या अनलॉक बायोमेट्रिक का विकल्प resident.uidai.gov.in/biometric-lock होता है। 

5. आईटीआर- बैंक खाता बंद करने के बाद पैन कार्ड सरेंडर करें
विशेषज्ञों का कहना है कि रिटर्न फाइलिंग, बैंक खाता बंद करने, सभी वित्तीय निवेश की निकासी की कार्यवाही पूरी करने के बाद ही पैन कार्ड और आधार बायोमेट्रिक को ब्लॉक करने का कदम उठाना चाहिए। लॉ फर्म सिंह एंड एसोसिएट्स के संस्थापक साझेदार मनोज के. सिंह ने कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी ये दस्तावेज उसकी पहचान साबित करने के लिए अहम होते हैं। लिहाजा संपत्ति और देनदारी की कार्यवाही पूरी करने के बाद ऐसा करना चाहिए। 

6. इसलिए जरूरी हैं ये कदम
- मृतक की उस वित्तीय वर्ष में कर देनदारी चुकाना आवश्यक
- मृतक की संपत्तियों पर हक और आगे के दायित्व के लिए जरूरी
- पैन कार्ड या आधार का किसी भी प्रकार के दुरुपयोग से बचाना

7. आयकर विभाग में खुद को कानूनी उत्तराधिकारी ऐसे साबित करें
स्टेप- 1. आयकर विभाग की साइट पर ई-फाइलिंग अकाउंट में क्लिक करें
स्टेप- 2. इसमें माई अकाउंट टैब पर क्लि करें
स्टेप- 3. इसमें एड या रजिस्टर ऐस रिप्रंजेटेटिव के ऑप्शन पर जाएं
स्टेप- 4. लिस्ट में लीगल हेयरशिप (कानूनी वारिस) को चुनें
स्टेप- 5. मृतक का पैन नंबर, बैंक खाता और मृत्यु की तारीख अंकित करें
स्टेप- 6. मृत्यु प्रमाणपत्र की पीडीएफ, अपनी पैन डिटेल व कानूनी वारिस के प्रमाणपत्र दें
स्टेप- 7. सारी जानकारी चेक करने के बाद सबमिट कर दें और मंजूरी का इंतजार करें

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