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घर बेचने के बाद टैक्स बचाने के लिए दूसरी संपत्ति खरीदना जरूरी नहीं

मकान या जमीन बेचकर जरूरतें पूरा करने की सोच रहे लोगों को सबसे बड़ी चिंता टैक्स की होती है। सामान्यतया लोगों को यही पता होता है कि मकान बेचने से हुए लाभ पर टैक्स बचाने के लिए उस पूंजी को कहीं और रियल एस्टेट में निवेश करना पड़ता है, लेकिन ऐसा नहीं है। कर छूट के लिए मकान बेचकर दूसरी संपत्ति खरीदना जरूरी नहीं है, बॉन्ड, म्यूचुअल फंड या शेयर में निवेश करके भी टैक्स बचा सकते हैं। पेश है रिपोर्ट। 

ऐसे समझें टैक्स देनदारी
आयकर कानून के तहत कई प्रावधान है, जिनके तहत आप संपत्ति पर पूंजीगत लाभ कर बचा सकते हैं। जिस प्रकार आप अपनी कमाई पर टैक्स देते हैं, उसी तरह अचल परिसंपत्तियों को बेचने पर भी टैक्स की देनदारी बनती है। किसी को घर, शेयर या सोना जैसे चीजों के हस्तांतरण पर ऐसी कर देनदारी बनती है। लेकिन ऐसे कई तरीके हैं, जिनसे आप पूंजीगत लाभ कर बचा सकते हैं। हालांकि अगर आप किसी मकान या जमीन को खरीद के दो साल के भीतर ही बेचते हैं तो कम राहत मिलती है। इस अवधि में लघु अवधि पूंजीगत लाभ (एसटीसीजी) कर लगता है। लेकिन दो साल बाद ऐसी संपत्ति बेचते हैं तो लांग टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) बनता है और इससे बचने के तीन उपाय हैं। 

घर में निवेश पर बचत ऐसे
जमीन या भूमि को पूंजीगत संपत्ति माना जाता है। आप किसी घर को 24 महीने यानी दो साल के भीतर बेचते हैं तो बिक्री से मिले पूंजीगत लाभ को आपकी सालाना आय में जोड़ दिया जाता है और उसी के अनुसार एसटीएसजी लगता है। अगर यही संपत्ति आप दो साल के बाद बेचते हैं तो 20 प्रतिशत की दर से एलटीसीजी लगता है। एलटीसीजी में इंडेक्सेशन बेनेफिट भी मिलता है, यानी महंगाई के हिसाब से देनदारी कुछ कम हो जाती है। 

बजट में दो मकानों पर मिली छूट
धारा 54 कर छूट देती है, जब आप एक घर बेचकर दूसरा खरीद लेते हैं, यानी मकान बेचने से मिले पूंजीगत लाभ को कोई दूसरा खरीदने या मकान निर्माण में खर्च कर दिया जाए। बजट में यह छूट एक मकान से बढ़ाकर दो कर दी गई है। हालांकि मकान की बिक्री से हुआ पूंजीगत लाभ दो करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होना चाहिए फिर चाहे उसे दो संपत्तियों में भले ही निवेश किया गया हो। यह लाभ किसी व्यक्ति को जिंदगी में सिर्फ एक बार मिलता है। 

बॉन्ड में निवेश के लिए यह विकल्प
अगर आप प्रापर्टी बेचना चाहते हैं और दोबारा यह पैसा रियल एस्टेट में नहीं निवेश करना चाहते हैं तो भी टैक्स की बचत करने का विकल्प है। धारा 54ईसी आपको जमीन या इमारत बेचकर उसे विशिष्ट बॉन्ड में निवेश करने पर टैक्स की छूट देती है। आवासीय और गैर आवासीय दोनों तरह की प्रापर्टी में यह छूट मिलती है। ऐसे बॉन्ड राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, ग्रामीण विद्युतीकरण निगम जैसे अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़े होते हैं। मकान बेचने के छह माह में यह रकम ऐसे बॉन्ड में निवेश करनी होती है। ध्यान रखें कि अधिकतम 50 लाख रुपये ही ऐसे बॉन्ड में निवेश कर सकते हैं और पांच साल तक इसे भुना नहीं सकते।  

सोना और शेयर पर ऐसे करें बचत
अगर सोना, शेयर या म्यूचुअल फंड बेचने से आपको पूंजीगत लाभ प्राप्त हो रहा है तो भी उस पर टैक्स की बचत धारा 54एफ के तहत की जा सकती है, अगर आप यह पूंजी कुछ शर्तों के साथ आवासीय परिसंपत्ति खरीदने में करते हैं। इसमें टैक्स बचाने के लिए आपको सोना, शेयर या म्यूचुअल फंड बेचने से मिली पूरी रकम न कि पूंजीगत लाभ मकान खरीदने या निर्माण में खर्च करनी होती है। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो कर छूट उसी अनुपात में ही मिलेगी। मान लीजिए, आपका 15 लाख रुपये में खरीदा सोना पांच साल बेचने पर 25 लाख रुपये मिले हैं तो दस लाख रुपये के लाभ पर टैक्स बचाने के लिए पूरा 25 लाख रुपये दोबारा निवेश करना पड़ेगा। अगर बिक्री का 40 फीसदी दोबारा निवेश करते हैं तो बाकी के 60 फीसदी पर कर देना होगा। शर्त यह है कि जो घर आप बेच रहे हैं, उसे छोड़कर आपके पास एक से ज्यादा मकान नहीं होना चाहिए। 

कई विकल्पों का इस्तेमाल संभव
आप दो विकल्पों का भी साथ इस्तेमाल कर सकते हैं। धारा 54 और 54ईसी का इस्तेमाल कर प्रापर्टी बेचने से हुए पूंजीगत लाभ का कुछ हिस्से दूसरी प्रापर्टी में और कुछ बॉन्ड खरीदने में किया जा सकता है। इसमें निवेश की समयसीमा, लॉक इन पीरियड और अन्य प्रावधानों का पालन करना जरूरी है। 

आनुपातिक आधार पर टैक्स प्रावधान
कर छूट का लाभ लेने के बाद अगर पूरी रकम नहीं निवेश करते हैं तो आनुपातिक आधार पर बाकी रकम पर टैक्स लगेगा। एक मकान को बेच दूसरा खरीद कर टैक्स छूट लेने के बाद तीन साल के भीतर ही उसे दोबारा बेच देते हैं तो यह लाभ वापस हो जाता है। ऐसे में यह आपको उस पर दोबारा कर देना पड़ेगा।नई प्रापर्टी बिक्री के या तो एक साल पहले खरीद ली जाए या बिक्री के दो साल के बाद तक। या फिर नई आवासीय परिसंपत्ति पुरानी प्रापर्टी बिक्री के तीन साल के भीतर बना ली जाए।

घर, सोना-शेयर पर ऐसे बचा सकते हैं टैक्स
व्यक्ति : धारा 54 : धारा54ईसी : धारा 54एफ
पूंजीगत लाभ : घर-जमीन : घर-जमीन : शेयर, सोना, बॉन्ड व अन्य
छूट :  दो आवासीय परिसंपत्ति में निवेश कर बचा सकते हैं टैक्स : बॉन्ड में निवेश कर टैक्स बचाएं : आवासीय परिसंपत्ति में निवेश से छूट संभव
छूट के लिए निवेश समयसीमा : एक साल पहले खरीदे गए घर या बिक्री के दो साल के भीतर : बिक्री के छह माह में निवेश :  एक साल पहले खरीदे गए या पुराने मकान के दो साल के भीतर हस्तांतरण या बिक्री के तीन साल में पूंजीगत लाभ के पैसे से नया निर्माण
लाभ कर की वापसी : हां  : हां  : हां

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