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काम की बात : होम लोन का टर्म प्लान दूसरे विकल्पों से ज्यादा फायदेमंद

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बीमा पॉलिसी मुश्किल वक्त में सबसे पहले काम आने वाला वित्तीय उत्पाद है। ऐसे में इसे आंखमूंदकर लेने की बजाय पूरी पड़ताल के बाद लेना चाहिए। आवास ऋण (होम लोन) का भी बीमा होता है। इस श्रेणी में क्रेडिट शील्ड होम लोन पॉलिसी सबसे बेहतर विकल्प हो सकती है। आइए जानें क्यों और कैसे आपके लिए फायदेमंद हो सकती है यह पॉलिसी।

क्या है क्रेडिट शील्ड पॉलिसी
जीवन बीमा में टर्म प्लान के नाम से पॉलिसी दी जाती है। इसका प्रीमियम सस्ता और कवर ज्यादा होता है। होम लोन का जो बीमा टर्म प्लान के साथ जुड़ा या उसकी खासियत के साथ आता है उसे क्रेडिट शील्ड होम लोन पॉलिसी कहते हैं। हालांकि, सामान्य टर्म प्लान में प्रीमियम सालाना चुकाना होता है। जबकि होम लोन क्रेडिट शील्ड पॉलिसी में एकमुश्त प्रीमियम (सिंगल प्रीमियम) चुकाना होता है। इस पॉलिसी में भी होम लोन का कवर शामिल होता है।

* 50 लाख रुपये का कम से कम बीमा जरूर कराएं क्रेडिट शील्ड होम लोन स्कीम के तहत।
* 01 करोड़ के टर्म प्लान पर सालाना प्रीमियम कम से कम दस हजार रुपये।
* 90 फीसदी से ज्यादा बीमा क्लेम निपटारे वाली कंपनी को माना जाता है दूसरों से बेहतर।

आपके लिए कैसे फायदेमंद
क्रेडिट शील्ड पॉलिसी भी कर्ज का मूलधन जैसे-जैसे घटता जाता है उसका कवर घटता जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसमें मिलने वाली सुविधा है। बीमाधारक के नहीं रहने की स्थिति में इस पॉलिसी के जरिये होम लोन की राशि चुकाई जाती है। लेकिन इसके लिए बीमा कंपनी में दौड़भाग करने की पूरी जिम्मेदारी बीमाधारक के परिवार की नहीं होती है बल्कि बैंक बीमा कंपनी से मिलकर इस पॉलिसी के तहत ज्यादातर दस्तावेज की प्रक्रिया पूरी करते हैं। ऐसे में यह बीमाधारक और उसके परिवार के लिए बेहद सुविधाजनक होता है। बीमा विशेषज्ञों का कहना है कि क्रेडिट शील्ड पॉलिसी तभी ज्यादा फायदेमंद है जब बीमाधारक के पास पहले से सामान्य टर्म प्लान हो।

ऊंचा प्रीमियम फिर भी सस्ता
इस पॉलिसी का प्रीमियम सामान्य टर्म प्लान के मुकाबले ऊंचा होता है। सामान्य टर्म प्लान में करीब पांच हजार रुपये में 50 लाख रुपये का बीमा मिल जाता है। हालांकि, क्रेडिट शील्ड पॉलिसी का प्रीमियम महंगा होने की वजह  एकमुश्त भुगतान भी है। मगर लंबे समय में यह सामान्य जीवन बीमा पॉलिसी के प्रीमियम के मुकाबले ज्यादा सस्ती पड़ती है। बैंक जोखिम को देखते हुए ऊंचे प्रीमियम वाली बीमा कंपनियों से करार करना पसंद करते हैं।

आसान है दावा निपटान
क्रेडिट शील्ड पॉलिसी में बैंक और होम लोन देने वाली कंपनियां दो तरह का विकल्प देती हैं। पहले विकल्प के तहत दावा निपटान (क्लेम) के समय बीमा राशि बैंक सीधे अपने खाते में ले लेते हैं। वहीं दूसरे विकल्प के तहत वह बीमाधारक के लोन अकाउंट में इस राशि को हस्तांतरण का विकल्प होता है। दोनो ही स्थिति में दावा निपटान की प्रक्रिया आसान होती है। हालांकि, बीमा विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी बीमा पॉलिसी लेने के पहले उसके दावा निपटान का अनुपात जरूर देखना चाहिए। दावा निपटान का अनुपात 90 फीसदी औसत माना जाता है और यह 95 फीसदी या उससे अधिक है तो इसे बेहतर माना जाता है।

इसलिए जरूरी है बीमा
होम लोन बैंकों के लिए सुरक्षित कर्ज की श्रेणी में आता है। होम लोन की शर्तों के मुताबिक यदि कर्ज लेने वाला कर्ज चुकाने में विफल रहता है तो बैंकों को घर अपने कब्जे में लेने का अधिकार रहता है। ऐसे में यदि कर्ज लेने वाले की मृत्यु हो जाती है तो उसके परिवार के लिए कर्ज चुकाना बेहद मुश्किल हो जाता है और घर छोड़ने का संकट सामने आ जाता है। बैंक इस परेशानी से परिवार को बचाने के लिए ही होम लोन का बीमा कराने को कहते हैं। ऐसा होने पर कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की होती है। 

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  • Web Title:Home Loan Term Plan More Beneficial Than Other Options