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जीएसटी के ईवे बिल ने जुलाई में फिर पकड़ी रफ्तार, 25 जुलाई तक 4.9 करोड़ बिल जेनरेट

नई दिल्ली। हिन्दुस्तान ब्यूरोPublished By: Drigraj Madheshia
Thu, 29 Jul 2021 09:02 AM
जीएसटी के ईवे बिल ने जुलाई में फिर पकड़ी रफ्तार, 25 जुलाई तक 4.9 करोड़ बिल जेनरेट

देश की अर्थव्यवस्था कोरोना की दूसरी लहर के झटके से बाहर निकलती हुई दिख रही है। जीएसटी के तहत जारी होने वाले ई-वे बिल के जुलाई के आंकड़ें इसका स्पष्ट सकेंत दे रहे हैं। जीएसटी नेटवर्क पोर्टल के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जुलाई महीने की 25 तारीख तक रोजाना औसतन 20.20 लाख ई-वे बिल जनरेट हुए हैं। यह इस साल अप्रैल के औसत से भी ऊपर पहुंच गया है। इसे कारोबारियों गतिविधियों के पटरी पर तेजी से आने का संकेत माना जा रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक जुलाई महीने में मई महीने के मुकाबले ई-वे बिल जनरेशन में 54 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। जुलाई महीने में 25 तारीख तक तक कुल 4.9 करोड़ ई-वे बिल जनरेट हो चुके हैं। वहीं, जून में 5.46 करोड़, मई में 3.99 करोड़, अप्रैल में 5.87 करोड़ और मार्च में जब रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह हुआ था उस समय 7.12 करोड़ से ज्यादा ई-वे बिल जनरेट हुए थे। रोजाना औसत के मामले भी मार्च के बाद जुलाई में सबसे ज्यादा ई-वे बिल जेनरेट हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक मार्च में रोजाना 22.97 लाख, अप्रैल में 19.58 लाख, मई में 12.89 लाख और जून में ये 18.22 लाख ई-वे बिल जनरेट किए गए थे।

रोजाना औसत ई-वे बिल

महीना ईवे बिल
मार्च 22.97 लाख
अप्रैल 19.58 लाख
मई 12.89 लाख
जून 18.22 लाख
*जुलाई

20.2 लाख (आंकड़े 25 तारीख तक)

मई में लगा था बड़ा झटका

देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर मई के मध्य में अपने शिखर पर थी। इसकी वजह से कारोबारी गतिविधियां सुस्त पड़ने से जीएसटी संग्रह में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई थी। आंकड़ों के मुताबिक मई महीने में हुए कारोबार से सिर्फ 92,849 करोड़ रुपये का ही जीएसटी संग्रह हुआ था। पिछले साल अक्तूबर के बाद पहली बार जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ रुपये के नीचे गया था। उसके बाद से धीरे धीरे लॉकडाउन की पाबंदियां हटाने सेकोरोबारी गतिविधियां सामान्य होनी शुरू हो गई थीं।

रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

कोरोना की दूसरी लहर खत्म होने के बाद जुलाई में कारोबारी गतिविधियां सुधरने से उम्मीद लगाई जा रही है कि आने वाले महीनों में जीएसटी संग्रह से सरकार की कमाई बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोरोना की तीसरी लहर काबू में रहती है तो जुलाई के साथ आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था में और तेजी आएगी। कंपनियों में कारोबारी गतिविधियों में सुधार से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

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