DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

निर्माणाधीन परियोजनाओं पर बिल्डरों को राहत, GST परिषद ने कर दरें चुनने का दिया विकल्प

जीएसटी परिषद ने मंगलवार को निर्माणाधीन आवासीय परियोजनाओं और किफायती आवास पर बिल्डरों को बड़ी राहत दे दी है। 31 मार्च 2019 से पहले परियोजना शुरू करने वाले बिल्डर के पास पुरानी टैक्स स्लैब का भी विकल्प होगा, ऐसा करने पर उन्हें पूरा टैक्स रिफंड मिल जाएगा। या फिर वे बिना रिफंड के नई टैक्स स्लैब को अपना सकते हैं। 

एक अप्रैल 2019 से शुरू होने वाली परियोजनाओं को 24 फरवरी को घोषित हुईं नई दरों का भुगतान करना होगा। मालूम हो, नई दरें पुरानी दरों की तुलना में खासी कम हैं। दरअसल, जीएसटी परिषद ने पिछली बैठक में निर्माणाधीन घरों पर जीएसटी घटाकर 12 से पांच कर दिया था। साथ ही किफायती आवास परियोजनाओं पर जीएसटी आठ से घटाकर एक फीसदी कर दिया था। हालांकि इसके साथ इनपुट टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था भी खत्म कर दी गई। बैठक के बाद राजस्व सचिव एबी पांडेय ने इसकी जानकारी दी। पांडेय ने कहा कि विकल्प चुनने का मौका सिर्फ एक बार राहत के तौर पर दिया जा रहा है। 

एसोचेम की नेशनल काउंसिल ऑफ अफोर्डेबल हाउिसंग कमेटी के चैयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि इस फैसले के बाद बिल्डर निमार्णाधीन आवासों के लिए आठ और 12 फीसदी जीएसटी दरें ही लेंगे। क्योंकि इनपुट क्रेडिट की छूट को फ्लैटों की कीमतों में शामिल करके उसका फायदा ग्राहकों को दिया गया है। एक अप्रैल के बाद शुरू होने वाली पिरजनाओं पर दरें लागू होंगी, लेकिन बिल्डरों को फ्लैटों की कीमतों का नए सिरे से निधार्रण करना होगा, यानी कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्रेडाई के उपाध्यक्ष अमित मोदी ने कहा कि नई परियोजनाओं और अंडर कंस्ट्रक्शन परियोजनाओं को अलग करने का फैसला बेहद जरूरी था। जिन लोगों ने अंडर कंस्ट्रक्शन परियोजनाओं में पैसा दे दिया है, 12 फीसदी की दर से जीएसटी भर दिया है और बिल्डर से इनपुट टैक्स क्रेडिट भी ले लिया है, उनका ऐसे में क्या होता? नई योजना में तो सबको पता होगा कि इतना टैक्स भरना है और कोई इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलना है। क्रेडाई अध्यक्ष जक्षय शाह ने कहा कि इससे भ्रम की स्थिति खत्म हो गई है और होली पर अच्छी बिक्री होगी। नैरेडको अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि नई या पुरानी टैक्स स्लैब को वैकल्पिक बनाने से डेवलपर के पास अच्छा विकल्प होगा।  

नई दरों पर शिफ्ट होने के लिए मिलेगा समय
बिल्डरों को पुरानी टैक्स दर से नई टैक्स दर की ओर शिफ्ट होने के लिए कितना समय दिया जाए, इसका फैसला केंद्रीय वित्त मंत्रालय राज्य सरकारों से विचार करने के बाद करेगी। हालांकि अनुमान जताया जा रहा है कि इसके लिए 15 से 30 दिन का वक्त दिया जा सकता है। 

जेट एयरवेज को बचाने में केंद्र सरकार ले सकती है PSU की मदद

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:gst council approves new tax- rates real estate sector