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टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर कम होगा टैक्स का बोझ, सरकार के इस फैसले का फायदा

एजेंसी,नई दिल्लीPublished By: Deepak Kumar
Sat, 18 Sep 2021 04:30 PM
टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर कम होगा टैक्स का बोझ, सरकार के इस फैसले का फायदा

बीते शुक्रवार को जीएसटी काउंसिल ने टेक्सटाइल इंडस्ट्री के हित में एक अहम फैसला लिया है। दरअसल, जीएसटी काउंसिल की बैठक में एक जनवरी, 2022 से फुटवियर और कपड़े पर उलट शुल्क ढांचे को ठीक करने पर सहमति बनी है। इससे कृत्रिम रेशे के कपड़े और परिधानों पर टैक्स का बोझ कम होने की उम्मीद की जा रही है।

परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने कहा कि ये उद्योग के लिए एक बड़ा मुद्दा था। शक्तिवेल के मुताबिक कृत्रिम रेशे (एमएमएफ) कपड़ा कैटेगरी (फाइबर और यार्न) में उत्पादन के सामान (इनपुट) पर जीएसटी की दर 18 प्रतिशत और 12 प्रतिशत है, जबकि एमएमएफ फैब्रिक पर जीएसटी की दर पांच प्रतिशत है। वहीं तैयार परिधान पर यह पांच प्रतिशत और 12 प्रतिशत है। इससे ऐसी स्थिति पैदा हो रही कि इनपुट पर टैक्स की दर उत्पादन से अधिक थी। अब जीएसटी काउंसिल के नए फैसले से उद्योग को बड़ा फायदा मिलेगा। आपको बता दें कि जीएसटी काउंसिल ने शुक्रवार की बैठक में कई अहम फैसले लिए हैं। इनमें जीवन रक्षक दवाओं पर जीएसटी कम करने से लेकर अन्य प्रोडक्ट में बदलाव का फैसला शामिल है। आइए देखते हैं किस गुड्स और सर्विसेज पर टैक्स में बदलाव किया गया है।

रेलवे के कलपुर्जे, लोकोमोटिव के अलावा सभी तरह के पेन पर भी जीएसटी दरों में बदलाव किया गया है। इसके अलावा भारत-बांग्लादेश बॉर्डर हाटों में आपूर्ति किए जाने वाली वस्‍तुओं पर आईजीएसटी में छूट दी गई है।

जीएसटी काउंसिल ने बताया है कि गैर-पंजीकृत व्यक्ति से मेंथा ऑयल की आपूर्ति को रिवर्स चार्ज के तहत लाया गया है। इसके अलावा, काउंसिल ने यह भी सिफारिश की है कि मेंथा ऑयल के निर्यात की अनुमति केवल एलयूटी और इनपुट टैक्स क्रेडिट की परिणामी रिफंड के लिए दी जानी चाहिए।

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