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सरकार की नई योजना, दालों का आयात घटाकर देश में ही उत्पादन बढ़ाने की तैयारी

Modi Government New Plan: तुअर के लिए बफर आवश्यकता 10 लाख टन और मसूर के लिए पांच लाख टन है, सरकार का लक्ष्य योजना स्थापित होने के बाद आठ लाख टन तुअर और चार लाख टन मसूर का बफर स्टॉक हासिल करना है।

सरकार की नई योजना, दालों का आयात घटाकर देश में ही उत्पादन बढ़ाने की तैयारी
Drigraj Madheshiaपूजा दास,नई दिल्ली।Wed, 22 Nov 2023 06:10 AM
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अनियमित मौसम और अधिक लाभकारी फसलों को उगाने के चक्कर में किसानों के दालों के उत्पादन से दूर होने से चिंतित सरकार चुनिंदा राज्यों पर ध्यान केंद्रित करते हुए दालों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक योजना तैयार कर रही है। वर्तमान में, तुअर के लिए बफर आवश्यकता 10 लाख टन और मसूर के लिए पांच लाख टन है, सरकार का लक्ष्य योजना स्थापित होने के बाद आठ लाख टन तुअर और चार लाख टन मसूर का बफर स्टॉक हासिल करना है।

योजना के बारे में जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा, इस योजना कमिशन का रूप दिया जा रहा है। इसे भारत दाल उत्पादन स्वावलंबन अभियान या दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए भारतीय मिशन कहा जा सकता है।

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इसका लक्ष्य दालों का उत्पादन बढ़ाना, बफर मानदंडों को पूरा करना और आयात निर्भरता को समाप्त करना है। यह योजना मुख्य रूप से गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और कर्नाटक पर ध्यान केंद्रित करेगी।

उगाने से पहले फसल के लिए करार: सूत्र ने बताया कि सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नेफेड) को इस योजना के लिए प्राथमिक कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में नियुक्त करने का निर्णय लिया है। एजेंसी अरहर का उत्पादन 12 लाख टन और मसूर का उत्पादन पांच लाख टन बढ़ाने के प्रयास में किसानों से उनकी पूरी उपज खरीदने के लिए पहले से करार कर सकती है।

वर्तमान में, पीएसएस के तहत, कृषि मंत्रालय कीमतें गिरने पर किसानों का समर्थन करने के लिए एमएसपी पर फसलें खरीदता है, जबकि पीएसएफ के तहत, उपभोक्ता मामलों का विभाग बाद में उपयोग के लिए बफर स्टॉक के लिए एमएसपी या बाजार मूल्य पर दालें और सब्जियां खरीदता है।

पिछला रिकॉर्ड दोहराने की क्षमता

सरकार का मानना ​​​​है कि दालों के उत्पादक 2016-17 में रिपोर्ट किए गए उत्पादन को दोहराने में पूरी तरह से सक्षम हैं। नई योजना में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य या बाजार दर, जो भी अधिक हो, पर फसलों की सुनिश्चित खरीद के साथ पर्याप्त समर्थन दिया जाएगा।

इसके साथ ही फसल के नुकसान के मामले में जोखिम की भरपाई का आश्वासन दिया जाएगा। साथ फसल बीमा योजना के माध्यम से मौसम की स्थिति के कारण होने वाली क्षति, उच्च उपज देने वाले बीज का समर्थन भी उपलब्ध कराया जाएगा।

चुनौतियों के लिए तैयारी करना जरूरी: एग्रीटेक कंपनी फ्यूजलेज इनोवेशन के प्रबंध निदेशक देवन चन्द्रशेखरन ने कहा कि घटते उत्पादन और दालों के बढ़ते आयात ने खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर दिया है और जलवायु परिवर्तन की पृष्ठभूमि में किसानों की आजीविका को खतरा पैदा कर दिया है।

सजलवायु परिवर्तन के असर का पूरी तरह से अनुमान लगाना एक असंभव कार्य हो सकता है। दालों का बफर के लिए तकरीबन 50 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता हो सकती है। अधिकारी ने कहा, हालांकि, खरीद का खर्च इससे भी अधिक हो सकता है।

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