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हिंदी न्यूज़ बिजनेसGoogle Year Search 2021: दुनिया के सबसे बड़े अरबपति एलन मस्क को इस साल भारतीयों ने गूगल पर खूब सर्च किया

Google Year Search 2021: दुनिया के सबसे बड़े अरबपति एलन मस्क को इस साल भारतीयों ने गूगल पर खूब सर्च किया

दृगराज मद्धेशिया,नई दिल्लीDrigraj Madheshia
Thu, 09 Dec 2021 09:39 AM
Google Year Search 2021: दुनिया के सबसे बड़े अरबपति एलन मस्क को इस साल भारतीयों ने गूगल पर खूब सर्च किया

Google Year Search 2021:  साल 2021 में भारत में सबसे ज्यादा गूगल पर सर्च किए जाने वाले शख्सियतों में दुनिया के सबसे बड़े रईस एलन मस्क पांचवें नंबर पर रहे। पहले नंबर पर ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले एथलीट नीरज चोपड़ा हैं। इनके अलावा आयर्यन खान दूसरे, शहनाज गिल तीसर, राज कुंद्रा चौथे स्थान पर थे। 

ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स में टेस्ला कंपनी के सीईओ एलन मस्क ने अमेजन के सीईओ रहे जेफ बेजोस से इस साल दुनिया के सबसे बड़े अरबपति का खिताब छीना था। आज भी मस्क 282 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ टॉप पर हैं। जेफ बेजोस 202 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर हैं।

भारत में असम से गुजरात और कन्याकुमारी से जम्मू-कश्मीर तक के लोगों में एलन मस्क के बारे में जानने की उत्सुकता दिखी। लोगों ने world richest man 2021, elon musk snl, signal, elon musk crypto, elon musk shiba inu जैसे की-वर्ड्स से मस्क को सबसे ज्यादा ढूढ़ा।  हालांकि, मस्क ग्लोबल सर्च कैटेगरी में टॉप-5 में भी नहीं हैं। बता दें ट्वीटर पर मस्क बेहद सक्रिय रहते हैं। उनके एक ट्वीट से क्रिप्टोकरंसी मार्केट में भूचाल आ जाता है। पिछले एलन मस्क ने अपने ट्विटर फॉलोअर्स की बात मानकर 1.1 बिलियन डॉलर (करीब 81.85 अरब रुपये) मूल्य के टेस्ला के शेयर बेच दिए। एलन मस्क ने ट्विटर पर अपने फॉलोअर्स से सवाल किया था कि क्या उन्हें अमेरिकी टैक्स नियमों का सम्मान करते हुए टैक्स देने के लिए अपनी 10 फीसद हिस्सेदारी बेच देनी चाहिए।

कौन हैं एलन मस्क

स्पेस-एक्स के संस्थापक और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क का जन्म दक्षिण अफ्रीका में 28 जून 1971 को हुआ था। वे 17 साल की उम्र में कनाडा आ गए थे। उन्हें बचपन से ही किताबें पढ़ने का बहुत शौक था। एलन मस्‍क की कमाई के बारे में कहा जाता है क‍ि वो हर सेकेंड 67 लाख रुपये कमाते हैं। इसके बावजूद उनके मन में नए आइड‍ियाज को लेकर गुंजाइश बनी रहती है।

मस्क की कहानी उन करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है, जो अपने दम पर कुछ अलक करने की सोचते हैं। मस्क महज 30 की उम्र में रॉकेट खरीदने पहुंच गए रूस । रूसियों ने उनके इरादों को महत्व नहीं दिया। मस्क का ख्वाब था कि रॉकेट के जरिए पहले चूहों को मंगल पर बस्ती बसाने भेजना है या कुछ पौधों को। जब दूसरी बार भी रूसियों ने खाली हाथ लौटा दिया, तब लौटते वक्त हवाई जहाज में ही मस्क के मन में आया कि क्यों न खुद ही रॉकेट तैयार कर लिया जाए। और यहां से हुई स्पेसएक्स कंपनी की शुरुआत। कदम-कदम पर अड़चनें आती रहीं, लगे हाथ कार निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी, प्रौद्योगिकी विकास जैसे अनेक उद्यम भी चलते रहे। 


बड़े सपनों और फौलादी इरादों से दौलत कदम चूमती रही

सपना इतना बड़ा था और इरादे इतने फौलादी कि दौलत कदम चूमती चली। एक दिन वह भी आया, जब मस्क 49 की उम्र में ही पूरी दुनिया के सबसे अमीर इंसान बन गए। एक वह भी दिन था, जब उन्हें ब्वॉयलर की सफाई का काम मिला था, जिसके लिए प्रति घंटा 18 डॉलर मिलते थे और आज वह प्रति घंटा करीब 140 करोड़ रुपये कमा रहे हैं। बेशक, कल्पनाएं ही होती हैं, जो जिंदगी को उड़ान देती हैं।  

ऐसा था उनका बचपन

कल्पना की उड़ान सबसे तेज होती है। वह तब और तेज हो जाती है, जब कोई कथा उसे हवा देती है। आखिर हमारी दुनिया क्या है? दुनिया को कौन चला रहा है? इस दुनिया में हमें करना क्या है? और कमाल है, यह किताब द हिचहाइकर्स गाइड टु द गैलेक्सी  ऐसे ही रहस्य भरे सवालों के पीछे लिए जा रही है। जवाबों तक पहुंचने की तमन्ना लिए वह 14 वर्षीय दक्षिण अफ्रीकी किशोर पृष्ठ-दर-पृष्ठ पढ़ता-बढ़ता जा रहा है। वह किताब बता रही है, यह दुनिया वास्तव में एक सुपर-कंप्यूटर है। ऐसा सुपर-कंप्यूटर, जिसे किसी दूसरे ग्रह पर बैठे लोग अपने सुपर-कंप्यूटर से संचालित कर रहे हैं।

हमारी दुनिया अकेली नहीं है। ब्रह्मांड में बहुत सारे ग्रह ऐसे हैं, जहां तरह-तरह के लोग रहते हैं। ऐसे ग्रह भी हैं, जहां के लोग धरती का मोल नहीं समझते। धरती चूंकि उनके अंतरिक्ष मार्ग में बाधा बन रही है, इसलिए वे धरती को नष्ट कर देना चाहते हैं। और एक ग्रह ऐसा भी है, जहां के लोग बार-बार धरती बनाते हैं, ताकि वहां जीवन की असली खोज कर सकें, ब्रह्मांड को ठीक से पहचान सकें। ब्रह्मांड में इंसान भी हैं, एलियन भी और रोबोट भी। जिस ग्रह के लोग बार-बार दुनिया या पृथ्वी गढ़ते हैं, उस ग्रह पर भी आर्थिक मंदी आती है और शोध-विज्ञान का काम प्रभावित होता है, लेकिन उस ग्रह के वासी यह ख्वाब संजोए जीते हैं कि फिर एक पृथ्वी गढ़नी है। 


एक किताब ने बदल दिया सोचने का नजरिया

वह 14 वर्षीय किशोर यह सब पढ़कर अचंभित था कि ऐसी भी होता है या हो सकता है। पहले के साहित्य में लोग गुब्बारे के सहारे या किसी पक्षी पर बैठकर चांद पर पहुंच जाते थे, तब यान का आविष्कार भी नहीं हुआ था। एक दिन वह भी आया, जब इंसान चांद पर जा पहुंचा। मतलब, कुछ भी असंभव नहीं। हम एलियन को और एलियन हमें खोज रहे होंगे, जो ज्यादा कुशल होगा, वह खोज में कामयाब होगा। क्या इस खोज में मैं भी शामिल हो सकता हूं? कुल मिलाकर, डगलस एडम्स की उस किताब ने सोचने का पूरा खाका ही बदल दिया। उस किशोर के हमउम्र लड़के खेलने में समय लगाते थे, लेकिन उस किशोर का जीवन मानो अनुसंधान के लिए बना था। वह किशोर समझ गया था कि जीवन वही नहीं है, जो हम अपने आसपास देखते हैं, पूरा ब्रह्मांड जीवन से भरा है। जीवन के तमाम स्वरूपों की खोज में सक्षम होना पड़ेगा और इसके लिए सबसे जरूरी है तकनीकी विकास और इंजीनिर्यंरग में महारत हासिल करना। 

सितारों तक पहुंचने की थी जल्दी 

एक उम्र होती है, जब पूरी मानवता को बचाने का ख्याल आता है, जब लगता है कि खुद ही आगे बढ़कर सब कुछ नष्ट होने से बचाना होगा। कहीं एलियन की कोई दुनिया वास्तव में हमारी दुनिया को खत्म करने की योजना न बना रही हो। तो उसके पहले ही दुनिया के दूसरे ग्रहों पर बस्तियां बसानी पड़ेंगी। उस किताब ने किशोर एलन मस्क (जन्म 1971) को जो मकसद दिया, उससे बेचैनी बढ़ गई। दक्षिण अफ्रीका में रहते अंतरिक्ष खंगालने का अभियान मुमकिन न था, तो मस्क ने संभावनाओं की तलाश शुरू की। मां की मदद से कनाडा की नागरिकता हासिल करते हुए वह प्रौद्योगिकी के गढ़ अमेरिका जा पहुंचे। सितारों तक पहुंचने की जल्दी थी। पीएचडी करने के लिए दाखिला लिया, लेकिन दो दिन में ही लग गया कि तय मकसद में पढ़ाई बहुत कारगर नहीं होगी। सीधे हकीकत में उतरकर खोज में लगना होगा और शायद उससे पहले खोज की दिशा में बढ़ने के लिए संसाधन जुटाने पड़ेंगे।

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