Gold Price: सोना नौ साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा, दिवाली तक तोड़ सकता है 53000 का स्तर
मुख्य बातें
- कोरोना संकट से बने अनिश्चितता के माहौल में सुरक्षित निवेश का साधन सोना में लगातार तेजी का रुख बना हुआ है
- बुधवार को वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क में सोना भाव 0.05 प्रतिशत की तेजी के साथ 2011 के बाद पहली..
कोरोना संकट से बने अनिश्चितता के माहौल में सुरक्षित निवेश का साधन सोना में लगातार तेजी का रुख बना हुआ है। बुधवार को वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क में सोना भाव 0.05 प्रतिशत की तेजी के साथ 2011 के बाद पहली बार 1810.80 डॉलर प्रति औंस तक उछला। बीते नौ साल में पहली बार सोना ने 1800 डॉलर पति औंस के स्तर को तोड़ा है।
केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया ने हिन्दुस्तान को बताया कि सोने में इस समय सारे फंडामेंटल्स मजबूत हैं। इक्विटी बाजार में उतार-चढ़ाव से हाजिर मांग भी जबरदस्त बनी हुई है, जिससे दिवाली तक सोने का भाव एमसीएक्स पर 53,000 रुपये के स्तर को तोड़ सकता है, जबकि कॉमेक्स पर 2000 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छू सकता है।
हालांकि, निवेशकों को सोने के मौजूदा स्तर पर सावधानी से निवेश करनी चाहिए क्योंकि बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव की आशंका बनी हुई है। अगर कोरोना का वैक्सीन आ जाता है तो बड़ी गिरावट आ सकती है। मार्च के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स पर सोने में 24% से ज्यादा की तेजी आई है। वहीं, कॉमेक्स पर सोने का भाव 16 मार्च,2020 को 1453 डॉलर प्रति औंस तक टूटा था।
घरेलू वायदा बाजार में भी जोरदार तेजी
मजबूत हाजिर मांग के कारण वायदा कारोबार में बुधवार को सोना की कीमत उछलकर 49,000 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। एमसीएक्स में सोने के अगस्त माह में डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत तेजी के साथ 49,000 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई जिसमें 11,200 लॉट के ₨लिए कारोबार हुआ। बाजार विश्लेषकों ने कहा कि कारोबारियों की ताजा लिवाली से मुख्यत: सोने की कीमतों में तेजी आई। इस साल की बात करें तो सोने ने करीब 26 फीसदी रिटर्न दिया है। वहीं, वैश्विक संकेतों के कारण कारोबारियों ने अपने सौदों के आकार को बढ़ाया जिससे वायदा कारोबार में बुधवार को चांदी की कीमत 129 रुपये की तेजी के साथ 50,331 रुपये प्रति किग्रा हो गई।
पिछले 10 साल में 142% रिटर्न
बीते 10 साल में सोने ने निवेशकों को 142% का रिटर्न दिया है। 2010 में सोने का भाव 18000 रुपये प्रति दस ग्राम था जो अब बढ़कर करीब 50,000 रुपये प्रति दस ग्राम के आसपास आ गया है। वहीं, इस दौरान निफ्टी ने करीब 135% का रिटर्न दिया है। बीते 11 साल की तुलना करें तो सोने ने निफ्टी और चांदी से बेहतर रिटर्न दिया है।
गोल्ड ईटीएफ में छह माह में दोगुना निवेश
विश्व स्वर्ण परिषद की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक बाजार में अनिश्चता से सोने के प्रति निवेशकों का रुझान बना हुआ है। इसके चलते 2020 के पहले छह महीने में गोल्ड ईटीएफ में निवेश 40 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंचा गया है। वहीं, 2016 से 2019 तक औसत गोल्ड ईटीएफ में सालाना 23 अरब डॉलर का निवेश रहा था। डब्ल्यूजीसी की रिपोर्ट के अनुसार, गोल्ड ईटीएफ ने लगातार सातवें महीने निवेश बढ़ा है। जून में 104 टन सोने का निवेश हुआ।
क्या है गोल्ड ईटीएफ?
गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) सोने में निवेश करने का एक सरल तरीका है। इसे पेपर गोल्ड भी कहते हैं। इन्हें शेयरों की तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के कैश मार्केट में खरीदा-बेचा जा सकता है। इसमें कोई न्यूनतम लॉट साइज नहीं होता है। गोल्ड ईटीएफ की एक यूनिट एक ग्राम सोने के बराबर होती है। निवेशक इसकी यूनिट्स को एकमुश्त या फिर सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये थोड़ा-थोड़ा भुगतान कर खरीद सकते हैं।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


