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1 जुलाई से उत्तर प्रदेश के 6740 गांवों में पैक्सों से शुरू होगी बैंकिंग, डेबिट कार्ड, आधार और बायोमेट्रिक तीनों से हो सकेगी निकासी

लखनऊ। हेमंत श्रीवास्तवPublished By: Drigraj Madheshia
Tue, 08 Jun 2021 10:21 AM
1 जुलाई से उत्तर प्रदेश के 6740 गांवों में पैक्सों से शुरू होगी बैंकिंग, डेबिट कार्ड, आधार और बायोमेट्रिक तीनों से हो सकेगी निकासी

गांवों में स्थित सहकारिता विभाग की प्रारंभिक समितियां (पैक्स) एक जुलाई से बैंकिंग सेवा भी देने लगेंगे। राज्य सरकार ने पैक्सों के लिए 7414 माइक्रो एटीएम पैक्सों को मुहैया कराने के लिए सहकारिता विभाग को दे दिए है, जिनका वितरण चल रहा है। पैक्स पर माइक्रो एटीएम को संचालित करने की जिम्मेदारी निभाने वाले बिजनेस प्रतनिधियों को इसी महीने प्रशिक्षित कर दिया जाएगा।

डेबिट कार्ड, आधार और बायोमेट्रिक तीनों से हो सकेगी निकासी

माइक्रो एटीएम पूरी तरह नेटबैकिंग से जुड़े रहेंगे। डेबिट कार्ड स्वैपिंग, आधार आधारित और बायोमैट्रिक प्रणाली से इस एटीएम से ग्रामीण अपने खाते से धनराशि निकाल सकेंगे। इस एटीएम से ग्रामीण सहकारी बैंकों के साथ ही अन्य राष्ट्रीय और निजी क्षेत्र के डेबिड कार्ड से धनराशि निकाली जा सकेंगी। जिला सहकारी बैंक और उ.प्र. सहकारी बैंक लि. के खाताधारक माइक्रो एटीएम का संचालन करने वाले बिजनेस प्रतिनिधि के माध्यम से धनराशि अपने खाते में जमा भी करा सकेंगे। ग्रामीण बैकिंग के क्षेत्र में इसे क्रांतिकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है।

21 करोड़ रुपये की लागत से खरीदे गए हैं माइक्रो एटीएम

उ.प्र. सहकारी बैंक लि. के प्रबंध निदेशक भूपेंद्र कुमार विश्नोई ने बताया है कि राज्य में स्थिति 6740 पैक्स के लिए 7414 माइक्रो एटीएम मंगाए गए हैं। इन एटीएम की खरीद पर करीब 21 करोड़ रुपये व्यय हुए हैं। उन्होंने बताया है कि पैक्सों के माध्यम से फिलहाल सालाना 10 लाख रुपये माइक्रो एटीएम के माध्यम से निकासी होने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण जैसे-जैसे इस सुविधा से जुड़ते जाएंगे यह लक्ष्य बढ़ा दिया जाएगा।

1391 पैक्स इस साल कंप्यूटरीकृत भी कर दिए जाएंगे

पैक्सों पर माइक्रो एटीएम मुहैया कराने के साथ ही पैक्स के कंप्यूटरीकरण का काम भी शुरू किया गया है। 294 पैक्स का कंप्यूटरीकरण नाबार्ड के सहयोग से किया जा रहा है। इस वित्तीय वर्ष में 1391 पैक्स पर कंप्यूटर लगा दिए जाएंगे। केंद्र सरकार के सहयोग से पैक्सों के कंप्यूटरीकरण का काम शुरू किया गया है। 60 फीसदी धनराशि केंद्र सरकार और 40 फीसदी धनराशि राज्य सरकार अथवा यूपीसीबी व डीसीबी का लगेगा। तीन साल में सभी पैक्स कंप्यूटरीकृत कर दिए जाएंगे। इस योजना पर करीब 58.81 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कंप्यूटरीकरण के साथ ही पैक्स सहकारी बैंकों के एक्सटेंशन के रूप में काम करने लगेंगे।

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