राहत पैकेज के बाद विदेशी निवेशकों का बढ़ा विश्वास, मई में 11,718 करोड़ रुपये का किया निवेश
मुख्य बातें
- विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) का रुझान एक बार फिर से भारतीय शेयर बाजार में लौट आया है
- कोरोना संकट में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 88,000 करोड़ रुपये की निकासी की थी
- एक बार फिर से वह अपना..
विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) का रुझान एक बार फिर से भारतीय शेयर बाजार में लौट आया है। कोरोना संकट में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 88,000 करोड़ रुपये की निकासी की थी। एक बार फिर से वह अपना निवेश बढ़ा रहे हैं। इस साल पहली बार 28, मई तक निवेशकों ने 11,718 करोड़ रुपये का निवेश किया है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, प्रधानमंत्री की ओर से 20 लाख करोड़ का राहत पैकेज की घोषणा के बाद विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ा है। बाजार में तेजी का माहौल है और सेंसेक्स 32 हजार के स्तर के पार पहुंच गया है।
एफपीआई द्वारा बाजार में निकासी और निवेश
| महीना | निवेश/निकासी |
| जनवरी | -5,412 करोड़ रुपये |
| फरवरी | -11,485 करोड़ रुपये |
| मार्च | -65,817 करोड़ रुपये |
| अप्रैल | -5,209 करोड़ रुपये |
| मई | + 11,718 करोड़ रुपये |
सेबी ने टीसीएस से कहा, निवेशकों के सामने महत्वपूर्ण जानकारियां रखते समय सावधान रहें
बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को चेतावनी दी है कि वह निवेशकों के समक्ष महत्वपूर्ण जानकारियां रखने के प्रति सावधान रहे। सेबी ने पाया है कि टीसीएस ने अमेरिका में एक मामले में हुए नुकसान को लेकर जानकारियों को प्रमुखता से प्रदर्शित नहीं किया है। यह चेतावनी इसी संदर्भ में है। टीसीएस ने 16 अप्रैल 2016 को शेयर बाजारों को एपिक सिस्टम्स के साथ बौद्धिक संपदा अधिकार के एक मामले से संबंधित अमेरिकी अदालत के फैसले के बारे में बताया था।
सेबी के अनुसार, टीसीएस के द्वारा दी गयी जानकारी से संकेत मिलता है कि उसे इस मामले में विस्कॉन्सिन की एक अदालत में दायर मुकदमे में निर्णायक मंडल का फैसला मिला है। हालांकि इस सार्वजनिक में टीसीएस के खिलाफ लगाये गये 94 करोड़ डॉलर के जुर्माने का उल्लेख नहीं किया गया। कंपनी ने 18 अप्रैल 2016 को अपने वित्तीय परिणामों की घोषणा करते समय इसे आकस्मिक देनदारियों के हिस्से के रूप में दिखाया था। सेबी ने कहा कि कंपनी को शेयर बाजारों को जानकारी देते समय जुर्माने का प्रमुखता से उल्लेख करना चाहिए था।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


