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11 जुलाई, 2020|7:00|IST

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कर्ज देने को लेकर बैंकों को फिच की चेतावनी, दो साल में 6% तक बढ़ जाएगा एनपीए

indian rupees   pti file photo

फिच रेटिंग्स ने गुरुवार (28 मई) को एक रिपोर्ट में यह चेतावनी दी कि सरकार के करीब 20 लाख करोड़ रुपए के प्रोत्साहन पैकेज के तहत पहले से स्वीकृत उधार देने से उन्हें कर्ज की किस्ते वसूल करने में उल्लेखनीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। रपट में कहा गया है कि इससे अगले दो वर्षों के दौरान उनके बकाया ऋण अनुपात में छह प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।

फिच रेटिंग्स ने कहा कि जबरन कर्ज देने के दबाव के चलते बैंकों का बकाया ऋण अनुपात दो प्रतिशत से छह प्रतिशत के बीच हो सकता है। यह बैंकों के हालात की गंभीरता और बैंकों के जोखिम लेने की क्षमता और उच्च नियामक प्रावधानों पर निर्भर करेगा। एजेंसी ने हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और निजी क्षेत्र के बैंकों के एनपीए के बारे में अलग-अलग जानकारी नहीं दी।

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सरकार द्वारा घोषित प्रोत्साहन पैकेज में बैंक ऋण में कई तरह की राहत और कर्ज अदायगी में दी गई मोहलत में 90 दिनों की वृद्धि शामिल है। फिच की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये उपाय विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर भारी बोझ डालेंगे, जिनकी बैलेंस शीट पहले ही बहुत कमजोर है। रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के काबू में आने तक उपभोक्ता मांग और विनिर्माण, दोनों ही खराब स्थिति में रहने वाले हैं। फिच ने कहा कि सभी क्षेत्रों में तनाव बढ़ रहा है, लेकिन एमएसएमई और खुदरा क्षेत्र में सबसे अधिक जोखिम होगा।

वहीं, फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष (2020-21) में भारतीय अर्थव्यवस्था में पांच प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया है। फिच ने कहा कि कोरोना वायरस की वजह से देश में सख्त लॉकडाउन नीति लागू की गई है। इससे आर्थिक गतिविधियों में जबर्दस्त गिरावट आई, जिसका सीधा असर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर पर पड़ेगा। इससे पहले फिच ने अप्रैल में अनुमान लगाया था कि चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी की वृद्धि दर 0.8 प्रतिशत रहेगी। अब फिच ने अपने इस अनुमान को काफी अधिक घटा दिया है।

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  • Web Title:Fitch Ratings Warn Bank on Forced lending