फिच रेटिंग्स ने कहा-भारत-चीन तनाव का वित्तीय साख पर असर नहीं
मुख्य बातें
- रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स का कहना है कि भारत का चीन के साथ जारी तनाव देश की वित्तीय साख पर तत्काल कोई प्रभाव नहीं डालेगा
- हालांकि इससे सुधारों की प्रक्रिया लटकने की संभावना है
- फिच रेटिंग्स के..

रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स का कहना है कि भारत का चीन के साथ जारी तनाव देश की वित्तीय साख पर तत्काल कोई प्रभाव नहीं डालेगा। हालांकि इससे सुधारों की प्रक्रिया लटकने की संभावना है। फिच रेटिंग्स के निदेशक (सॉवरेन रेटिंग) थॉमस रूकमेकर ने कहा कि सरकार ने आर्थिक वृद्धि को बेहतर करने के लिए सुधारों की घोषणा की है। एक मजबूत आर्थिक वृद्धि दर के लिए सरकारी कर्ज के बोझ को कम करना अहम है। बता दें पिछले हफ्ते लद्दाख के गलवान घाटी में चीन के साथ हिंसक संघर्ष में भारतीय सेना के एक कर्नल समेत कुल 20 जवान शहीद हो गए। इससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है।
एक वेबिनार में उन्होंने कहा कि सुधारों की घोषणा मध्यम अवधि में वृद्धि को तेज कर सकती है और यहीं पर भू-राजनैतिक व्यवस्था सामने आती है। चीन के साथ सीमा तनाव से भारत की ऋण संबधी साख पर तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा। लेकिन सवाल यह है कि सुधारों को लागू करने में इस तरह के मुद्दे कब तक सरकार का ध्यान भटकाते रहेंगे। गौरतलब है कि फिच ने पिछले सप्ताह भारत के आर्थिक परिदृश्य को स्थिर से घटाकर नकारात्मक कर दिया था।
रूकमेकर ने कहा कि कृषि आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में सुधार से खाद्यान्न कीमतों को नीचे लाने और महंगाई को घटाने में मदद मिल सकती है। जबकि लोक उपक्रमों का निजीकरण करने की मंशा एक बड़ा बदलाव ला सकती है। इसके साथ ही उन्होंने सरकारी कर्ज के बढ़कर जीडीपी के 84.5 प्रतिशत पर पहुंच जाने का अनुमान भी जताया जो वित्त वर्ष 2019-20 में 71 प्रतिशत था। वहीं सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़कर 11.5 प्रतिशत होने की उम्मीद है।
भारत का आर्थिक परिदृश्य नकारात्मक
फिच ने पिछले सप्ताह भारत के आर्थिक परिदृश्य को 'स्थिर से घटाकर 'नकारात्मक कर दिया था। ऐसा कोविड-19 संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ने के चलते देश का आर्थिक वृद्धि परिदृश्य कमजोर पड़ने के चलते किया गया। हालांकि फिच ने भारत की निवेश रेटिंग को 'बीबीबी माइनस पर बरकरार रखा, यह सबसे निचली निवेश श्रेणी है।रूकमेकर ने कहा कि मध्यम अवधि में आर्थिक वृद्धि दर को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की नकदी हालत और बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता से झटका लग सकता है।
सवाल ये है कि कोविड-19 महामारी वित्तीय क्षेत्र को कितना प्रभावित करेगी। क्या यह मध्यम अवधि में ऋण वृद्धि को आगे बढ़ाने और जीडीपी की वृद्धि दर को संबल देने के काबिल रहे्गी। फिच का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में देश की अर्थव्यवस्था में पांच प्रतिशत का संकुचन आएगा। जबकि 2021-22 में यह फिर से 9.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि करेगी।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


