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हमने अपने आप को ऐसे टारगेट दिए हैं, जिन्हें पाया जा सकता है- निर्मला सीतारमण 

nirmala sitharaman  nityanandraibjp twitter 31 may  2019

नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट तकरीबन एक सप्ताह पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किया। निर्मला सीतारमण ने बजट को लेकर हिन्दुस्तान टाइम्स से बातचीत की है। उन्होंने बजट के ग्रोथ को लेकर विजन, निवेश और उपभोग बढ़ाने के लिए उठाए गए कदम और टैक्स को लेकर चर्चा की। पेश है बातचीत के संपादित अंश:

सवाल: बजट से पहले ऐसा माना जा रहा था कि राजकोषीय घाटे के आंकड़ों को लेकर सरकार थोड़ा इधर-उधर मैनेज कर सकती है क्योंकि  सरकार की पहली चिंता ग्रोथ है। आप बजट तैयार करने से पहले क्या सोच रही थीं? आप राजकोषीय घाटे के आंकड़ों को लेकर अटकीं.. क्या टारगेट को न पाना भी विकल्प था?
जवाब:  सरकार का पूरा फोकस ग्रोथ पर था और ऐसे कदम उठाए जाएं जिससे अर्थव्यवस्था में ग्रोथ आए। फरवरी में अंतरिम बजट पास किया गया था। ये 14वें वित्त आयोग का आखिरी साल है। हमारा कुछ विजन अंतरिम बजट में पहले ही बताया गया था। मैंने इस बात का पूरा ध्यान रखा है कि सरकार के फ्लैगशिप वेलफेयर प्रोग्राम न रुके, ताकि, उपभोग बढ़े। ऐसा करने का यही एक तरीका था क्योंकि इससे पैसा सही हाथों में जाता है। 

मेरा उद्देश्य उपभोग बढ़ाना था क्योंकि इससे अर्थव्यवस्था की साइकिल में तेजी आती है। इसमें पहले से चल रहे वेलफेयर प्रोग्राम के जरिए मदद मिलती क्योंकि इससे लोगों के पास पैसा जाता। यहा डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के जरिए सीधे उनके पास जाता इसलिए इन्हें टॉप प्रॉयोरिटी में रखा गया। इसके अलावा मेरे पास राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (एफआरबीएम) था। एक मंत्री होने के नाते ये मेरा काम था कि इसके नियमों का पालन करूं। राजकोषीय घाटे को लेकर एक रास्ता पहले से ही बताया गया है, तो मैं उसका उल्लंघन कैसे कर सकती हूं?

इसलिए मैंने इस बात की पूरी कोशिश की है कि उपभोग का लॉजिक काम करे। ये फ्लैगशिप वेलफेयर प्रोग्राम के जरिए हो सकता था क्योंकि इससे पैसा लोगों के पास जाता। साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर पर पब्लिक इन्वेस्टमेंट से ग्रोथ फिर से शुरू होती। ये पूरे तरीके से साफ था कि मुझे क्या करना है। मुझे एक बड़ी पिक्चर पेश करनी थी और साफ मैसेज देना था कि उपभोग को बढ़ाना है। इसके साथ ही रिफॉर्म भी जुड़ा हुआ था। 
 

सवाल: जैसा आपने कहा रिफॉर्म पर फोकस था, बिजनेस को आसान बनाने के लिए कदम उठाए ताकि प्राइवेट इन्वेस्टमेंट गैप को भर सके..

जवाब: हमने अभी इस बारे में बात नहीं की है और इसे छोड़ दिया है लेकिन एक रास्ता जरूर दिखाया है। रेलवे एक ऐसा एरिया है जहां हम चाहते हैं कि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप आए। डिसइनवेस्टमेंट एक और जरिया है.. 

सवाल: लोगों का ऐसा मानना है कि सरकार राजकोषीय घाटे को लेकर चिंतित नहीं है क्योंकि प्राइवेट सेक्टर निवेश के मोड में नहीं है। ज्यादातर सभी भारतीय कंपनियों की बैलेंस शीट पर कर्ज है। जो कि बहुत अच्छी कंपनियों की गिनती में आती हैं, वह भी बहुत अच्छे हाल में नहीं है। कई इन्वेस्टमेंट कर चुकी हैं और वह कुछ सालों तक नए इन्वेस्टमेंट करने की हालत में नहीं है। ऐसे में प्राइवेट इन्वेस्टेमेंट आएगा कैसे?

जवाब: यही कारण है कि हम भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट के लिए बाहर देख रहे हैं। राज्यों को भी बाहर से उधार लेने का विकल्प दिया है। इस बात ध्यान रखा जा रहा है कि एनबीएफसी के संकट को देखा जाए, ताकि छोटे निवेश हो सकें। 
 

सवाल: और विदेशी निवेश? आपने एफडीआई नॉर्म्स में ढील दी है..
जवाब: हां ये सही है। हमने और करने का स्कोप दिया है। 

सवाल: बाहर से उधार लेने पर चल रही बहस नई नहीं हैं, लेकिन हम हमेशा से ही बाहर से फंड लेने को लेकर काफी रूढ़िवादी रहे हैं क्योंकि इससे जोखिमों की तरफ ज्यादा उजागर होते हैं..

जवाब: हां इस पर काफी बहस होती रहती है। विदेशों में कई ऐसी मार्केट है सैचुरेटेड है। उनके पास फंड्स बहुत हैं लेकिन नया इन्वेस्टमेंट नहीं है जिस पर सही रिटर्न मिल सके। ये कई द्विपक्षीय में सामने आया है। हां ये सही है हमारे कई फैसलों में काफी सोचा जाता है। 

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  • Web Title:Finance Ministry said nirmala sitharaman we have given ourselves achievable targets