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15 जनवरी, 2021|10:05|IST

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अर्थव्यवस्था को मोदी सरकार ने दिवाली से पहले दिया एक और बूस्टर

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मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था को दिवाली से पहले एक और बूस्टर दिया है। आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना को लॉन्च किया। सरकार पलायन करने वाले मजदूरों के लिए खास तरह का पोर्टल लेकर आएगी। निर्मला सीतारमणउन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में रिकवरी दिख रही है। ने प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करने के दौरान कहा अर्थव्यवस्था में मजबूत सुधार है, कोविड-19 के सक्रिय मामलों में गिरावट आई है। अक्टूबर में जीएसटी संग्रह वर्ष दर वर्ष आधार पर 10 प्रतिशत बढ़ा,  बैंक ऋण में 5.1 प्रतिशत का सुधार हुआ और  ऊर्जा खपत में वृद्धि के रुझान मिले हैं। महामारी के समय में भी जीएसटी कलेक्शन और विदेशी निवेश बढ़ा है। 

 

आत्मनिर्भर भारत 2.0 - अब तक की प्रगति

- किसानों को नाबार्ड के जरिये इमरजेंसी कैपिटल फंड के  दिया जाएगा। डिस्कॉम और उद्योगों को कर्ज देने के लिए करीब 1,182,73 रुपये करोड़ 22 राज्यों को कर्ज बांटने के लिए वितरित किये गये हैं।

- एनबीएफसी / एचएफसी के लिए विशेष तरलता योजना के तहत 7,227 करोड़ रुपये दिए गए।

- एक देश-एक राशन कार्ड अब 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो चुका है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की ये अहम घोषणाएं

- आपातकालीन ऋण गारंटी योजना को 31 मार्च 2021 तक बढ़ाया गया।

- केंद्र सरकार नया रोगजार देने वाले प्रतिष्ठानों को सब्सिडी देगी, इसके तहत नई भर्ती के लिए दो साल तक सरकार की ओर से भविषय निधि कोष में योगदान दिया जाएगा। सीतारमण।

- वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए 18,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि आवंटित करने की घोषणा की। 

- सीतारमण ने किसानों के लिए 65,000 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी की घोषणा की। 

- वित्त मंत्री ने दो करोड़ रुपये तक की आवासीय इकाइयों की पहली बार की बिक्री के लिए सर्कल रेट और समझौता मूल्य के बीच के अंतर को दोगुना तक रखे जाने की घोषणा की

- वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए 18,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि आवंटित करने की घोषणा की।  

 

मई में आया था पिछला प्रोत्साहन पैकेज

मई में आया भारत सरकार का पिछला प्रोत्साहन पैकेज कोरोना वायरस लॉकडाउन की वजह से अर्थव्यवस्था को लगे झटके को मोटे तौर पर कम करने में पूरी तरह सफल नहीं हुआ था। इस पैकेज का फोकस तरलता बढ़ाने और छोटो कारोबारों को आसान ऋण उपलब्ध कराना था। लेकिन खर्च को बढ़ावा देने के लिए अधिक नहीं किया गया था। इस पैकेज में कोरोना से बुरी तरह प्रभावित सेक्टर जैसे टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी और एविएशन छूट गए थे। 

लॉकडाउन के दौरान 23.9 फीसदी संकुचन

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कुछ साल पहले ही इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (आईएमएफ) ने इशारा किया था कि यह दुनिया की सबसे तेज बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में होगी। लेकिन कोरोना महामारी की वजह से मार्च में लॉकडाउन की वजह से इसमें 23.9 फीसदी संकुचन हुआ।  देश के बड़े शहरों में कोरोना वायरस केस अभी भी तेजी से बढ़ रहे हैं और प्रतिदिन 40 हजार से अधिक केस आ रहे हैं।  हालांकि, पिछले तीन महीनों में पहली बार एक्टिव केस 5 लाख से कम हो गए हैं। सरकार ने अधिकतर प्रतिबंधों को हटा लिया है। 

दिवाली पर एक और बड़े आर्थिक पैकेज का ऐलान करने जा रही है मोदी सरकार, रोजगार बढ़ाने पर होगा फोकस

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