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28 जनवरी, 2021|5:01|IST

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लोन मोरेटोरियम मामला 5 अक्टूबर तक के लिए टला, सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार ने मांगा समय

supreme court

लोन मोरेटोरियम पर आज सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई हो रही थी पर अब यह 5 अक्टूबर तक के लिए टाल दी गई है। केंद्र सरकार ने सुनवाई के दौरान कोर्ट से समय मांगा है। केंद्र ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर ऋण की किस्त टालने की अवधि के दौरान बैंकों द्वारा ब्याज वसूलने पर 2-3 दिन में फैसला होने की संभावना है। शीर्ष अदालत ने टाली गई किस्तों पर ब्याज लेने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र से निर्णय को रिकॉर्ड में लाने और संबंधित पक्षकारों को हलफनामा देने को कहा। पीठ ने कहा, ''हम सोमवार (पांच अक्टूबर) को मामले की सुनवाई करेंगे। आपकी जो भी नीति है, जो भी आप चाहते हैं, उसे बताइए। हम इस मामले को सोमवार को सुनेंगे। हम आगे कोई स्थगन नहीं चाहते हैं। इस पीठ में न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायामूर्ति एम आर शाह भी शामिल हैं।     

केंद्र सरकार ने कहा-इस मुद्दे पर सरकार सक्रियता के साथ कर रही विचार

पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के बयान को दर्ज किया। मेहता ने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार सक्रियता के साथ विचार कर रही है और इस पर दो-तीन दिनों के भीतर फैसला होने की संभावना है। पीठ ने कहा कि मेहता गुरुवार तक संबंधित पक्षों को हलफनामा देने का प्रयास करें, ताकि इस मामले की सुनवाई पांच अक्टूबर को हो।   पीठ ने कहा, ''सरकार द्वारा लिए गए फैसले को हलफनामे के साथ रिकॉर्ड में लाया जाना चाहिए। मेहता ने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है और निर्णय लेने के बाद हलफनामा दाखिल किया जा सकता है।

इसके बाद पीठ ने कहा, ''उन्होंने (मेहता) ने कहा है कि वह मामले में उपस्थित वकीलों को एक अक्टूबर तक ईमेल के जरिए हलफनामा भेज देंगे। मामले की सुनवाई पांच अक्टूबर 2020 को होगी।   मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार कई आर्थिक पहलुओं पर विचार कर रही है। पीठ ने कहा, ''हम सोमवार (पांच अक्टूबर) को मामले की सुनवाई करेंगे। आपकी जो भी नीति है, जो भी आप चाहते हैं, उसे बताइए। हम इस मामले को सोमवार को सुनेंगे। हम आगे कोई स्थगन नहीं चाहते हैं।  मुख्य याचिकाकर्ता गजेंद्र शर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव दत्ता ने कहा कि यह एक बेहद महत्वपूर्ण मामला है और बैंक ऐसे काम कर रहे हैं, मानो यह एक बहुत ही सामान्य मुद्दा है।  मेहता ने उनसे 2-3 दिन इंतजार करने का अनुरोध किया, ताकि सरकार अंतिम फैसला ले सके।  मेहता ने कहा, ''मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि यह विचाराधीन है और यह बहुत ही उन्नत चरण में है। 

31 अगस्त तक EMI चुकाने से राहत दी गई थी

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने लोन मोरेटोरियम (किस्त भुगतान में मोहलत) को 28 सितंबर तक के लिए बढ़ा दिया था। इस अवधि तक बैंक किसी भी खाते को गैर निष्पादित संपदा (एनपीए) घोषित नहीं करेंगे।  बता दें कोरोना वायरस संकट के दौरान आरबीआई ने लोगों को फौरी राहत के तौर पर लोन मोरेटोरियम की सुविधा शुरू की थी। लोन मोरेटोरियम के तहत, कर्जधारकों को 31 अगस्त तक EMI चुकाने से राहत दी गई थी। एक सितंबर से यह सुविधा खत्म हो गई थी। 

इससे पहले, सरकार ने न्यायालय को सूचित किया कि कोविड-19 महामारी के दौरान मोरेटोरियम अवधि में ऋण भुगतान की किस्तें स्थगित करने पर बैंकों द्वारा लगाए जा रहे ब्जाज के मसले पर उच्च स्तर पर विचार हो रहा है। शीर्ष अदालत ने केन्द्र और रिजर्व बैंक को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय देते हुए कहा कि इससे पहले इस बारे में निर्णय लिया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यामयूर्ति एम आर शाह की पीठ ने इस मामले को अब 28 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया था। पीठ ने उम्मीद जताई कि केन्द्र और रिजर्व बैंक सभी मुद्दों पर सक्रिय होकर विचार करेंगे। पीठ ने स्पष्ट किया था कि वह अंतिम अवसर दे रही है और इसके बाद इसकी सुनवाई स्थगित नहीं की जाएगी। न्यायालय कोविड-19 महामारी की वजह से घोषित मोरेटोरियम अवधि के दौरान स्थगित की गई किस्तों पर ब्याज वसूले जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। केन्द्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को सूचित किया कि सरकार में उच्च स्तर पर सभी मुद्दों पर विचार किया जा रहा है और महामारी के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के सामने आई समस्याओं के बारे में दो सप्ताह के भीतर इस बारे में उचित निर्णय ले लिया जाएगा।

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  • Web Title:Final hearing in Supreme Court on Lone Moratorium today