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30 मई, 2020|12:48|IST

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फिक्की ने सरकार को दिया सुझाव, भारत जैसा देश महीनों तक नहीं झेल सकता लॉकडाउन, स्वस्थ युवाओं को मिले काम की छूट

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कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन लागू है। कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में तेजी बरकरार रहने की वजह से इसका 30 अप्रैल तक बढ़ना तय माना जा रहा है। इस बीच फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने कहा है कि भारत जैसे देश को महीनों तक लॉकडाउन नहीं रखा जा सकता है। ऐसे में लॉकडाउन और आर्थिक गतिविधियों के बीच एक बैलेंस बनाने की जरूरत है। उद्योग संगठन ने लॉकडाउन को धीरे-धीरे खत्म करने और स्वस्थ युवाओं को काम पर लौटने को लेकर केंद्र सरकार को कई सुझाव दिए हैं।

धीरे-धीरे हटाया जाए लॉकडाउन
फिक्की ने केंद्र सरकार को दिए सुझाव में कहा है कि सरकार को देशभर में चुनिंदा तौर पर लॉकडाउन को खत्म करना चाहिए ताकि उत्पादन, वितरण, उपभोग, परिवहन और दूसरी आर्थिक गतिविधियां शुरू हो सकें। शुरुआत उन जिलों से हो जहां कोरोना का कोई केस नहीं है।

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युवा और स्वस्थ लोगों को मिले काम की छूट
फिक्की ने कहा है कि लॉकडाउन से बाहर निकलने का रास्त यह हो सकता है कि 22 से 39 वर्ष तक के स्वस्थ लोगों को काम शुरू करने की छूट दी जाए। फिक्की ने कहा, 'यह कम जोखिम वाला समूह है। 15 करोड़ लोगों का यह समूह आर्थिक गतिविधियों के पहिये को चला सकता है।'

सभी वस्तुओं को आवाजाही में मिले छूट
उद्योग संगठन ने कहा है कि सभी प्रकार के वस्तुओं को आवाजाही के लिए छूट दी जाए। जरूरी और गैर-जरूरी वस्तुओं में फर्क ना किया जाए। 

सोशल डिस्टेंशिंग के साथ खुलें दुकानें
फिक्की ने सरकार से यह भी कहा है कि सभी स्टोर और किराना दुकानों को ग्राहकों के लिए खोल दिया जाए। सोशल डिस्टेंशिंग का पूरी तरह पालन करते हुए इनमें बिक्री की छूट हो ताकि लोगों को जरूरी सामान मिल सके और पैनिक भी कम हो। 

ट्रेन और विमान सेवा भी हो शुरू
घरेलू विमान सेवाओं को शुरू होने दिया जाए, विशेषकर उन स्थानों के बीच जो कोरोना-19 से प्रभावित नहीं हैं। विमानों को एक तिहाई यात्रियों के साथ उड़ाया जा सकता है, ताकि यात्रियों के बीच दूरी रहे। सीमित संख्या में ट्रेनों की आवाजाही शुरू हो ताकि लोग जरूरी काम के लिए यात्रा कर सकें।

किसानों को मिले कटाई-बुआई के लिए छूट
फिक्की ने कहा कि कटाई का सीजन शुरू हो चुका है और श्रमिक उपलब्ध नहीं हैं। जिला अधिकारियों को इसके लिए निर्देश दिए जाएं और मनरेगा मजदूरों का इस्तेमाल फसल कटाई में हो। किसानों को बीज और खाद नहीं मिल रहे हैं जिसकी वजह से गर्मियों की फसल नहीं लग पा रही है। अनाजों की बिक्री के लिए मंडी में आवाजही की भी समस्या है। फिक्की ने कहा, 'कृषि कार्यों को पूरी तरह खोला जाए और मदद की जाए, नहीं तो किसानों और खेतीहर मजदूरों के लिए बहुत गंभीर समस्या होगी।' 

'जांच में लाई जाए तेजी'
फिक्की ने सरकार से यह भी कहा है कि अभी देश में पर्याप्त टेस्टिंग नहीं हो रही है। फिक्की ने कहा, 'एक कमी जिसका हम अभी सामना कर रहे हैं वह है कि टेस्टिंग क्षमता का अभवा, जो बीमारी के फैलाव की सही समझ को सीमित कर रहा है। अब बड़े पैमाने पर टेस्टिंग की बहुत आवश्यकता है और स्थानीय स्तरों पर अनुशान सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।'

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