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8 जुलाई, 2020|12:29|IST

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कोरोना से बीमार अर्थव्यवस्था का इलाज करेगा देश का किसान, कृषि क्षेत्र में 2020-21 में 2.5 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना: क्रिसिल

कोरोना संकट जहां देश के हर सेक्टर से बुरी खबरें आ रही हैं तो वहीं एक मात्र एग्रीकल्चर ही ऐसा सेक्टर है, जहां से अच्छी उम्मीद बंधी है। कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न संकट में कृषि का क्षेत्र एकमात्र सकारात्त्मक संकेत देने वाला क्षेत्र बना हुआ है। कृषि में वर्ष 2020-21 के दौरान 2.5 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

क्रिसिल रिसर्च की रिपोर्ट में हालांकि जोखिमों को सूचीबद्ध किया गया है जैसे कि टिड्डियों के हमले की संभावना और बागवानी उत्पादों पर लॉकडाउन का प्रभाव।  महामारी और उसके बाद लॉकडाउन के कारण, खाद्यान्नों की तुलना में बागवानी उपज की मांग अधिक प्रभावित होने की संभावना है।  खाद्यान्नों के लिए, सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और खरीद का समर्थन है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने 14 खरीफ फसलों के लिए एमएसपी बढ़ोतरी की घोषणा की है, जिससे किसानों को उनके उत्पादन लागत पर 50-83 प्रतिशत लाभ मिलने का आश्वासन दिया गया है।  बागवानी उत्पादन जल्दी खराब होने वाले होते है। मंडियों में इनकी आवक में भारी कमी होने के बावजूद अप्रैल में इनके थोक कीमतों में गिरावट आई।

टिड्डियों के हमलों से नुकसान

रिपोर्ट में कहा गया है कि कई बागवानी उत्पादों की खड़ी फसलें, बिक्री की समस्या के कारण जिनकी कटाई नहीं की गई, उन पर टिड्डियों के हमले हुए।  इसी तरह, धार्मिक स्थल बंद होने तथा शादी समारोह आदि को टाले जाने के कारण फूलों की मांग कम हो गई।   इस क्षेत्र में दो-तिहाई हिस्सेदारी के साथ पशुधन, दूध का सबसे बड़ा योगदान है, इसके बाद मांस और अंडे का बहुत छोटा हिस्सा है।

लॉकडाउन के बावजूद नहीं कम हुई खपत

सौभाग्य से, लॉकडाउन के बावजूद घरेलू खंड में दूध की खपत काफी हद तक स्थिर रही है।  होटल और रेस्तरां क्षेत्रों से मांग, जो कुल दूध की खपत में 15-20 प्रतिशत का योगदान करती है, जो एकदम लड़खड़ा गई है, लेकिन उम्मीद है कि लॉकडाउन हटाने के बाद धीरे-धीरे इसमें सुधार होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्तवर्ष में कृषि और संबद्ध गतिविधियों में वृद्धि, सामान्य मानसून रहने के साथ खाद्यान्नों की भारी पैदावार पर टिका है।  जल्दी खराब होने के गुण के कारण बागवानी फसलों को कुछ नुकसान की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

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 पशुधन उत्पादों में दूध उत्पादन के मामले में अच्छा प्रदर्शन रहने की उम्मीद है, पर मांस, अंडे, मछली पकड़ने और जलीय कृषि के लंबे समय तक प्रभावित रहने की संभावना है, क्योंकि महामारी के दौरान मांसाहारी भोजन की खपत कम करने की सहज प्रवृत्ति होती है।  इसमें कहा गया है कि कुल मिलाकर कृषि की वृद्धि दर में तेजी बनी रह सकती है।

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  • Web Title:Farmers of india cure ailing economy from Corona agriculture sector likely to grow by 2poin 5 percent CRISIL report