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देवास-एंट्रिक्स विवाद: झूठ की नींव पर हुई थी डील, विदेश तक में चल रही कानूनी जंग

17 दिसंबर 2004 की बात है, इस दिन देवास मल्टीमीडिया (Devas Multimedia) नाम की कंपनी की नींव रखी गई, जिसने एक ऐसी डील कर डाली, जो बाद में विवादों में आ गई। वहीं, कंपनी पर भी ताला लग गया। अब करीब डेढ़...

देवास-एंट्रिक्स विवाद: झूठ की नींव पर हुई थी डील, विदेश तक में चल रही कानूनी जंग
Deepak Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 18 Jan 2022 07:23 PM

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17 दिसंबर 2004 की बात है, इस दिन देवास मल्टीमीडिया (Devas Multimedia) नाम की कंपनी की नींव रखी गई, जिसने एक ऐसी डील कर डाली, जो बाद में विवादों में आ गई। वहीं, कंपनी पर भी ताला लग गया। अब करीब डेढ़ दशक बाद एक बार फिर देवास मल्टीमीडिया की चर्चा हो रही है। इस बार भी चर्चा के केंद्र में देवास मल्टीमीडिया की वही पुरानी डील है। आइए समझते हैं पूरे प्रकरण को।  

कब हुई डील: दरअसल, साल 2005 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की कॉमर्शियल ब्रांच एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन और देवास मल्टीमीडिया के बीच एक डील हुई थी। ये डील सैटेलाइट सेवा के लिए थी। इसके तहत एस-बैंड सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का उपयोग करके मोबाइल यूजर्स को मल्टीमीडिया सेवाएं दी जानी थीं। देवास के मुताबिक इस डील के जरिए देश में अपनी तरह का पहला और जबरदस्त प्रयोग कर रहा था। नतीजतन, देवास ऐसी टेक्नोनॉजी लेकर आया, जो अपने आप में नया था। ये डील एंट्रिक्स के लिए एक बड़ा रेवेन्यू सोर्स भी साबित हो रहा था।

हालांकि, जब राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) की बेंगलुरु पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी, उस दौरान बताया था कि देवास को एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन के तत्कालीन अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी तरीके से बनाया गय। इसी वजह से साल 2011 में एनसीएलटी ने देवास मल्टीमीडिया को रद्द करने का भी आदेश दे दिया। एनसीएलएटी के मुताबिक ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम की नीलामी धोखाधड़ी में हुई थी, जबकि सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य सामाजिक उद्देश्यों के लिए एस-बैंड उपग्रह स्पेक्ट्रम की जरूरत थी।

इस आदेश को देवास मल्टीमीडिया और उसके शेयरधारक देवास एम्प्लॉइज मॉरीशस प्राइवेट लिमिटेड ने एनसीएलएटी की चेन्नई पीठ के समक्ष चुनौती दी थी, जिसने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, जहां न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम ने देवास मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटेड की याचिका को खारिज कर दिया है।

विदेशी निवेशकों का है पैसा: देवास मल्टीमीडिया ने इंटरनेशनल चैंबर्स ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) में फैसले के खिलाफ मध्यस्थता कार्रवाई शुरू की। इसके अलावा देवास के विदेशी निवेशकों द्वारा दो अन्य मध्यस्थता कार्रवाई भी शुरू की गईं। भारत को तीनों मामलों में हार का सामना करना पड़ा और नुकसान की भरपाई के लिए कुल 1.29 अरब डॉलर का भुगतान करने को कहा गया। इसी प्रकरण में एयर इंडिया की संपत्तियां भी जब्त करने का आदेश आया था। हालांकि इसी महीने कनाडा की अदालत ने अपने ही फैसला पर रोक लगा दी है, जो भारत के लिए एक बड़ी राहत है।

निर्मला सीतारमण ने यूपीए पर बोला हमला: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देवास-एंट्रिक्स मुद्दे पर मीडिया को संबोधित किया है। उन्होंने बताया है कि यह धोखाधड़ी का सौदा था। 2011 में जब इसे रद्द किया गया तब देवास अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में चला गया। भारत सरकार ने मध्यस्थता के लिए नियुक्ति नहीं की, 21 दिनों के भीतर मध्यस्थता के लिए नियुक्ति के लिए कहा गया, लेकिन सरकार ने नियुक्ति नहीं की।

निर्मला सीतारमण के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पता चलता है कि कैसे यूपीए सरकार गलत कामों में लिप्त थी। एंट्रिक्स-देवास सौदा राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ था। आरोप के मुताबिक प्राइमरी वेवलेंथ, सैटेलाइट या स्पेक्ट्रम बैंड की बिक्री करके इसे निजी पार्टियों को देना और निजी पार्टियों से पैसा कमाना कांग्रेस सरकार की विशेषता रही है।

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