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लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीPublished By: Tarun Singh
Mon, 05 Apr 2021 06:08 PM
इंम्प्लायर्स पब्लिक प्रोविडेंट फंड के नए टैक्स नियमों ने किया करदाताओं और एक्सपर्ट्स को कंफ्यूज 

प्रोविडेंट फंड और एनपीएस ऐसी स्कीम्स जहां सैलरी पाने वाले कर्मचारी बड़ी संख्या इनवेस्टमेंट करके पैसा बचाने के साथ अपनी टैक्स सेविंग भी करते हैं। लेकिन सरकार के एक नए नियम ने प्राइवेट कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ा दी है। सरकार की घोषणा के बाद कर्मचारी और एक्सपर्ट सभी कंफ्यूज हैं। बजट 2021 में भारत सरकार की तरफ से यह घोषणा की गई थी कि प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी अगर पब्लिक प्रोविडेंट फंड में 2.5 लाख से अधिक का इनवेस्टमेंट पर मिलना वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आएगा। वहीं सरकार पहले ही इंम्प्लायर्स के काॅन्ट्रिब्यूशन पर दायरा 7.5 लाख रुपये तक निर्धारित कर चुकी है। इससे ऊपर का योगदान टैक्स दायरे में आएगा।

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वित्त वर्ष 2020-21 के बजट भाषण में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि पब्लिक प्रोविडेंट फंड, एनपीएस पर अगर नियोक्ता का योगदान 7.5 से अधिक रहा तो वह टैक्स दायरे में आएगा। इकोनाॅमिक्स टाइम्स के अनुसार इनकम टैक्स के अधिकारियों ने नियम बनाने के लिए 13 महीने का समय लिया और 5 मार्च को यह सबके सामने आया। तब वित्तीय वर्ष समाप्त होने में महज 26 दिन बचे यानि चार हफ्ते से भी कम का समय। जिसके कारण भी लोगों को बहुत सी परेशानियां झेलनी पड़ी। 

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दिए गए नियम के कारण कंफ्यूजन काफी बढ़ गया था। जिसके कारण अंतिम समय में टैक्सपेयर्स के ऊपर भार भी काफी बढ़ गया। सभी टैक्सपेयर्स को 31 मार्च तक समय होता है टैक्स भरने के लिए, लेकिन श्रम मंत्रालय की तरफ से पिछले एक साल (2020-21) की ईपीएफ की ब्याज दर की अधिसूचना अभी करना बाकि है। 

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