EPF: 3 कारण जिनकी वजह इस साल आपको कम मिलेगा रिटर्न
मुख्य बातें
- यदि आप सेवानिवृत्ति की जरूरतों के लिए अपने कर्मचारियों के भविष्य निधि (ईपीएफ) खाते पर निर्भर हैं, तो इस वित्तीय वर्ष में मिलने वाले रिटर्न से आपको निराशा हाथ लग सकती है
- हालांकि, कोविड-19 महामारी को..

यदि आप सेवानिवृत्ति की जरूरतों के लिए अपने कर्मचारियों के भविष्य निधि (ईपीएफ) खाते पर निर्भर हैं, तो इस वित्तीय वर्ष में मिलने वाले रिटर्न से आपको निराशा हाथ लग सकती है। हालांकि, कोविड-19 महामारी को देखते हुए तीन महीने के पीएफ निकालने की सुविधा और ईपीएफ योगदान में कटौती जैसे नए उपायों से चल रहे संकट के दौरान पीएफ खाताधारकों के हाथों में कैश तो बढ़ेगा, लेकिन साथ ही इस वित्तीय वर्ष में रिटर्न प्रभावित होगा। बता दें सावधि जमा और छोटी बचत योजनाओं में ब्याज दरों में गिरावट के बावजूद, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने 2019-20 के लिए 8.5% की ब्याज दर घोषित की थी। आपके ईपीएफ से मिलने वाले रिटर्न को 3 बड़े कारक प्रभावित कर सकते हैं।
1) 3 महीने के लिए सांविधिक ईपीएफ योगदान में कटौती
सरकार ने अगले तीन महीनों के लिए मूल वेतन और महंगाई भत्ते (12% कर्मचारी और 12% नियोक्ता) के 20% से सांविधिक ईपीएफ योगदान की आवश्यकता को कम करने की घोषणा की है। नतीजतन वेतन के रूप में आपके हाथ में आने वाले धन में वृद्धि होगी। ईपीएफओ में योगदान कम करने से रिटायरमेंट कॉर्पस पर भी असर होगा। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि इस कटौती से वेतनभोगी वर्ग को लाभ कम और नुकसान अधिक होगा। डेलॉइट इंडिया के पार्टनर, सरस्वती कस्तूरीरंगन ने कहा, "ब्याज मासिक बैलेंस पर सदस्य के खाते में जमा होता है। 3 महीने के लिए योगदान कम होने के बाद, मासिक शेष उस सीमा तक कम होगा और ब्याज दर कम होगी।" ।
2) ईपीएफ जमा में देरी के लिए जुर्माने का हटना
कोरोना संकट और लॉकडाउन के कारण अभी कारोबार सामान्य नहीं हो पाया है। कैश फ्लो की कमी को देखते हुए ईपीएफओ ने नियोक्ताओं द्वारा ईपीएफ जमा में देरी के लिए जुर्माना हटा दिया है। ऑनलाइन निवेश मंच ग्रोव के सह-संस्थापक और सीओओ हर्ष जैन कहते हैं कि जुर्माना यह सुनिश्चित करता है कि अंशदान समय पर जमा किया जाए, जिससे ईपीएफओ के लिए फंड की ओर से किए गए निवेश का प्रबंधन करना आसान हो जाता है।
अगर नियोक्ता पीएफ अंशदान देर से जमा करता है तो जमा की रकम कम जैसे मासिक शेष राशि को प्रभावित कहोगी और यह बदले में जमा पर अर्जित ब्याज पर कम होगा। कस्तूरीरंगन ने कहा कि इस शेष राशि पर चक्रवृद्धि का लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि योगदान समय पर नहीं दिया गया। इस छूट का कितना प्रभाव पड़ा यह तब पता चलेगा जब यह साफ हो जाएगा कितने नियोक्ता अपना अंशदान 3 महीने बाद जमा करते हैं।
3) ईपीएफओ की ब्याज दर में इस साल और गिरावट आने की आशंका
भारत में अब गिरती ब्याज दर के परिदृश्य को देखते हुए जहां भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) नियमित रूप से नीतिगत दरों में कटौती कर रहा है। ऐसे में EPFO के लिए इस वित्तीय वर्ष के लिए भी 8.5% ब्याज दर बनाए रखना कठिन होगा। पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) की ब्याज दर में 7.1% की कटौती की गई है, जबकि राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC) पर ब्याज दर 110 बीपीएस घटाकर 6.8% कर दी गई है।
इस तथ्य को देखते हुए कि विभिन्न निवेशों पर रिटर्न की दर में गिरावट आई है, पीएफ ट्रस्ट के साथ कॉर्पोरेट्स को यह समीक्षा करने की आवश्यकता होगी कि क्या ईपीएफओ द्वारा घोषित ब्याज दरों से मेल खाने के लिए कमाई पर्याप्त है या नहीं। कस्तूरीरंगन ने कहा, "हमें इस बात पर भी इंतजार करना होगा कि ईपीएफओ द्वारा वित्त वर्ष 2020-21 के लिए ब्याज की कम दर घोषित की जाएगी या नहीं।"
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


