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ई-वाहनों से राज्यों की कमाई घटने की आशंका

सौरभ शुक्ल , नई दिल्ली Published By: Rakesh Last Modified: Tue, 30 Jul 2019 2:55 AM
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केंद्र सरकार भले ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के मकसद से कदम उठा रही हो, लेकिन राज्यों के भीतर इस बात को लेकर खलबली मच गई है। देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के आने से पेट्रोल और डीजल की खपत घटेगी और राज्यों को चिंता सता रही है कि अगर पेट्रोल-डीजल की बिक्री घटी तो वैट के जरिये होने वाली उनकी कमाई भी घट जाएगी। जीएसटी काउंसिल की शनिवार को हुई बैठक में राज्यों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई बैठक में अपनी चिंता वित्त मंत्री के सामने जाहिर की थी।

सूत्रों के मुताबिक आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पंजाब जैसे राज्यों ने जीएसटी में मुआवजे की अवधि तीन से पांच साल और बढ़ाए जाने की भी मांग रखी। राज्यों को इस बात का डर सता रहा है कि केंद्र सरकार की कदमों से देश भर में कार, मोटरसाइकिल, तिपहिया वाहन और बसें सब अगर इलेक्ट्रिक से ही चलने लगीं तो अब तक इनके जरिये होने वाली पेट्रोल और डीजल की भी खपत खत्म हो जाएगी।

पेट्रोलियम पदार्थ जीएसटी के दायरे से बाहर हैं और राज्यों की आमदनी का एक बड़ा हिस्सा भी हैं। ऐसे में वो उसे खोना नहीं चाहते हैं। राज्यों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार की किसी भी नीति के जरिये उसमें कमी आती है तो उस नुकसान की भरपाई भी केंद्र सरकार करे। जीएसटी लागू करने के दौरान केंद्र ने राज्यों से जीएसटी राजस्व में होने वाले नुकसान की पांच साल तक भरपाई का वादा किया है।

यही वजह है कि अब ऐसे हालात बनते देख राज्य उस पांच साल की अवधि को और बढ़ाने की मांग करने लगे हैं। जानकारी के मुताबिक, जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक इस बारे में चर्चा की जाएगी कि किस तरह से राज्यों के घाटे का आकलन किया जाएगा और उसकी भरपाई का क्या फॉर्मूला होगा। जीएसटी परिषद की पिछली बैठकमें ई-वाहनों पर टैक्स घटा था।

65 शहरों के लिए 5645 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी
नई दिल्ली। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने सोमवार को कहा कि अंतर-मंत्रालयी समिति ने 65 शहरों में परिचालन के लिये 5,645 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी दी है। जीएसटी परिषद ने ई-वाहनों पर कर की दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया। यह कटौती एक अगस्त से प्रभाव में आएगी। कांत ने ट्विटर पर लिखा, इलेक्ट्रिक वाहनों पर अंतरमंत्रालयी समिति ने 65 शहरों के भीतर और आठ राज्य परिवहन निगमों के लिए कुल 5,645 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी दी है। 

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