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ED ने देश के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज को नोटिस भेजा, जानें क्या है वजह 

न्यू़ज एजेंसी,नई दिल्लीPublished By: Tarun Singh
Sat, 12 Jun 2021 11:46 AM
ED ने देश के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज को नोटिस भेजा, जानें क्या है वजह 

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देश के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एक्सचेंज को यह नोटिस 2,790 करोड़ रुपये के लेनदेन में कथित रूप से विदेशी मुद्रा विनिमय प्रबंधन कानून (फेमा) के उल्लंघन को लेकर जारी किया गया है। इस एक्सचेंज 'वजीरएक्स की स्थापना दिसंबर, 2017 में कंपनी जन्माई लैब्स प्राइवेट लि. के तहत हुई थी। यह घरेलू क्रिप्टोकरेंसी और बिटकॉइन एक्सचेंज स्टार्टअप के रूप में स्थापित किया गया था। वजीरएक्स का मुख्यालय मुंबई में है। 
     
केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा जांच के बाद जो नोटिस जारी किया गया है उसमें एक्सचेंज के निदेशक निश्चल सेठी और हनुमान महात्रे का भी नाम है। एक्सचेंज और उसके प्रवर्तकों ने किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा है कि वे सभी मान्य कानूनों का अनुपालन कर रहे हैं। ईडी ने कहा कि एक 'चीनी नागरिक के स्वामित्व वाली गैरकानूनी ऑनलाइन बेटिंग ऐप से संबंधित मनी लांड्रिंग जांच के दौरान उसे कंपनी के इस लेनदेन की जानकारी मिली। ईडी ने कहा कि यह कारण बताओ नोटिस 2,790.74 करोड़ रुपये के लेनदेन के संदर्भ में है। 

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शेट्टी ने ट्वीट कर कहा कि वजीरएक्स को अभी तक ईडी की ओर से कोई नोटिस नहीं मिला है। शेट्टी एक्सचेंज के सीईओ हैं। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है, ''वजीरएक्स सभी कानूनों का अनुपालन कर रहा है। हम अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी) तथा धन शोधन रोधक प्रक्रियाओं का अनुपालन कर रहे हैं और जब भी जरूरत हुई है हमने विधि प्रवर्तन अधिकारियों को सूचनाएं उपलब्ध कराई हैं।"

प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि जांच में यह तथ्य सामने आया कि चीन के नागरिकों ने भारतीय रुपये की जमा को क्रिप्टोकरेंसी टीथर (यूएसडीटी) में बदलकर 57 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई का धनशोधन किया। बाद में इसे बाइनेंस (केमैन आइलैंड में पंजीकृत एक्सचेंज) वॉलेट को स्थानांतरित कर दिया गया। बाइनेंस ने 2019 में वजीरएक्स का अधिग्रहण किया था। ईडी का आरोप है कि वजीरएक्स ने क्रिप्टोकरेंसी के जरिए व्यापक लेनदेन की अनुमति दी। वजीरएक्स ने धन शोधन रोधक कानून और आतंकवाद वित्तपोषण प्रतिरोधक (सीएफटी) और साथ में फेमा दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए जरूरी दस्तावेजों को जुटाए बिना इनकी अनुमति दी।

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