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30 मई, 2020|11:04|IST

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कोराना वायरस: अर्थशस्त्रियों ने कहा, मनरेगा मजदूरी बढ़ाने की जगह कैश ट्रांसफर करे सरकार

Jump in rupee (Reuters File Photo)

व्यावहारिक अर्थशास्त्र के विशेषज्ञों ने कोरोना वायरस संकट के इस दौर में मनरेगा मजदूरों को 20 दिन की मजदूरी के बराबर धन उनके खातों में सीधे हस्तांतरित करने की सिफारिश की है। उनका यह भी कहना है कि इस समय राजकोषीय घाटे की अधिक चिंता करने के बजाय सरकार असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को कुछ पैसा और पर्याप्त राशन उपलब्ध कराने के प्रबंध करे। 
    
उनका कहना है कि इस समय काम-धाम ठप है ऐसे में मनरेगा मजदूरों की मजदूरी की दर बढ़ाने से उन्हें तत्काल कोई राहत नहीं मिलने वाली है। उनके खाते में धन होने से पाबंदी हटने के बाद बाजार में मांग पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा। 

बेंगलुरू स्थित इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक्स चेंज के प्रोफेसर और अर्थशास्त्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा, 'इस समय आवश्यकता है कि जो भी प्रभावित लोग हैं, सरकार उन तक पर्याप्त राशन पहुंचाए और डीबीटी के जरिए पैसा उनके खाते में डाले। 
     
कुमार ने कहा, 'सरकार ने राहत पैकेज में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून) के तहत पंजीकृत मजदूरों की मजदूरी 20 रुपये बढ़ाकर 202 रुपये की है। लेकिन लॉकडाउन के दौरान कोई काम नहीं हो रहा और आने वाले समय में अनिश्चितता की स्थिति है, इसको देखते हुए मजदूरी बढ़ाने का कोई मतलब नहीं है। इससे बेहतर होता सरकार उन पंजीकृत कामगारों के खातों में 15-20 दिन की एकमुश्त मजदूरी डालती जिससे इनके परिवार और अंतत: मांग बढ़ने के रूप में देश को लाभ होता।

नैशनल काउंसिल ऑफ एप्लायड एकोनामिक रिसर्च के डा. सुदिप्तो मंडल ने भी कहा, 'इस समय सरकार को राजकोषीय घाटे पर चिंता किये बिना जितना संभव हो जरूरतमंदों की जेब में पैसा और खाने का सामान पहुंचाने की जरूरत है। इसके लिये अगर जरूरी हो तो केंद्र सरकार स्वयं या राज्यों को अतिरिक्त उधारी लेने की अनुमति दे सकती है।

मंडल ने भी मनरेगा श्रमिकों के लिए मजदूरी बढ़ाए जाने के बारे में कहा, 'सरकार जल्दबाजी में राहत पैकेज लेकर आई जिसके कारण इस पर विचार नहीं किया गया। बेहतर यही है कि उन्हें कुछ दिनों की एकमुश्त राशि दी जाए। सरकार ने बजट में मनरेगा के लिये इसका प्रावधान कर रखा है। उसमें से राशि दी जा सकती है।'

गौरतलब है कि सरकार ने 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज में 80 करोड़ लोगों को पांच किलो गेहूं या चावल तीन महीने तक मुफ्त देने, मनरेगा के तहत मजदूरी में 20 रुपये की बढ़ोतरी, महिला जनधन खाताधारकों को तीन किस्तों में 1500 रुपये देने आदि की घोषणा की है। वित्त मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार मनरेगा के तहत मजदूरी बढ़ने से 13.62 करोड़ परिवार को लाभ होगा।

असंगठित क्षेत्र के कामगारों को नकद सहायता के लिए जरूरी आंकड़े के बारे में कुमार ने कहा, 'वैसे तो सरकार के पास हर प्रकार का आंकड़ा है और अगर कुछ कमी है तो वह गांव से लेकर राज्य स्तर का आंकड़ा संबंधित प्राधिकरणों से ले सकती है। डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के जरिये राशि हस्तांतरित करने में कोई मुद्दा नहीं है।'

सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा, 'आंकड़े की कोई समस्या नहीं है। सरकार के पास हर जरूरी आंकड़ा उपलब्ध है।' यह बात ऐसे समय कही गयी है जब सरकार ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिये 25 मार्च से 21 दिन के देशव्यापी बंद की घोषणा की है। इससे आर्थिक गतिविधियां ठप होने से बड़े पैमाने पर कामगार प्रभावित हुए हैं।

राहत पैकेज बढ़ाने से राजकोषीय घाटे पर पड़ने वाले असर के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि अगर जरूरतमंदो के पास पैसा होगा, स्थिति सामान्य होते ही मांग बढ़ेगी तथा इससे अर्थव्यवस्था में गति आएगी। सरकार ने 2020-21 के लिये राजकोषीय घाटा 3.5 प्रतिशत और 2019-20 के लिये संशोधित अनुमान में 3.8 प्रतिशत रहने का लक्ष्य रखा है।
     
वैसे खाद्यान्न भंडार के मामले में सरकार के पास इस समय इफरात में स्टाक पड़ा है। नियमों के तहत देश में मार्च तक 2.1 करोड़ टन (रणनीतिक भंडार समेत) के बफर स्टॉक के मुकाबले गेहूं और चावल के लगभग 5.85 करोड़ टन भंडार थे। जबकि नई फसल के लिए खरीद प्रक्रिया फिर से शुरू होने वाली है।

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  • Web Title:economy will get help from direct cash transfer says economists