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अर्थशास्त्री डॉक्टर डूम ने चेताया, कोरोना संकट के बाद वापस नहीं आएंगी कुछ नौकरियां

अर्थशास्त्री नूरील रूबिनी ने कोरोना वायरस से लंबे समय तक गिरावट और अर्थिक सुस्ती को लेकर चेताया है। प्रमुख अर्थशास्त्री ने 10 साल अवसाद (डिप्रेशन) और ऋण को लेकर आगाह किया है। बीबीसी ने शुक्रवार को...

अर्थशास्त्री डॉक्टर डूम ने चेताया, कोरोना संकट के बाद वापस नहीं आएंगी कुछ नौकरियां
एजेंसी,लंदनSat, 23 May 2020 12:06 PM
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अर्थशास्त्री नूरील रूबिनी ने कोरोना वायरस से लंबे समय तक गिरावट और अर्थिक सुस्ती को लेकर चेताया है। प्रमुख अर्थशास्त्री ने 10 साल अवसाद (डिप्रेशन) और ऋण को लेकर आगाह किया है। बीबीसी ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में कहा कि अपनी ग्लूमी प्रीडिक्शन्स (उदास भविष्यवाणियों) के लिए डॉक्टर डूम के नाम से चर्चित प्रोफेसर रूबिनी ने कहा कि कुछ ऐसी नौकरियां हैं, जो इस संकट के बाद वापस नहीं आएंगी। उन्होंने 'अभूतपूर्व मंदी' को लेकर चेताते हुए कहा, “भले ही वैश्विक अर्थव्यवस्था कोरोनावायरस के प्रभाव से इस वर्ष ही ठीक हो जाए, लेकिन फिर भी हालत ठीक नहीं रहेंगे।” 

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अन्य लोगों से पहले ही वर्ष 2008 के वित्तीय संकट को लेकर चेताने वाले रूबिनी ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, “वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान उत्पादन में तेजी से गिरावट आने में लगभग तीन साल लग गए लेकिन इस बार तीन साल या तीन माह नहीं सिर्फ तीन हफ्तों में हर कंपोनेंट का फ्रीफॉल हुआ।”  रूबिनी ने कहा कि अर्थशास्त्रियों की भाषा में प्रत्येक रिक्वरी 'यू' या फिर 'एल' के आकार की होगी। उन्होंने इसे 'ग्रेट डिप्रेशन' करार दिया।  एक यू-आकार की रिक्वरी का मतलब है कि विकास में गिरावट होगी और फिर धीमे या लंबे समय तक नहीं बढ़ने के बाद ही यह उठा पाएगा। 

कम वेतन, कोई लाभ नहीं

वहीं, एल-आकार की रिक्वरी और भी अधिक कठोर है। इसमें विकास तेजी से गिरेगा और लंबे समय तक हालात ऐसे ही बने रहेंगे क्योंकि कोरोनावायरस संक्रमण की रोकथाम के मद्देनजर लागू किए गए लॉकडाउन के चलते नौकरियां जाने का असर अमीर एवं गरीब दोनों प्रकार के देशों में देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा, “कम वेतन, कोई लाभ नहीं, पार्ट-टाइम के साथ केवल आंशिक रूप से ही गईं नौकरियां वापस आएंगी। औसत कामकाजी व्यक्ति के लिए नौकरी, आय व मजदूरी की और भी अधिक असुरक्षा होगी।”

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