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आर्थिक समीक्षा 2019: फंसे कर्ज में 2018-19 में गिरावट, पूंजी प्रवाह में खड़ी हुई दिक्कत

फंसे कर्ज में गिरावट की वजह से 2018-19 में बैंकिंग क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधार आया है। हालांकि , पूंजी बाजार से जुटाई गई पूंजी में गिरावट और गैर - बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र के संकट के कारण पूंजी प्रवाह में रुकावट आई है। बृहस्पतिवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में यह बात कही गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से बृहस्पतिवार को प्रस्तुत समीक्षा में कहा गय , "बैंकों के फंसे कर्ज (एनपीए) के स्तर में और कर्ज कारोबार में तेजी से बैंकिंग प्रणाली के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। हालांकि, पूंजी बाजार से जुटाई गई राशि में कमी और गैर - बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के संकट ने अर्थव्यवस्था में पूंजी प्रवाह में रुकावट खड़ी की है।"

आईएलएंडएफएस समूह के कर्ज में चूक करने और रेटिग एजेंसियों की ओर से रेटिंग घटाए जाने के बाद एनबीएफसी कंपनियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। समीक्षा में कहा गया है कि एनबीएफसी के संसाधनों में कमी करने से हालिया तिमाहियों में क्षेत्र की कर्ज क्षमता पर असर पड़ा है। हालांकि, जोर दिया गया है कि सरकार ने इस पर तुरंत कार्रवाई की और नकदी की कमी की समस्या को रोकने के लिए तत्काल उपाय किए।

आर्थिक समीक्षा 2019: विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार इजाफा, 400 अरब डॉलर के स्तर पर कायम

साल 2018-19 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रदर्शन में सुधार हुआ और सरकारी बैंकों का सकल एनपीए अनुपात मार्च से दिसंबर , 2018 के बीच 11.5 प्रतिशत से घटकर 10.1 प्रतिशत पर आ गया। इसमें कहा गया है कि गैर - खाद्य बैंक कर्ज (एनएफसी) की वृद्धि इस दौरान सुधार देखा गया। पिथले कुछ सालों से इसमें सुस्ती का रुख था।

समीक्षा के मुताबिक, दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता के लिए तंत्र व्यवस्थित रूप से तैयार हो रहा है। इस व्यवस्था से बैंकों के फंसे कर्ज की वसूली में तेजी आई है और कारोबारी संस्कृति में सुधार हुआ है। हालांकि, सितंबर 2018 के बाद नकदी की स्थिति तंग बनी हुई है। आर्थिक समीक्षा में नकदी की स्थिति (तरलता) के विषय में कहा गया है कि 2018-19 के अंतिम दो तिमाहियों तथा 2019-20 की पहली तिमाही में औसत नकदी स्थिति तंगी की ओर बढ़ी है।

वर्ष 2018-19 की अंतिम दो तिमाहियों में बैंक कर्ज वृद्धि में सुधार हुआ , लेकिन बैंक जमा में गति धीमी रही। चलन में मौजूद मुद्रा भी तेजी आई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि आरबीआई को विनिमय दर के उतार - चढ़ाव को थामने के लिए 32 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी मुद्रा अपने मुद्रा भंडार से निकालना पड़ा।

आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि पिछले वर्ष के बाद मौद्रिक नीति की दिशा में बदलाव देखने को मिला। नीतिगत दर (रिजर्व बैंक की रपो दर) में पिछले साल 0.5 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी और बाद में मुद्रास्फीति में नरमी , अर्थव्यवस्था में सुस्ती और वैश्विक मौद्रिक परिदृश्य में नरमी की वजह से इस साल तीन बार की समीक्षा में कुल मिलना 0.75 प्रतिशत की कटौती की गई है। 

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  • Web Title:Economic Survey Bad loans fall in FY19 capital inflows constrained