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Tax में छूट के लिए इनवेस्टमेंट में न दिखाएं जल्दबाजी, अपनाएं ये तरीके

Tax छूट के लिए इनवेस्टमेंट में न दिखाएं जल्दबाजी (iStockPhoto)

वित्तीय वर्ष (Financial Year) के आखिरी महीनों के आते ही सभी वेतनभोगी टैक्स (Income Tax) बचाने के लिए नए निवेश (Investment) की जुगत में लग जाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि नए निवेश को लेकर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। अगर आप सिर्फ टैक्स बचाने की आपाधापी में कोई भी योजना चुनते हैं इससे आपकी गाढ़ी कमाई फंस सकती है। ऐसे में सबसे पहले आकलन करें कि आप कितनी बचत आप कुल आय में कर सकते हैं। आप कितनी अवधि तक निवेश चाहते हैं और लक्ष्य क्या है। अंत में यह तय करें कि सुरक्षित निवेश के तहत परंपरागत स्कीम या बाजार में जोखिम से जुड़ी योजना में निवेश चाहते हैं। 

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पहले किए निवेश का आकलन कर लें

सबसे पहले यह आकलन कर लें कि आपने अब तक जो निवेश किया है, उसमें कौन-कौन सा 80सी के दायरे में है। इससे आपको यह पता लग जाएगा कि कितना और निवेश धारा 80सी के तहत किया जा सकता है। कई बार जल्दबाजी में आप नया निवेश करते हैं, लेकिन धारा80सी के तहत कटौती की सीमा आप पार कर चुके होते हैं। ऐसे में पहले ही आकलन करना जरूरी है। ध्यान रखें कि ईपीएफ अंशदान की भी इसी में गणना होती है। 

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कितनी कर देनदारी है, यह भी जानें

80सी, 80 डी या अन्य योजनाओं में निवेश की पूरी रकम को कुल आय में घटाकर आप जान सकते हैं कि कितना आय करयोग्य है। अगर इसके बाद भी आपकी आय टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये से ज्यादा आती है तो टैक्स सेविंग की जरूरत है। अगर 80सी में और टैक्स बचाने की गुंजाइश है तो ही उसमें निवेश करें। 

इन योजनाओं में कर सकते हैं निवेश 

धारा 80सी के तहत आप 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर कर छूट का दावा कर सकते हैं। लघु अवधि की योजनाओं में एनएससी, एफडी या वरिष्ठ नागरिक बचत जैसी योजनाएं हैं। वहीं पीपीएफ और एनपीएस में निवेश लंबे समय का होता है। अगर बाजार में पैसा लगाने के इच्छुक हैं तो इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम सबसे अच्छा विकल्प है। अगर आपका होम लोन चल रहा है तो उस पर भी कर छूट का दावा कर सकते हैं। एनपीएस में निवेश कर धारा 80सीसीडी(1बी) के तहत 50 हजार रुपये की अतिरिक्त बचत की जा सकती है। 

हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम भी कटौती में 

अगर आपने खुद या परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्लान ले रखा है तो धारा 80डी के तहत 25 हजार रुपये की छूट पाई जा सकती है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 30 हजार रुपये हैं। धारा 80जी के तहत कोई भी डोनेशन या धारा 80ई के तहत शैक्षणिक लोन पर ब्याज भुगतान पर छूट पाई जा सकती है। 

योजना की अवधि भी अहम कसौटी

योजना तय करने में सबसे महत्वपूर्ण होता है कि आप कितनी अवधि के लिए निवेश करते हैं और इसका लक्ष्य क्या है। जैसे ईएलएसएस में तीन साल की लॉक इन, एफडी में पांच साल और पीपीएफ में 15 साल का न्यूनतम निवेश होता है। ऐसे में सिर्फ दूसरों को देखते हुए किसी योजना में पैसा न डालें। अगर लंबी अवधि का निवेश चाहते हैं तो ही पीपीएफ, एनपीएस में निवेश करें, अन्यथा ईएलएसएस बेहतर विकल्प है। 

रिटर्न पर टैक्स का ध्यान भी रखें

यह भी ध्यान दें कि जिस योजना में आप निवेश कर रहे हैं, उस पर मिलने वाले ब्याज की रकम तो टैक्स के दायरे में नहीं आती है। जैसे कि एनएससी और एफडी में रिटर्न पर टैक्स है। सिर्फ पीपीएफ, ईपीएफ और ईएलएसएस और बीमा योजनाओं में निवेश, ब्याज और परिपक्वता रकम पूरी तरह करमुक्त होती है। 

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  • Web Title:dont take decision too fast in investment for tax exemption