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संभावना : कमाई पर दोहरा टैक्स हो सकता है खत्म

आयकर में सुधार से जुड़ी प्रत्यक्ष कर संहिता की रिपोर्ट 19 अगस्त को सरकार को सौंपी जाएगी। इसमें कमाई पर दोहरे टैक्स का बोझ खत्म करने जैसी अहम सिफारिशें हो सकती हैं। सरकार इससे पहले जीएसटी लाकर अप्रत्यक्ष कर सुधारों को पहले ही लागू कर चुकी है।

माना जा रहा है यह संहिता ही आयकर कानून की जगह लेगी। इसमें 5 से 20 प्रतिशत के आयकर के स्लैब वाले लोगों को राहत दी जा सकती है। सूत्रों ने हिंदुस्तान को बताया है कि नई व्यवस्था में ऐसे प्रावधान किए जाएंगे, जिससे टैक्स कानून ज्यादा सरल और प्रभावी बनाए जा सकेंगे। सरकार की कोशिश है कि व्यक्तिगत और कारोबारी दोनों मोर्चे पर टैक्स देने वालों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के सदस्य अखिलेश रंजन की अध्यक्षता में समिति ने रिपोर्ट तैयार की है। संहिता में आयकर में मिलने वाली छूट को भी तर्कसंगत बनाया जा सकता है। अभी प्रोत्साहन के रूप में छूट का यह आंकड़ा जीडीपी के 5-6 फीसदी तक है। ऐसे में बड़ी कंपनियों या एसईजेड में काम कर रही कंपनियों से प्रोत्साहन वापसी हो मुमकिन है।

विशेषज्ञों का कहना है कि समिति आय या निवेश पर लगने वाले सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स या डिविडेंट डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स जैसे कई करों को खत्म करने का सुझाव दे सकती है, क्योंकि किसी व्यक्ति की कमाई पर दो बार टैक्स नहीं लगाया जा सकता। ऐसे में करों के एकीकरण के लिए ऐसी सौगात का प्रस्ताव संभव है। रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को सौंपी जाएगी।

1.15 लाख करोड़ के मामले फंसे हैं अपील ट्रिब्यूनल और उच्च अदालतों में 
3.41 लाख मामले लंबित आयकर कानून आयुक्त (अपीली) 5.71 लाख करोड़ मूल्य के

7.4 करोड़ ही आयकरदाता हैं देश की 130 करोड़ आबादी में सिर्फ

इसलिए शुरू हुई कवायद
व्यक्ति और कंपनियों की आय (पूंजीगत लाभ शामिल) पर भारत में कर आयकर कानून, 1961 के तहत लगता है। पिछले पांच दशक में इसमें तमाम बदलाव हुए हैं और इस वजह से नियम-कानूनों को लेकर उलझाव हैं, जिनकी व्याख्या मुश्किल है। ऐसे में आयकर कानूनों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए प्रत्यक्ष कर संहिता लाने का फैसला किया गया। 

कर विवाद कम करने की कोशिश
कर विवादों का बढ़ना और लंबे समय तक निपटारा न होना भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे में संहिता कर सुधारों और विवादों के निपटारे के लिए अहम सुझाव दे सकती है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने कर विवादों में अपील की धन सीमा पहले ही बढ़ा दी है, ऐसे में छोटे मामले ऊपरी अदालतों तक नहीं खींचे जा सकेंगे। जुर्माने और ब्याज के बिना ही विवादों के अदालत के बाहर समाधान को लेकर कोई प्रणाली सुझाई जा सकती है। 

ज्यादा लोग आयकर के दायरे में आएंगे
संहिता के तहत कर चोरी रोकने के साथ आयकर का दायरा बढ़ाने पर महत्वपूर्ण सुझाव सामने आ सकते हैं। भारत की 130 करोड़ की आबादी में 7.4 करोड़ ही कर दायरे में आते हैं। इसमें भी बड़ी संख्या कोई कर नहीं देती है। कर दायरा बढ़ाने के लिए किसान, धार्मिक और चैरिटेबल ट्रस्ट को मिली कर छूट पर पुनर्विचार हो सकता है। विरासत या संपत्ति कर की भी घोषणा संभव है। बजट में भी इसकी सुगबुगाहट मिली थी। विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों और विदेशी निवेशक कर नीति में स्थिरता चाहते हैं।

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  • Web Title:Direct Tax Code Report Submit To Finance Ministry