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डीएचएफएल पर संकट गहराया, डूबने की कगार पर; रिजर्व बैंक के अधिकार बढ़ाएगी सरकार

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आईएलएफएस और इंडियाबुल्स के बाद एक और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) डीएचएफएल में वित्तीय संकट गहरा गया है और वह डूबने की कगार पर पहुंच गई है। खबरों के मुताबिक, म्युचुअल फंड हाउसों ने बैंकों से साफ कह दिया है कि वे छोटे निवेशकों के हितों को दांव पर रखकर आगे कोई मदद डीएचएफएल को देने को तैयार नहीं है। उसने सोमवार को संकेत दिया कि वह संभवत: संकट से उबर नहीं पाएगी, क्योंकि कोई भी उसे कर्ज देने को तैयार नहीं है। इससे उसके शेयर 30 फीसदी गिरावट के साथ साल भर के निचले स्तर पर पहुंच गए।

विशेषज्ञों का कहना है कि डीएचएफएल के कर्जदाताओं में बैंक और म्युचुअल फंड हाउस के अलावा बॉन्डधारक भी हैं और ऋण के पुनर्गठन को लेकर उनमें सहमति बेहद मुश्किल है। कंपनी ने कहा कि वह सितंबर 2018 के बाद से कर्ज बांट पाने या ऋण क्षमता का विस्तार करने में असमर्थ है। कंपनी के वित्तीय हालात नाजुक हैं और बाजार से पैसा जुटाने की उसकी क्षमता पंगु हो गई है। ऐसे में कंपनी आगे काम करना जारी रह पाएगी, इसको लेकर संदेह पैदा हो गए हैं।

डीएचएफएल ने हाल ही में  आधार हाउसिंग में हाल ही में 9.15 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 205 करोड़ रुपये जुटाए थे। वहीं अवांस फाइनेंस की 30.63 फीसदी संपत्ति 304 करोड़ रुपये में बेची थी। हालांकि यह उसकी देनदारी के सामने कुछ भी नहीं है। कंपनी के प्रबंध निदेशक और चेयरमैन कपिल वधावन ने कहा कि वह हिस्सेदारों-कर्जदाताओं के साथ व्यापक पुर्नगठन योजना पर काम कर सुनिश्चित कर रही है कि ऋणदाताओं को कोई बोझ न सहना पड़े।

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कंपनी ने सितंबर 2018 से परिसंपत्तियों को बेचकर और पुनर्भुगतान से 41,800 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया है। गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी पर करीब 40 हजार करोड़ रुपये का बैंकों का ही है, लेकिन कर्ज के बदले दी गई गारंटी का मूल्य 500 करोड़ रुपये रह गया है। 

घाटे से भी कम हो गया बाजार पूंजीकरण
कंपनी का 2018-19 की चौथी तिमाही में घाटा बढ़कर 2224 करोड़ रुपये पहुंच गया। उसका बाजार पूंजीकरण भी तिमाही घाटे से 625 करोड़ रुपये कम होकर 1522 करोड़ रुपये रह गया है। जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में वह 134.35 करोड़ रुपये के मुनाफे में थी, लेकिन अगस्त 2018 में आईएलएफएस में संकट के बाद से कंपनी हाशिए पर चली गई। 

संकट की चार बड़ी वजहें
1. डीएचएफएल ने ज्यादातर कर्ज डेवलपरों को दिया है। बिल्डरों को बिना पर्याप्त जांच-परख के कर्ज बांटा और रियल एस्टेट सेक्टर में संकट आने से उसका कर्ज फंस गया। 
2. कंपनी ने वित्तीय नतीजों में कहा है कि उसके पास 20 हजार 750 करोड़ रुपये के कर्ज के पर्याप्त दस्तावेज नहीं हैं। अभी यह साफ नहीं है कि कर्जदाता बैंकों और म्युचुअल फंड हाउस ने यह कर्ज बेच दिया या अभी भी उसकी वसूली बाकी है। 
3. कंपनी का बाजार पूंजीकरण भी तिमाही घाटे से 625 करोड़ रुपये कम होकर 1522 करोड़ रुपये रह गया है। पिछल दो दिनों में उसके शेयर 40 प्रतिशत तक नीचे आ गए हैं। इक्विटी निवेशकों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। 
4. डीएचएफएल को यकीन था कि वह लगातार लघु अवधि की उधारी को आगे बढ़ाते रहेंगे। इससे उन्होंने कई जोखिम भरे परिसंपत्तियों में निवेश किया, लेकिन रियल एस्टेट की सुस्ती से उसके इरादों पर पानी फिर गया।

रिजर्व बैंक के अधिकार बढ़ाएगी सरकार
गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के संकट को देखते हुए सरकार ने उन पर निगरानी का रिजर्व बैंक का अधिकार बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही एनबीएफसी को दिए गए कर्ज पर दस फीसदी नुकसान की गारंटी भी देने का फैसला किया है। 

1. आईएलएफएस मामले में पीएफ पर आया था संकट
200 से ज्यादा कंपनियों के समूह वाली आईएलएफएस में गंभीर अनियमितता और धोखाधड़ी का पता पिछले साल अगस्त में चला था। उस पर 90 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज था। इसकी कंपनियों में तमाम म्युचुअल फंड हाउस और ईपीएफओ ने भी पैसा लगा रखा था। इससे छोटे निवेशकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा और 15 लाख पीएफ कर्मियों के पीएफ जमा पर भी संकट आ गया।

2. इंडियाबुल्स को लगा था झटका
पूंजी की कमी के संकट से जूझ रही इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस को भी जून में तब झटका लगा था, जब उस पर 98 हजार करोड़ रुपये की जनता की पूंजी के गबन का आरोप लगा। हालांकि बाद में ये आरोप वापस ले लिए गए। कंपनी पर करीब 80 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है और ऋण चुकाने को उसने अपने रियल एस्टेट कारोबार को 2700 करोड़ रुपये में बेच दिया है।

अहम बातें
* 2224 करोड़ रुपये का घाटा हुआ चौथी तिमाही में 
30 % नीचे आया शेयर भारी नुकसान के बाद
01 लाख करोड़ रुपये से ऊपर हो सकती है कुल देनदारी
41 हजार 800 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया नौ माह में

डीएचएफएल का नफा नुकसान
2017-18 : 1240 करोड़ का लाभ
2018-19 : 1036 करोड़ का घाटा

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  • Web Title:DHFL Debt Crisis Govt Proposed RBI Rights To be Increased