आरबीआई ने दी राहत फिर भी बैंक नहीं दे रहे सस्ता लोन
मुख्य बातें
- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ब्याज दरों में 250 आधार अंकों की जोरदार कटौती फरवरी, 2019 से अब तक की है
- बैंकों ने इसका पूरा फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचाया है
- बैंकों ने बीते एक साल में होम लोन पर..
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ब्याज दरों में 250 आधार अंकों की जोरदार कटौती फरवरी, 2019 से अब तक की है। बैंकों ने इसका पूरा फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचाया है। बैंकों ने बीते एक साल में होम लोन पर करीब 1.3% फीसदी ही ब्याज दर में कटौती की है। वहीं, बिजनेस लोन पर करीब 1.15% की कटौती की है। कार, पर्सनल लोन सहित दूसरे लोन पर बैंकों ने पूरा लाभ ग्राहकों को नहीं दिया है।
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अगर आरबीआई की ओर से की गई कटौती के अनुपात में बैंकों द्वारा लोन पर ब्याज में कमी को देखे तो यह बहुत ही कम है। आरबीआई ने फरवरी, 2019 से मई, 2020 तक रेपो रेट में 250 आधार अंकों की कटौती है। रेपो रेट वह रेट होता है जिसपर बैंक आरबीआई से कर्ज लेते हैं। यानी बैंकों को आरबीआई से कर्ज लेना काफी सस्ता हुआ है। वहीं, बैंकों की ओर से की गई कटौती पर नजर डालें तो एक साल पहले होम लोन पर निजी बैंक 8.8% की दर से ब्याज वसूल रहे थे जो अब घटकर 7.5% हुआ है।
जमा पर ब्याज घटाने से दोहरा नुकसान
बैंको ने एक ओर आरबीआई की ओर से की गई कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों को नहीं दिया वहीं दूसरी ओर ब्याज दरों में कटौती करके एफडी में निवश करने वालों को दोहरा नुकसान दे दिया। बैंकों ने फरवरी से लेकर मार्च 2020 तक एफडी पर मिल रहे ब्याज दरों में 0.52 फीसद तक कटौती कर दी है। इससे निवेशकों को काफी नुकसान हुआ है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है बैंकों को ब्याज दर घटाना ही पड़ेगा ताकि बाजार में कर्ज लेने का माहौल तैयार हो सके। कार लोन, होम लोन सस्ता होने से अर्थव्यवस्था का पहिया घूमेगा।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


