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बिजनेसदिल्ली हाई कोर्ट ने फ्यूचर ग्रुप के किशोर बियानी से पूछा, क्यों न उन्हें 3 माह के लिए जेल में रखा जाए

एजेंसी,नई दिल्लीPublished By: Drigraj Madheshia
Fri, 19 Mar 2021 10:39 AM
दिल्ली हाई कोर्ट ने फ्यूचर ग्रुप के किशोर बियानी से पूछा, क्यों न उन्हें 3 माह के लिए जेल में रखा जाए

दिल्ली हाईकोर्ट ने फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के साथ कंपनी के कारोबार को बेचने के 24,713 करोड़ रुपये के सौदे पर अंतरिम रोक लगाने के सिंगापुर की आपातकालीन मध्यस्थता (ईए) अदालत के फैसले को को बरकरार रखा। उच्च न्यायालय ने किशोर बियानी से यह भी सवाल किया है कि आपातकालीन मध्यस्थ के आदेश का उल्लंघन करने पर क्यों न उन्हें तीन माह के लिए जेल में हिरासत में रखा जाए। उनसे दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। 

अमेरिकी ई-कामर्स कंपनी अमेजन फ्यूचर समूह की एक गैर सूचीबद्ध कंपनी में निवेश के एक पुराने समझौते के आधार पर अपने हक के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध कर रही है।  न्यायमूर्ति जे आर मिधा ने किशोर बियानी के नेतृत्व वाली कंपनी एफआरएल को निर्देश दिया है कि वह इस सौदे को लेकर अभी आगे कोई और कदम नहीं उठाए।  उन्होंने साथ में यह भी टिप्पणी की कि फ्यूचर समूह ने सिंगापुर मध्यस्थता अदालत के आदेश का जानबूझ कर उल्लंघन किया है। 

20 लाख रुपये का हर्जाना 

उच्च न्यायालय ने फयूचर समूह द्वारा उठाई गई सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया और उस पर और उसके निदेशकों को 20 लाख रुपये का हर्जाना लगा दिया।  न्यायालय ने फ्यूचर समूह और उनके निदेशकों को प्रधानमंत्री राहत कोष में दो सप्ताह के भीतर 20 लाख रुपये जमा कराने का निर्देश दिया। कोष का इस्तेमाल दिल्ली में गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) श्रेणी के वरिष्ठ नागरिकों को कोविड- 19 का टीका उपलब्ध कराने के लिए किया जा रहा है। अदालत का 134 पृष्ट का यह फैसला अमेजन की याचिका पर आया है। इस याचिका में उसने न्यायालय से सिंगापुर के आपातकालीन मध्यस्थ के 25 अक्टूबर 2020 के फैसले को अमल में लाने का आदेश देने का आग्रह किया है। मध्यस्थ ने एफआरएल समूह को रिलायंस रिटेल के साथ 24,713 करोड़ रुपये के सौदे में आगे बढ़ने से रुकने को कहा था। 

28 अप्रैल को कोर्ट में हाजिर रहें बियानी

फ्यूचर समूह और अमेरिका का अमेजन समूह फ्यूचर रिटेल सौदे को लेकर विवाद में उलझे हुए हैं। फ्यूचर समूह ने अपने रिटेले कारोबार का सौदा रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ किया है, जिस पर अमेजन एतराज किया और वह मामले को सिंगापुर के अंतराष्ट्रीय मध्यस्थ निर्णय केंद्र की एक आपातकालीन मध्यस्थ पीठ के समक्ष ले गई। उसका आरोप है कि फ्यूचर ने उसके साथ अनुबंध को तोड़ा है। अदालत ने बियानी और अन्य को 28 अप्रैल की तारीख पर हाजिर रहने का भी निर्देश दिया है और उनकी संपत्तियों की कुर्की को भी कहा है। उनसे आज की तारीख तक उनकी संपत्ति का ब्यौरा देते हुए हलफनामा देने को भी कहा है। 

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अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अप्रैल की तारीख तय की है और अपने आदेश के अनुपालन की जानकारी देने को कहा है। उसने कहा कि आपातकालीन मध्यस्थ वास्तव में मध्यस्थ ही होता है और उसने फ्यूचर समूह कंपनियों के मामले में 'ग्रुप आफ कंपनीज के सिद्धांत को आधार बना कर ठीक ही किया है। अदालत ने कहा कि प्रतिवादी ने फैसले को अमान्य करार दिए जाने की एक अस्पष्ट याचिका डाली, लेकिन उसको सिद्ध नहीं किया । यह सब उसने न्यायालय को भ्रमित करने के लिए किया। अदालत ने फ्यूचर समूह को यह निर्देश भी दिया है कि वह उन प्राधिकरणों के पास जा कर जिन्होंने एफआरएल- रिलायंस सौदे को दी गयी मंजूरी वापस लेने और सिंगापुर के मध्यस्थ फोरम के 25 अक्टूबर के आदेश का उल्लंघन नहीं करने को कहे। 

अमेजन ने खंड-पीठ के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है

अदालत ने फ्यूचर समूह से यह भी कहा है कि वह रिलायंस सौदे से जुड़े 25 अक्टूबर 2020 के बाद उठये गये कदमों के बारे में भी ब्यौरा रिकार्ड में लाये।  अमेजन ने अपनी अंतरिम याचिका में एफआरएल को मुकेश धीरुभाई अंबानी समूह की इकाई के साथ प्रस्तावित सौदे को पूरा करने की दिशा में कदम उठाने से रोकने का आग्रह किया है। न्यायमूर्ति मिधा ने इससे पहले एक अंतरिम आदेश में एफआरएल को रिलायंस सौदे के मामले में यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया था। लेकिन उच्च न्यायालय की खंड-पीठ ने उस पर रोक लगादी। 

अमेजन ने खंड-पीठ के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है और वह यह याचिका फिलहाज लंबित है। फ्यूचर ने आरआईएल को अपना खुदरा स्टोर और थोक कारोबार तथा लाजिस्टिक्स एवं भंडारण सुविधाओं को आरआईएल को बेचने का करार पिछले साथ अगस्त में किया था। सिंगापुर के मथ्यस्थ निर्णय फोरम के स्थगन आदेश के बाद अमेजान ने सेबी, शेयर बाजारों और प्रतिस्पर्धा आयोग को मध्यस्थ के निर्णय को ध्यान में रखने के लिए लिखा था।

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