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3 दिसंबर, 2020|1:19|IST

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लंबी अवधि का कर्ज लेने से घबरा रहे ग्राहक, खर्च नहीं बचत कर रहे हैं लोग

those who are working in the informal sector will be eligible to get a home loan ranging from    2 lak

लॉकडाउन में लगातार ढील मिलने से भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार में थोड़ी तेजी आई है। इसका असर मांग, निर्यात, उत्पादन और नौकरियों के अवसर में दिखाई दे रहा है। हालांकि, अभी भी लंबी अवधि की कर्ज की मांग की रफ्तार बहुत धीमी है। घर-कार खरीदने के लिए लोन की मांग बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रही है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने इस पर चिंता जताते जताया है। उन्होंने कहा कि यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत नहीं है। अगर यह रुझान आगे बना रहा हो तो अर्थव्यवस्था को जल्द पटरी पर लाना मुश्किल होगा।

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विश्लेषकों को चिंता की वजह

लंबी अवधि के कर्ज की मांग नहीं बढ़ने पर विश्लेषकों ने चिंता क्यों जताई है? इसकी वजह यह है कि अगस्त और उसके पहले के महीने में घर-कार खरीदने के लिए लोन की मांग बढ़ने की रफ्तार बहुत ही धीमी रही है। वहीं, छोटी अवधि के लोन जैसे क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन, गोल्ड लोन और जमा में वृद्धि दर्ज की गई है। सामान्य हालात में छोटी अवधि के लोन विवेकाधीन (जरूरी) खर्च को पूरा करने के लिए होते हैं लेकिन कोरोना संकट के बीच अधिकांश लोन आपातकालीन प्रयोजन में इस्तेमाल हुए हैं। यह दर्शाता है कि मध्यमवर्गीय परिवारों पर वित्तीय संकट बढ़ा है।

अर्थव्यवस्था की तस्वीर साफ नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना और लॉकडाउन से भारतीय अर्थव्यवस्था बुरी तरह तबाह हुई है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में करीब 24 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। अनलॉक-5 शुरू होने के बाद भी अर्थव्यवस्था की रफ्तार उम्मीद के अनुरूप तेज नहीं हुई है। वहीं, कोरोना और लॉकडाउन के कारण बेरोजगार और वेतन कटौती का सामना कर रहे लोग अपने भविष्य को लेकर डरे हुए हैं। ऐसे में वह जोखिम लेने को बिल्कुल तैयार नहीं है। इससे लंबी अवधि के लोन की मांग नहीं बढ़ रही है। जब तक अर्थव्यवस्था को लेकर तस्वीर साफ नहीं होगी, सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती है।

खर्च नहीं बचत कर रहे हैं लोग

कोरोना संकट के कारण लोग कम से कम खर्च और अधिक से अधिक बचत कर रहे हैं। इसका असर बैंक जमा पर देखने को मिला है। लॉकडाउन के शुरुआत से अब तक बैंक जमा में 1.22 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। यह दर्शाता है कि लोग खर्च से ज्यादा बचत पर जोर दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अच्छे संकेत नहीं है। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए खर्च को बढ़ाना बहुत जरूरी है। खर्च बढ़ने से ही मांग बढ़ेगी जो अर्थव्यवस्था में रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद करेगा लेकिन अभी ठीक इसके उल्टा हो रहा है। ऐसे में बाजार में मांग बढ़ाना मुश्किल होगा। सरकार को इस गंभीर विषय पर फौरी तरीके से रणनीति बनाने की जरूरत है।

बैंकों के ऋण की वृद्धि दर गिरी

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, बैंकों के गैर-खाद्य ऋण (नॉन फूड बैंक क्रेडिट) की वृद्धि दर इस साल अगस्त में कम होकर छह प्रतिशत पर आ गाई। साल भर पहले यानी अगस्त 2019 में इसकी वृद्धि दर 9.8 प्रतिशत थी। आंकड़ों के अनुसार, 28 अगस्त तक गैर-खाद्य ऋण 90.46 लाख करोड़ रुपये था। रिजर्व बैंक ने कहा, अगस्त 2020 में कृषि व संबद्ध क्षेत्रों का ऋण 4.9 प्रतिशत बढ़ा, जो अगस्त 2019 में 6.8 प्रतिशत बढ़ा था। इस दौरान उद्योगों को दिए गए ऋण की वृद्धि दर साल भर पहले के 3.9 प्रतिशत की तुलना में कम होकर 0.5 प्रतिशत पर आ गई। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2020 में सेवा क्षेत्र की ऋण वृद्धि घटकर 8.6 प्रतिशत रह गई जो पिछले साल इसी महीने में 13.3 प्रतिशत थी। व्यक्तिगत ऋणों ने अच्छा प्रदर्शन जारी रखा। इसने अगस्त 2019 में 15.6 प्रतिशत विस्तार की तुलना में 10.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।

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  • Web Title:Customers are scared of taking long term loans people are saving not spending