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11 अगस्त, 2020|6:02|IST

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'कोरोना से मार्च 2022 तक कंपनियों का 1.67 करोड़ रुपए का कर्ज बढ़ा सकती है बैंकों की चिंता'

indian rupees   pti file photo

कोविड- 19 महामारी के आर्थिक प्रभाव के चलते शीर्ष- 500 कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज में से 1.67 लाख करोड़ रुपए का ऋण मार्च 2022 तक बैंकों की चिंता बढ़ा सकता है। कंपनियां समय पर कर्ज चुकाने से पीछे रह सकती हैं और यह फंसे ऋण की श्रेणी में आ सकता है। सोमवार (6 जुलाई) को जारी एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। इंडिया रेटिंग्स एण्ड रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस राशि को मिलाकर ऐसे फंसे कर्ज की कुल राशि 4.21 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है जो कि कुल कर्ज का 11 प्रतिशत होगी।

इस साल की शुरुआत में जब कोरोना वायरस फैलना शुरू हुआ उस समय भी बैंकों के कर्ज की स्थिति उसकी गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त की जाती रही थी। रिजर्व बैंक ने कोविड- 19 के अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभाव को देखते हुए विभिन्न कर्जों के भुगतान पर अगस्त 2020 तक के लिए छूट दे दी जो कि दबाव को बढ़ायेगा। सरकार ने महामारी के आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए 21 लाख करोड़ रुपए का प्रोत्साहन पैकेज भी घोषित किया है।

रेटिंग एजेंसी का मानना है कि महामारी और इसके साथ ही अन्य नीतिगत कदमों से शीर्ष 500 कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज में से 1.67 लाख करोड़ रुपए का कर्ज बैंकों के लिए अतिरिक्त दबाव वाला साबित हो सकता है। एजेंसी ने कहा है कि महामारी की शुरुआत के समय उसने मार्च 2022 तक 2.54 लाख करोड रुपए के कर्ज के फंसे ऋण में परिवर्तित होने का अनुमान लगाया था। अब 1.67 लाख करोड़ रुपए के अतिरिक्त कर्ज के इसमें परिवर्तित होने से यह आंकड़ा कुल 4.21 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।

यह समूचे कंपनी क्षेत्र के कुल कर्ज का 18.21 प्रतिशत तक होगा। यह आंकड़ा वर्तमान में दबाव वाला माने जाने वाले 11.57 प्रतिशत के आंकड़े से ऊंचा है। एजेंसी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि आने वाले समय में पुनर्वित का दबाव बढ़ सकता है और कंपनियों के लिए समय पर वित्तीय संसाधन जुटाना लगातार चुनौतीपूर्ण बना रह सकता है।

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  • Web Title:Coronavirus pandemic to add Rs 167K Cr to corporate delinquencies by FY22