कोरोना से थे परेशान, आम-लीची ऑनलाइन लेकर आ गए किसान, जानें भागलपुर के जर्दालु आम का ऑनलाइन दाम
मुख्य बातें
- कोरोना की आपदा को अवसर में बदलकर ऑनलाइन कामकाज बड़ी-बड़ी कंपनियों में ही नहीं हो रहा, किसानों ने भी डिजिटल ढांचे को अपना लिया है
- बदलते भारत की यह बयार गांवों तक पहुंच गई है
- यूपी में उन्नाव, मलिहाबाद..
कोरोना की आपदा को अवसर में बदलकर ऑनलाइन कामकाज बड़ी-बड़ी कंपनियों में ही नहीं हो रहा, किसानों ने भी डिजिटल ढांचे को अपना लिया है। बदलते भारत की यह बयार गांवों तक पहुंच गई है। यूपी में उन्नाव, मलिहाबाद और बिहार के भागलपुर के किसान लॉकडाउन की दुश्वारियों को पीछे छोड़ न केवल आमों का ऑनलाइन सौदा कर रहे हैं, बल्कि बिचौलियों को हटाकर अच्छी कमाई भी कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर की मशहूर लीची की भी डाक विभाग के जरिये ऑनलाइन आपूर्ति की तैयारी हो रही है।
18 से 26 रुपये किलो से सौदा
व्यापारियों ने तय किया है कि आम सौ ग्राम तक होगा तो 18 रुपये किलो, 100 से 125 ग्राम का दाम 22 रुपये और 125 ग्राम से ऊपर के आम का दाम 26 रुपये प्रति किलो होगा। टैक्स हटने से दोहरा फायदा प्रशासन ने ढाई फीसदी का मंडी शुल्क भी हटा दिया है। एसडीएम हसनगंज प्रदीप वर्मा ने कहा कि ऑनलाइन कारोबार के साथ टैक्स न लगने से किसानों को दोहरा फायदा हो रहा है।
सौदों में आई तेजी
पीलखाना रसीदपुर के रहने वाले 10 बीघे आम के काश्तकार महादेव पाल के बेटे विष्णु पाल ने 22 रुपये की दर से आठ टन आम का सौदा किया है। गुरु चरण के बेटे राजेश ने 25 टन आम का सौदा 23.5 रुपये प्रति किलो के हिसाब से किया। आदमपुर के 15 बीघे के किसान हुसैनी के पुत्र समसूद ने भी 10 टन आम साढ़े 21 रुपये की दर से किया।
- 70 रुपये प्रति किलो में भागलपुर का जर्दालु आम ग्राहकों तक पहुंचेगा
- 1.54 लाख मीट्रिक टन आम का वार्षिक उत्पादन उत्तराखंड में
- 2.18 लाख मीट्रिक टन आम की पैदावार का अनुमान उन्नाव में
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


