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14 अक्तूबर, 2020|8:48|IST

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सीएनजी-पीएनजी 25 फीसदी तक सस्ता होने की उम्मीद

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सरकार ने एक अक्तूबर से शुरू होने वाली अगली छमाही के लिए प्राकृतिक गैस का दाम 25 प्रतिशत घटाकर 1.79 डालर प्रति दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमबीटीयू) तय किया है। सीएनजी-पीएनजी में प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल होता है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही पीएनजी-सीएनजी भी सस्ती होगी।

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस उत्पादक कंपनी ओएनजीसी और आयल इंडिया के नामांकन आधार पर उन्हें दिए गए क्षेत्रों से निकलने वाली प्राकृतिक गैस का दाम एक अक्टूबर से अगले छह माह के लिएअब 1.79 डॉलर प्रति एमबीटीयू होगा। एक सरकारी आदेश में यह कहा गया है। आदेश में कहा गया है कि इसके साथ ही मुश्किल गहरे समुद्री क्षेत्रों से निकलने वाली गैस का दाम भी 5.61 डालर से घटाकर 4.06 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू कर दिया गया है।

प्रमुख गैस उत्पादक कंपनियों को राजस्व का नुकसान

प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बिजली घरों, उर्वरक कारखानों और वाहनों के लिए सीएनजी बनाने में किया जाता है। गैस के दाम रिकार्ड निचले स्तर पर पहुंचने से जहां एक तरफ ओएनजीसी और आयल इंडिया जैसे प्रमुख गैस उत्पादक कंपनियों को राजस्व का नुकसान होगा, वहीं दूसरी तरफ बिजल कारखानों की उत्पादन लागत कम होगी। सीएनजी और पाइप के जरिये घरों में पहुंचने वाली प्राकृतिक गैस के दाम कम होंगे। 

ओएनजीसी सूत्रों ने कहा कि 2017- 18 में गैस कारोबार में उसे 4,272 करोड़ रुपये का घाटा हुआ जो कि चालू वित्त वर्ष के दौरान 6,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाने का अनुमान है। सरकार ने नवंबर 2014 में प्राकृतिक गैस का दाम तय करने का नया फार्मूला तय किया। यह फार्मूला उन देशों के प्रचलित दाम पर आधारित है, जहां गैस का उत्पादन उनकी जरूरत से ज्यादा होता है। इस फार्मूले पर अमल के बाद से ही ओएनजीसी को उसके 6.50 करोड़ घनमीटर प्रतिदिन गैस उत्पादन पर घाटा उठाना पड़ा है। 

सूत्रों ने बताया कि ओएनजीसी ने हाल में सरकार को भेजे एक संदेश में कहा है कि नये क्षेत्रों से गैस उत्पादन की लागत 5 से 9 डालर प्रति एमबीटीयू के बीच पड़ती है। सूत्रों ने कहा कि पिछले साल कंपनी के गैस कारोबार से हुये घाटे की भरपाई कचचे तेल के कारोबार से हो गई लेकिन इस साल कच्चे तेल के दाम भी पहले से ही भारी दबाव में चल रहे हैं। इससे कंपनी के लिये उसकी परिचालन लागत को पूरा करना भी मुश्किल होगा। 

2014 में आया था गैस मूल्य निर्धारण का नया फार्मूला

भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने 2014 में गैस मूल्य निर्धारण का नया फार्मूला तय किया था, उसकी के आधार पर हर छह महीने में दाम की समीक्षा की जाती है। उससे पहले कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने मई 2010 में बिजली और उर्वरक कारखनों को बेची जाने वाली गैस का दाम 1.79 डालर से बढ़ाकर 4.20 डालर प्रति एमबीटीयू कर दिया था। संप्रग सरकार ने 2014 में लागू करने के लिए एक नये फार्मूले को मंजूरी दी लेकिन राजग ने सत्ता में आने पर इसे खारिज कर दिया। 

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वहीं आज महीने के पहले दिन डीजल के दामों में करीब 10 पैसे की कमी आई है। हालांकि, पेट्रोल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ। गुरुवार को दिल्ली में पेट्रोल का भाव 81.06 रुपये और डीजल का भाव 70.53 रुपये प्रति लीटर रहा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने अक्टूबर महीने की गैस की कीमत जारी कर दी है। अगस्त-सितंबर लगातार तीसरे महीने रसोई गैस सिलेंडर (LPG Gas Cylinder) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस महीने तेल कंपनियों (HPCL, BPCL, IOC) ने बिना सब्सिडी वाले गैस 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की कीमत 594 रुपये पर स्थिर रखी है। अन्य शहरों में भी घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, कमर्शियल सिलेंडर के दाम में 32 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। 

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