भारत के चौतरफा हमले से तिलमिलाया चीन, अब उसके चोर दरवाजे बंद करने की तैयारी

नई दिल्ली। एजेंसी,
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मुख्य बातें

  • सीमा पर जारी तनाव के बीच भारत ने चीन के उत्पादों के आयात पर पाबंदी लगाने की कवावद तेज कर दी है
  • सूत्रों के मुताबिक केन्द्र सरकार इसके तहत मुक्त व्यापार समझौता और द्विपक्षीय समझौते के हिसाब से सामानों..

भारत के चौतरफा हमले से तिलमिलाया चीन, अब उसके चोर दरवाजे बंद करने की तैयारी

सीमा पर जारी तनाव के बीच भारत ने चीन के उत्पादों के आयात पर पाबंदी लगाने की कवावद तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक केन्द्र सरकार इसके तहत मुक्त व्यापार समझौता और द्विपक्षीय समझौते के हिसाब से सामानों की सूची तैयार कर रही है। इसके साथ ही उन सामान की भी सूची तैयार की जा रही है जिसमें इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के हिसाब से असर पड़ा हो। सरकार को आशंका है कि चीन वियतनाम और अन्य दूसरे देशों के जरिये भी अपना सस्ता सामान भारतीय बाजार में बेच रहा है। पिछले दिनों सरकार ने उद्योग जगत से चीन के उत्पादों की सूची भी सोमवार तक देने को कहा है।

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दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन (आसियान) के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता है। इसमें वियतनाम और सिंगापुर जैसे राष्ट्रों से भारत के बेहद अच्छे संबंध है। यहां के उत्पादों पर भारत में ज्यादा सख्ती नहीं है। सूत्रों का कहना है कि सरकार को आशंका है कि इन देशों में स्थित अपनी कंपनियों के जरिये चीन भारत में अपने सस्ते और खराब गुणवत्ता के सामान बेच रहा है।

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वियतनाम में चीन द्वारा हाल के वर्षों के किए गए भारी-भरकम निवेश को भी अब शक की नजर से देखा जा रहा है। इसके मद्देनजर सरकार अब आसियान देशों के उत्पादों पर भी शुल्क ढांचे में बदलाव और सुधार की गुंजाइश पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक  पिछले दिनों प्रधानमंत्री कार्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इसमें आत्मनिर्भर भारत अभियान को लेकर चर्चा की गई थी। इसके बाद उद्योग से चीनी सामानों के आयात की सूची मांगी गई है।

आसियान के जरिये भारतीय बाजार में पैठ 

आसियान में सिंगापुर,ताइवान और इंडोनेशिया समेत 10 सदस्य हैं। इन देशों के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता है। इसकी वजह से यहां से भारत आने वाले उत्पादों पर ज्यादा सख्ती नहीं होती है। चीन इन देशों में अपनी स्थित अपनी कंपनियों के जरिये भारत में सस्ते उत्पाद बेचने की कोशिश कर रहा है।

ताइवान में चीन का बड़ा निवेश

हाल के वर्षों में चीन ने ताइवान में भारी-भरकम निवेश किया है। आसियान का सदस्य होने के नाते ताइवान के उत्पाद पर भारत में रोक-टोक नहीं है। इस तरह चीन ताइवान के जरिये भारतीय बाजार में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश में लगा हुआ है। सरकार की नजर अब ताइवान से आने वाले उत्पादों पर भी है।

उत्पाद कहीं कच्चे माल से भी सस्ता तो नहीं

चीन अपने निर्माताओं को शुल्क में भारी-भरकम सहायता देने के लिए जाना जाता है। इससे उसके उत्पाद सस्ते हो जाते हैं। भारत में सरकार अब इस बात की पड़ताल करने में जुट गई है कि कहीं चीन से आने वाले उत्पाद सस्ते माले से भी कम कीमत पर तो नहीं बिक रहे।

चीन में बांग्लादेश के 97 फीसदी उत्पादों  को छूट

पिछले दिनों चीन ने बांग्लादेश के 97 फीसदी उत्पादों पर से टैक्स हटाने की घोषणा की है। इसके तहत मछली और चमड़े के उत्पादों सहित 97 फीसदी वस्तुओं को चीन शुल्क से मुक्त रखेगा। भारत और बांग्लादेश अहम मित्र और करीबी व्यापारिक साझेदार रहे हैं। ऐसे में चीन की बांग्लादेश की इस पेशकश को  विशेषज्ञ शक की नजर से देख रहे हैं।

भारत के चौतरफा हमले से तिलमिलाया चीन

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संकट दौर में भारत ने बिना किसी शर्त के अमेरिका और यूरोप समेत एशिया के कई देशों को कोरोना में काम आने वाली हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा देकर वैश्विक स्तर पर अपना कद बढ़ा लिया। साथ ही चीन से निकलने वाली कंपनियों को भारत में निवेश के लिए न्यौता देने से भी चीन को अपना भविष्य असुरक्षित नजर आ रहा है। ऐसे में वह भारत के पड़ोसी देशों के साथ आसियान देशों के जरिये व्यापारिक चोट पहुंचाने की कोशिश में लग गया है।

Drigraj Madheshia

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Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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