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ITR में फिर बदलाव, ब्याज का देना होगा अलग-अलग हिसाब

ITR

इनकम टैक्स रिटर्न की आखिरी तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त करने के बाद आयकर विभाग ने रिटर्न के ई-संस्करण में फिर से कुछ बदलाव कर दिए हैं। ये बदलाव बिना किसी नोटिफिकेशन के किए गए, जिसकी भनक किसी को नहीं लगी। आईटीआर में मात्र 20 दिन शेष रह गए हैं और बार-बार हो रहे बदलावों से करदाताओं को परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।

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वरिष्ठ कर सलाहकार संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि वेतनभोगी करदाताओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्म आईटीआर-1 और आईटीआर-2 के इलेक्ट्रॉनिक वर्जन को एक अगस्त और नौ अगस्त को बदल दिया गया। ऐन वक्त पर किए जा रहे संशोधनों की वजह से पूरा डाटा दोबारा फीड करना पड़ रहा है और आखिरी समय में अतिरिक्त मांगी गई जानकारियां जुटाने में कवायद करना पड़ रही है।

उन्होंने बताया कि ताजा बदलावों में 'अन्य स्रोतों से आमदनी' के तहत करयोग्य आय के संबंध में अतिरिक्त जानकारियां मांगी जा रही हैं। करदाताओं को बैंक के बचत खाते से ब्याज, टर्म डिपॉजिट, इनकम टैक्स रिफंड पर ब्याज और दूसरे ब्याज को अलग-अलग दिखाने के लिए कहा गया है। कॉरपोरेट करदाताओं के इस्तेमाल वाले आईटीआर-7 सहित सभी आईटीआर फॉर्म में कई बदलाव किए जा चुके हैं। पांच अप्रैल को जारी नोटिफिकेशन के बाद कुछ मामलों में चार बार तक बदलाव हो चुके हैं।

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संतोष गुप्ता ने बताया कि मैनुअल फॉर्म बदलने के लिए नोटिफिकेशन अनिवार्य है लेकिन इलेक्ट्रॉनिक वर्जन में ऐसा नहीं है इसलिए उसे अक्सर बदल दिया जाता है। चूंकि अधिकतर मामलों में ई-फाइलिंग अनिवार्य है इसलिए अधिकांश करदाता इस बदलाव की जद में आते हैं। सिद्धांत: ये ठीक नहीं है कि 31 जुलाई तक रिटर्न भरने वालों से जानकारियां नहीं मांगी गईं और इसके बाद रिटर्न फाइल करने वालों से तमाम नए सवाल पूछे जा रहे हैं। दरअसल बैंक खातों से मिले ब्याज की जानकारी तो आसानी से मिल जाती है लेकिन बहुत से लोग आईटी रिफंड पर ब्याज की जानकारी नहीं दे पाते। आमतौर पर इसे नजरअंदाज कर दिया जाता था।

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