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अप्रैल से अक्टूबर के बीच बढ़ा राजकोषीय घाटा, ₹7.50 लाख करोड़ को किया पार

पिछले साल अप्रैल से अक्टूबर तक राजकोषीय घाटा लक्ष्य का 36.3% था। वहीं, अप्रैल से सितंबर की अवधि में, राजकोषीय घाटा बढ़कर ₹6.20 लाख करोड़ तक पहुंच गया था, जो वार्षिक अनुमान का 37.3% था।

अप्रैल से अक्टूबर के बीच बढ़ा राजकोषीय घाटा, ₹7.50 लाख करोड़ को किया पार
Deepak Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 30 Nov 2022 05:34 PM

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देश का फिक्सल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) अप्रैल से अक्टूबर के बीच बढ़कर 7.58 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह पूरे साल के लक्ष्य का 45.6% था। वित्त वर्ष 2022-23 के लिए सरकार का राजकोषीय घाटा 16.61 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी का 6.4% रहने का अनुमान है। पिछले साल अप्रैल से अक्टूबर तक राजकोषीय घाटा लक्ष्य का 36.3% था। वहीं, अप्रैल से सितंबर की अवधि में, राजकोषीय घाटा बढ़कर ₹6.20 लाख करोड़ तक पहुंच गया था, जो वार्षिक अनुमान का 37.3% था।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक नेट टैक्स कलेक्शन बढ़कर 11.71 लाख करोड़ रुपये हो गईं, जबकि कुल खर्च 21.44 लाख करोड़ रुपये हो गया। बता दें कि सरकार के व्यय और राजस्व का अंतर यानी राजकोषीय घाटा कहलाता है। 

कोर सेक्टर में सुस्ती: देश के आठ कोर सेक्टर की वृद्धि दर अक्टूबर महीने में सुस्त पड़कर 0.1 प्रतिशत रही है। आंकड़ों के मुताबिक एक साल पहले इसी महीने में कोर सेक्टर की वृद्धि दर 8.7 प्रतिशत थी। वहीं पिछले महीने सितंबर में कोर सेक्टर की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही थी। कोर सेक्टर में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पादों, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली शामिल है। 

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