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खरीदारों को घर में रहने के बाद भुगतान करने का विकल्प दे रहे हैं बिल्डर

रियल एस्टेट सेक्टर लंबे समय से सुस्ती की चपेट में है। इसके चलते बिल्डरों पर बिना बिके फ्लैटों का बोझ बढ़ा है। बिल्डर इससे निकलने के लिए नई पेशकश ले कर आए हैं। इसके तहत बिल्डर घर खरीदारों को पहले फ्लैट में शिफ्ट करने और बाद में भुगतान का विकल्प दे रहे हैं। इस नई पेशकश के तहत खरीदारों को अग्रिम भुगतान (डाउन पेमेंट) के तौर पर बिल्डर को एक रकम देनी होती है। उसके बाद घर खरीदारी फ्लैट में शिफ्ट कर जाते हैं, लेकिन होम लोन की ईएमाअई एक या दो साल बाद शुरू होती है। 

पहले सिर्फ निर्माणाधीन घरों में ही यह स्कीम 
पहले खरीदें और बाद में भुगतान (बाई नाऊ, पै लैटर) स्कीम निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में घर खरीदने वाले खरीदारों को ही पेशकश की जाती थी। लेकिन, निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में घर तय समय पर नहीं मिलने से घर खरीदारों को यह विकल्प पसंद नहीं आया। इसकी वजह निमार्णाधीन प्रोजेक्ट में घर बुक करने पर बिल्डर एक या दो साल तक ईएमाअई खुद वहन करने की बात करते थे। उसके बाद ईएमआई खरीदार को देना होता था। लेकिन प्रोजेक्ट समय पर नहीं मिलने से घर नहीं मिलने पर भी खरीदार को ईएमाआई चुकाना होता था। इसको देखते हुए अब बिल्डर यह पेशकश 'बन कर तैयार घर' (रेडी टू मूव) में कर रहे हैं।

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महंगे फ्लैट बेचने की कोशिश 
प्रॉपर्टी बाजार में सुस्ती का सबसे अधिक असर लग्जुरियस प्रोजेक्ट (महंगे फ्लैट) पर हुआ है। प्रॉपर्टी बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि महंगे फ्लैट की बिक्री घटने से बिल्डर नकदी संकट से जूझ रहे हैं। इसके पार पाने के लिए बिल्डर पहले शिफ्ट और बाद में भुगतानक का विकल्प दे रहे हैं।  दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगुलुरु, जैसे शहरों में जहां फ्लैट की कीमत करोड़ में है, वहां पर इस तरह की पेशकश बिल्डर कर रहे हैं। 

सिर्फ 10 फीसदी भुगतान का विकल्प 
मुंबई स्थित शेथ क्रिएटर्स अपने कई तैयार प्रोजेक्टों में कुल फ्लैट की कीमत का 10 फीसदी भुगतान कर रहने का विकल्प दे रहा है। मुंबई के मारोल एरिया में वसंत ओएसिस में फ्लैट की कीमत 2.3 करोड़ से अधिक है। बिल्डर इसमें 10 फीसदी अग्रिम भुगतान पर रहने का विकल्प दे रहा है। इसके तहत होम लोन की ईएमआई एक साल तक बिल्डर भुगतान करेगा। एक साल के बाद घर खरीदार को ईएमआई का भुगतान करना होगा।

बिना बिके फ्लैट की संख्या 4.5 लाख से अधिक 
संपत्ति सलाहकार कंपनी नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट के अनुसार, देश के आठ शीर्ष शहरों में बिना बिके फ्लैट की संख्या 450,263 थी।  वहीं मुंबई में जनवरी से जून के दौरान बिना बिके फ्लैट की संख्या में 14 फीसदी का इजाफा देखने को मिला। नाइट फ्रैंक के कार्यकारी निदेशक, गुलाम जिया ने बताया कि इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम निर्माणाधीन फ्लैट में पहले से चला आ रहा है। अब यह बन कर तैयार घर में भी आ गया है। इसकी वजह बिल्डर अपने बिना बिके फ्लैट को जल्द से जल्द बेचना चाहते हैं। लेकिन बाजार में खरीदार नहीं हैं।

अधिक कीमत से खरीदार नहीं
प्रॉपर्टी रिसर्च फर्म लियास फोरास के सीईओ पंकज कपूर के अनुसार, महंगे फ्लैट का खरीदार नहीं मिलने की वजह उसकी अधिक कीमत है। गुरुग्राम में ती करोड़ का फ्लैट तो  बेंगलुरु में इमबेसी ग्रोव का 10 से 17 करोड़ का फ्लैट है। इतनी महंगे फ्लैट के खरीदार बाजार में है ही नहीं। इसलिए बिल्डर को इन फ्लैट को बेचने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। 

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