Budget 2023: पीएम आवास योजना शहरी और ग्रामीण को इस बार भी मिल सकता है भारी भरकम बजट, 84 लाख घरों का लक्ष्य
मुख्य बातें
- प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी और ग्रामीण को इस साल भी भारी भरकम बजट आवंटन हो सकता है, ताकि चुनावी साल में दोनों क्षेत्रों में मंजूर किए गए आवासों को पूरा कर लाभार्थियों को सौंपा जा सके

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी और ग्रामीण को इस साल भी भारी भरकम बजट आवंटन हो सकता है, ताकि चुनावी साल में दोनों क्षेत्रों में मंजूर किए गए आवासों को पूरा कर लाभार्थियों को सौंपा जा सके। योजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इस बार लगभग 40 हजार करोड़ का बजट आवंटन मिलने की उम्मीद है। शहरी योजना में 122.69 लाख मकानों को स्वीकृति दी जा चुकी है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में ढाई करोड़ घरों को मंजूरी दी गई है।
पीएमएवाई (शहरी) 2015 में शुरू की गई थी और सरकार का आकलन 1.12 करोड़ घरों का था। इसे अगस्त 2022 में पूरा होना था। बाद में इसे 2024 तक बढ़ा दिया गया। साथ ही अब तक पहले से तय अनुमान से ज्यादा 1.22 करोड़ घरों को भी मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें 68.02 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं। 2.03 लाख करोड़ की केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी जा चुकी है, जबकि 1.35 लाख करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार को 2.9 करोड़ आवास बनाने हैं। इनमें 2.5 करोड़ आवास को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें 2.10 करोड़ पूरे भी हो चुके हैं।
84 लाख घरों का लक्ष्य
सूत्रों के अनुसार सरकार 2024 तक के लिए 84 लाख घरों का लक्ष्य रख सकती है। इसके लिए लगभग 40 हजार करोड़ रुपए का बजट आवंटन हो सकता है। पिछली बार 48 हजार करोड़ का बजट आवंटन मिला था। दरअसल सरकार की कोशिश 2024 तक सभी को शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में आवास मुहैया कराने की है। ऐसे में इस बार बजट आवंटन के साथ काम में और ज्यादा तेजी देखी जा सकती है।
पिछले बजट में मिले थे 48 हजार करोड़ रुपए
गौरतलब है कि पिछले बजट में योजना के लिए आवंटित कुल 48 हजार करोड़ रुपए में से 28 हजार करोड़ रुपए पीएमएवाई (शहरी) और 20 हजार करोड़ पीएमएवाई (ग्रामीण) के लिए थे। दोनों चरणों को आगे बढ़ाया जा चुका है क्योंकि स्वीकृत आवासों के लिए निर्धारित समयसीमा तक काम पूरा नहीं किया जा सका है। हालांकि पूर्व के अनुमान से ज्यादा आवास भी बढ़ाए गए हैं। पीएमएवाई (शहरी) को अगस्त 2022 तक पूरा किया जाना था, लेकिन पिछले साल इसकी समय-सीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर 2024 कर दी गई।
रियल एस्टेट को इंडस्ट्री स्टेटस का मिले दर्जा
शॉलीमार कार्प के पूर्णकालिक निदेशक, ख़ालिद मसूद कहते हैं कि आवास निर्माण की लागत सस्ती होनी चाहिए क्योंकि यह रियल एस्टेट क्षेत्र को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देता है, जो विभिन्न रूपों में सरकारी खजाने में 30% का योगदान देता है। रियल एस्टेट क्षेत्र 36.2% रोजगार देता है और विभिन्न उद्योग रियल एस्टेट से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होते हैं। रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जिससे निर्माण लागत घटेगी और बड़े पैमाने पर लाभ होगा। रियल एस्टेट को इंडस्ट्री स्टेटस देने का मुद्दा लंबे समय से लंबित है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यू इंडिया’ दृष्टिकोण के मद्देनजर हम अनुरोध करते हैं कि सरकार को रियल एस्टेट को इंडस्ट्री स्टेट्स प्रदान करना चाहिए।
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