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Economic Survey 2021: कुछ देर में आर्थिक सर्वे पेश करेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, जानें क्या रहेगी भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार

मिंट,नई दिल्लीPublished By: Tarun Singh
Fri, 29 Jan 2021 12:27 PM
Economic Survey 2021: कुछ देर में आर्थिक सर्वे पेश करेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, जानें क्या रहेगी भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार

1 फरवरी को देश का आम बजट 2021-22 संसद में पेश किया जाएग। शुक्रवार को शुरू हो रहे बजट सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आर्थिक सर्वे पेश करेंगी। वित्त मंत्री आर्थिक सर्वे में 11 प्रतिशत ग्रोथ रेट का दावा पेश कर सकती हैं। सूत्रों के अनुसार सरकार का मानना है कि महामारी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था तेज से रिकवरी करेगा।

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कोरोना वायरस के कारण पिछला एक साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत सही नहीं रहा है। लाॅकडाउन के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंची थी। लेकिन अब जब एक बार फिर सबकुछ धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। कोरोना वायरस का वैक्सीन लोगों को लगाया जा रहा है, ऐसे में  विशेषज्ञ उम्मीद कर रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर पटरी पर लौट आएगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जिसने कुछ साल पहले यह उम्मीद जताई थी की भारतीय अर्थव्यवस्था के अगले कुछ साल शानदार रहने वाले हैं। उसने भी इस वित्तीय वर्ष के लिए चिंता जाहिर की है। 

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आजादी के बाद पहली बार मुद्रास्फीति के 15.4 % बढ़ने की उम्मीद 

सूत्रों के अनुसार मुद्रास्फीति 15.4 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। अगर ऐसा हुआ तो आजादी के बाद पहली मुद्रास्फीति में इतनी बढ़ोत्तरी देखी जाएगी। यह सर्वे इसलिए भी महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इसी के आधार पर सरकार बजट पेश करती है। ऐसे में सभी की निगाहें सरकार के आर्थिक सर्वे पर टिकी हुई है। 

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क्या है आर्थिक सर्वेक्षण

आर्थिक सर्वेक्षण अर्थव्यवस्था की सालाना आधिकारिक रिपोर्ट होती है। इस दस्तावेज को बजट सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाता है। इसमें भविष्य में बनाई जाने वाली योजानाओं और अर्थव्यवस्था में आने वाली चुनौतियों की सारी जानकारी दी जाती है। इस सर्वेक्षण में देश के आर्थिक विकास का अनुमान होता है। आर्थिक सर्वेक्षण में इस बात की जानकारी दी जाती है कि आगामी वित्त वर्ष में देश की अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ेगी या फिर धीमी रहेगी। सर्वेक्षण के आधार पर ही सरकार द्वारा बजट में ऐलान किए जाते हैं, हालांकि इन सिफारिशों को मानने के लिए सरकार कानूनी तौर पर बाध्य नहीं होती है।

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