Budget 2020 Preparations to give relief to people troubled by rising inflation potatoes and onions can be sold by pds - बजट 2020: बढ़ती महंगाई से परेशान लोगों को राहत देने की तैयारी, राशन की दुकानों पर बिक सकते हैं आलू-प्याज DA Image
21 फरवरी, 2020|8:55|IST

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बजट 2020: बढ़ती महंगाई से परेशान लोगों को राहत देने की तैयारी, राशन की दुकानों पर बिक सकते हैं आलू-प्याज

onion prices rise again  reached rs 100 per kg in markets

सरकार बजट में बढ़ती महंगाई से परेशान लोगों को राहत देने के लिए नया रोडमैप पेश करने की तैयारी कर रही है। ‘हिन्दुस्तान' को मिली जानकारी के मुताबिक, नीति आयोग ने सब्जियों के बढ़ते दामों को काबू में करने के लिए जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया है। सूत्रों के मुताबिक नीति आयोग ने सरकार को सुझाव दिया है कि प्याज टमाटर और आलू जैसी सब्जियों के दाम काबू में करने के लिए इन्हें पीडीएस का हिस्सा बना दिया जाए।  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण यह फॉर्मूला आम बजट में पेश कर सकती हैं।

नीति आयोग का मानना है कि ऐसा करने से न सिर्फ इनके दामों के उतार-चढ़ाव पर काबू पाया जा सकता है बल्कि सरकार की तरफ से इस मोर्चे पर दी जा रही सब्सिडी को भी बेहतर तरीके से इस्तेमाल हो पाएगा। मामले से जुड़े अधिकारी के मुताबिक, वित्त मंत्री के बजट भाषण में नई व्यवस्था की रूपरेखा का जिक्र किया जाएगा। बाद में अगले वित्त वर्ष में योजना को अमली जामा पहनाने पर काम शुरू किया जा सकेगा। 

खाने पीने पर बड़ा खर्च

आयोग के आकलन के मुताबिक, आम उपभोक्ता के कुल खर्च का 50-55 फीसदी हिस्सा सिर्फ खाने पीने की चीजों पर ही खर्च होता है। ऐसे में लगातार बढ़ते खाद्य वस्तुओं की महंगाई ने न सिर्फ आम लोगों को परेशान किया है बल्कि सरकार भी इस दिशा में नई रणनीति बनाने में जुट गई है। 

नीति आयोग में मंथन 

महंगाई कम करने को लेकर वित्त मंत्रालय और नीति आयोग के बीच बैठक हुई है जिसमें चर्चा के दौरान इन वस्तुओं को पीडीएस का हिस्सा बनाने पर विचार विमर्श किया गया। पिछले साल दिसंबर महीने में खुदरा महंगाई दर साढ़े पांच साल की ऊंचाई 7.35 फीसदी पर पहुंच गई है। महंगाई की इस दर में सब्जियों और खाने पीने की चीजों के दाम का अहम योगदान रहा है। 

राज्यों और केद्र के बीच तालमेल का अभाव

सब्जियों के बढ़ते दामों को काबू में करने के लिए राज्यों और केंद्र सरकार के बीच बिगड़ते तालमेल का खामियाजा भी उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ता है। आशंका जताई जा रही है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए रिजर्व बैंक भी फरवरी महीने में संभावित ब्याज दरों की कटौती के फैसले को टाल सकता है। इस आशंका को देखते हुए उम्मीद ये भी की जा रही है कि सरकार रिजर्व बैंक के लिए महंगाई के पैमाने की समीक्षा कर नई दरें भी निर्धारित कर सकती है। ताकि अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने के रास्ते में सस्ता कर्ज आड़े न आ सके।
 

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