DA Image
24 फरवरी, 2020|7:15|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

नरेंद्र मोदी सरकार के 5 बजट, जानें क्या था इनमें खास

pm narendra modi congratulated hemant soren and the jmm-led alliance for the victory in the jharkhan

साल 2015-16 के बाद ऐसा पहली बार होगा जब बजट 2020 शनिवार को पेश किया जाएगा।  वित्त वर्ष 2020-21 का आम बजट पहली फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। वैसे बजट से एक दिन पहले यानी 31 जनवरी को इकनॉमिक सर्वे जारी किया जाएगा। इसके बाद शनिवार 1 फरवरी को आम बजट पेश किया जाएगा। छह साल के निचले स्तर पर पहुंची भारत की आर्थिक विकास दर को रफ्तार देने के लिए ढांचागत सुधारों की दूसरी लहर की उम्मीद में एक फरवरी को पेश होने वाले बजट 2020-21 का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। आइए जानें मोदी सरकार के पहले 5 पूर्ण बजट के बारे में।।

मोदी सरकार का पांचवां बजट (2018-19)

इस बजट से पहले केन्द्र सरकार के सामने 8 राज्यों में चुनाव के साथ-साथ साल के अंत में लोकसभा चुनाव का सामना करने की चुनौती थी। लिहाजा, इस बजट को लोकलुभावन बनाते हुए सरकार के सामने अपनी फ्लैगशिप योजनाओं के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान करने की चुनौती थी। हालांकि बजट ने मध्य वर्ग को मायूस किया।

union finance minister nirmala sitharaman presention union budget 2019  ani pic

खास बातें

  • चुनावों के मद्देनजर जहां सरकार ने इस बजट के जरिए किसानों की आमदनी को दोगुना करने की कवायद की वहीं, सभी के लिए घर की परियोजना के लिए बड़ा प्रावधान किया गया। बजट में सरकार ने 37 लाख घरों के निर्माण के लिए सरकारी मदद का ऐलान किया।
  • इस बजट में सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा के तहत 50 करोड़ लोगों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा देने की घोषणा की और 250 करोड़ रुपये टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स की दर 25 फीसदी तय की।
  • हालांकि बजट की स्पीच में कालाधन, स्वच्छता मिशन, फसल बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, स्मार्ट सिटी, निर्भया फंड, जैसी योजनाओं के लिए कुछ नहीं कहा गया, जबकि रक्षा बजट में भी बड़ी कटौती देखने को मिली थी।

मोदी सरकार का चौथा बजट: 2017-18

मोदी सरकार ने अपने चौथा बजट देश में नोटबंदी लागू करने के बाद किया। जहां नवंबर 2016 में नोटबंदी के जरिए सरकार ने कालेधन पर लगाम के लिए सर्वाधिक प्रचलित 500 और 1000 रुपये की करेंसी को प्रतिबंधित कर दिया था वहीं 2000 रुपये के नए नोट का संचालन किया था। इसके चलते वार्षिक बजट के सामने बाजार में कमजोर पड़ती मांग सरकार के लिए बड़ी चुनौती थी।

इससे पहले के दोनों बजटों में किए प्रावधानों के बाद जहां देश की जीडीपी ग्रोथ को मजबूती मिली थी, जबकि इस बजट से पहले नोटबंदी ने रफ्तार पर ब्रेक लगाने का काम किया। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर इस बजट से पहले कच्चे तेल की कीमतों से सरकार के राजस्व पर दबाव बढ़ने लगा था और बजट के बाद ही जुलाई 2017 में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स लागू करने की चुनौती थी।

मोदी सरकार का तीसरा बजट (2016-17)

मोदी सरकार के तीसरे बजट के सामने विकास के अच्छे आंकड़े थे। बजट से ठीक पहले वैश्विक मुद्रा कोष भारत को वैश्विक सुस्ती के बीच चमकता सितारा कह चुका था। कार्यकाल के तीसरे साल में पहुंची मोदी सरकार की सभी बड़ी योजनाएं बजटीय प्रावधान को देख रही थीं। वहीं सरकार के सामने कच्चे तेल की कमजोर कीमतों से हुई बचत को विकास कार्यों में खर्च करने की चुनौती थी।

इसके अलावा इस बजट के जरिए सरकार को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए भी प्रावधान करना था। इनके अलावा, कृषि क्षेत्र के सामने गंभीर समस्या खड़ी थी। लगातार दो साल से कमजोर मानसून के चलते किसानों के समस्या और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए धन का प्रावधान करने का दबाव था।

मोदी सरकार का दूसरा बजट (2015-16)

केन्द्र सरकार के दूसरे बजट को संसद में पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दावा किया कि एनडीए सरकार ने नौ महीनों के कार्यकाल के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाने का काम किया है। जेटली ने कहा था कि अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से दौड़ने के लिए तैयार है। जेटली ने यह भी दावा किया कि भारत दुनिया में सबसे तेज दौड़ने वाली अर्थव्यवस्था बन चुका है और खास बात है कि केन्द्र सरकार ने बजट से पहले जीडीपी आंकलन के फॉर्मूले में परिवर्तन किया जिससे नई विकास दर का आकलन 7।4 फीसदी किया गया।

यह भी पढ़ें: बजट अब तक: जानिए 1951-52 के बजट की 10 अहम बातें

अपने पहले साल के कार्यकाल के दौरान सरकार ने 12 करोड़ से अधिक परिवारों को आर्थिक मुख्यधारा में लाने का भी दावा किया। इस वार्षिक बजट के जरिए केन्द्र सरकार ने देश में जीएसटी लागू करने और जनधन, आधार और मोबाइल के जरिए डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर को लॉन्च करने के लिए प्रावधान किया।

मोदी सरकार का पहला बजट (2014-15)

यह बजट मोदी सरकार ने तीन तिमाहियों के लिए पेश किया। इससे पहले पूर्व की मनमोहन सिंह सरकार पहली तिमाही का प्रावधान अपने अंतरिम बजट से कर चुकी थी। बजट भाषण में वित्त मंत्री ने संसद में कहा कि देश की जनता ने तेज विकास और गरीबी उन्मूलन के लिए नई सरकार चुनी है। अपने पहले भाषण में सरकार ने देश की सवा सौ करोड़ जनता की बेरोजगारी, इंफ्रास्ट्रक्चर और भ्रष्टाचार के खात्मे के साथ कड़े आर्थिक सुधारों को अपनी आर्थिक नीति के केन्द्र में रखने की बात कही।

खास बातें

  • मैन्युफैक्चरिंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।
  •  मध्यम वर्गीय लोगों को कई तरह की छूटें दी गई। जैसे- आयकर में बढ़ोत्तरी को 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख रूपये किया गया। 
  • 80 सी के अंतर्गत बचत की सीमा को एक लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख रूपये किया गया।
  • हाउसिंग लोन पर छूट की सीमा 1.5 लाख रूपये से बढ़ाकर 2 लाख रूपये की गई।
  • पिछली सरकार की तरफ से तय की गई 4.1% राजकोषीय घाटे को पूरा किया गया। इसके साथ ही, एक्सपेंडीचर मैनेजमेंट कमीशन की स्थापना की गई।  
  • बीमा और रक्षा पर एफडीआई (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) की सीमा को बढ़ाकर 26 फीसदी से 49 किया गया।
  • जीएसटी को जल्द से जल्द लागू करने का भी संकेत दिया गया।
  •  कई घोषणाएं की गई जिनमें 24 घंटे घरेलू बिजली देना का भी वादा था। ग्रामीण इलाकों में शहर जैसी सुविधाएं देने का भी वादा किया गया।
  • स्टार्ट अप्स को बढ़ावा दिया गया और स्मार्ट सिटीज का भी ऐलान किया गया।
  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:budget 2020 5 full budgets of Narendra Modi government know what was special among them