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हिंदी न्यूज़ बिजनेसरिलायंस जैसी कंपनियों को झटका, सरकार ने विंडफॉल टैक्स बढ़ाया; डीजल को विदेश भेजने पर देना होगा अधिक TAX

रिलायंस जैसी कंपनियों को झटका, सरकार ने विंडफॉल टैक्स बढ़ाया; डीजल को विदेश भेजने पर देना होगा अधिक TAX

सरकार ने डीजल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स को बढ़ाकर 13.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि विमानों के संचालन में इस्तेमाल होने वाले एटीएफ के एक्सपोर्ट पर इसे बढ़ाकर 9 रुपये प्रति लीटर कर दिया है।

रिलायंस जैसी कंपनियों को झटका, सरकार ने विंडफॉल टैक्स बढ़ाया; डीजल को विदेश भेजने पर देना होगा अधिक TAX
Tarun Singhलाइव मिंट,नई दिल्लीThu, 01 Sep 2022 09:13 AM

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सरकार ने डीजल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स को बढ़ाकर 13.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि विमानों के संचालन में इस्तेमाल होने वाले एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के एक्सपोर्ट पर इसे बढ़ाकर 9 रुपये प्रति लीटर किया गया है। वहीं, घरेलू सरकार ने घरेलू स्तर पर उत्पादित क्रूड ऑयल पर भी शुल्क 13000 रुपये प्रति टन 300 रुपये बढ़ाकर 13,300 रुपये कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय की तरफ से 31 अगस्त की रात को नोटिफिकेशन जारी करके इसकी जानकारी दी गई थी। सरकार के इस नए फैसले से रिलायंस जैसी कंपनियों को झटका लगा है। 

सरकार की तरफ से जारी किए गए नोटिफिकेशन में कहा गया है कि रिव्यू करने के बाद डीजल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स को सात रुपये से बढ़ाकर 13.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया, जबकि एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के निर्यात पर इसे दो रुपये बढ़ाकर 9 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया। बता दें, भारत ने पहली बार एक जुलाई को विंडफाल टैक्स लगाया गया था।

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कच्चे तेल की कीमतों में तेज इजाफा

4 अगस्त को क्रूड ऑयल की कीमते घटकर 95 डॉलर प्रति बैरल हो गया था। आगे इसमें और गिरावट देखी गई। अगस्त के बीच में क्रूड ऑयल की कीमतें घटकर 92.34 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर आ गई थी। हालांकि, पिछले सप्ताह कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली है। एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को बार कर गई हैं। बता दें, भारत अपनी जरूरतों को 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। 17 अगस्त की तुलना में 30 अगस्त को भारत को एक बैरल तेल के लिए 11 प्रतिशत अधिक खर्च करना पड़ा था। ओपेक के द्वारा कच्चे तेल के प्रोडक्शन में कटौती के बाद से ही क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। 

तेल की बढ़ती कीमतें हैं सरकार का सिरदर्द 

इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में हो रहा इजाफा सरकार और रिजर्व बैंक के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है। कीमतों में हो रही बढ़ोतरी की वजह से महंगाई को नियंत्रित करने के प्रयासों को झटका लग सकता है। बता दें, अप्रैल में महंगाई अपने उच्चतम स्तर 7.8 प्रतिशत के लेवल पर पहुंच गया था। वहीं, अगस्त में यह 6.71 प्रतिशत रहा है। महंगाई दर 6 प्रतिशत से अधिक होने की वजह से यह सरकार के लिए अब भी बड़ी चिंता है। 

क्या है विंडफॉल टैक्स

विंडफॉल टैक्स ऐसी कंपनियों पर लगाया जाता है, जिन्हें किसी खास तरह के हालात से फायदा होता है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई थी। इससे तेल कंपनियों को काफी फायदा मिला था। 

(एजेंसी के इनपुट के साथ)

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